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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 05, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Gujrat : बहुचर्चित कानून गुजटॉक को राष्‍ट्रपति से मिली मंजूरी, जानिये क्‍या है इसमें खास

राज्‍य सरकार गुजटॉक के लिए विशेष अदालतों का गठन करेगी, अन्‍यथा डिविजन सैशंस कोर्ट में मामला चल सकेगा।

By Navodit SaktawatEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Tue, 05 Nov 2019 11:03:40 PM (IST)Updated Date: Wed, 06 Nov 2019 12:19:50 AM (IST)
Gujrat : बहुचर्चित कानून गुजटॉक को राष्‍ट्रपति से मिली मंजूरी, जानिये क्‍या है इसमें खास

अहमदाबाद। आतंकवाद व संगठित अपराध पर नकेल कसने के लिए बनाए गए बहुचर्चित कानून गुजटॉक को राष्‍ट्रपति से मंजूरी मिल गई है। आतंकवाद के साथ शराब की तस्‍करी, फि‍रौती, जालसाजी जैसे अपराधों पर शिकंजा कसेगा। मुंबई के मकोका जैसे इस कानून को 16 साल बाद मंजूरी मिली है।

गृह राज्‍यमंत्री प्रदीप सिंह जाडेजा ने बताया कि गुजरात आतंकवाद नियंत्रण एवं संगठित अपराध अधिनियम को राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी मिलने से गुजरात जैसे सीमावर्ती राज्‍य की सुरक्षा व अपराध की जांच के लिए पुलिस को अधिक अधिकार और समय मिल सकेगा। राज्‍य सरकार गुजटॉक के लिए विशेष अदालतों का गठन करेगी, अन्‍यथा डिविजन सैशंस कोर्ट में मामला चल सकेगा।


सरकार अतिरिक्‍त सरकारी वकील व लोक अभियोजकों की नियुक्ति कर सकेगी। जाडेजा ने बताया कि वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्‍यमंत्री रहते राज्‍य के नागरिकों की सुरक्षा के लिए गुजटॉक कानून का मसौदा तैयार किया था जिसे 16 साल बाद मंजूरी मिल सकी है।

जाडेजा ने बताया कि गुजटॉक कानून से आतंकवाद के साथ सुपारी देकर हत्‍या कराने, मादक पदार्थों की तस्‍करी, फिरौती वसूलने, प्रतिबंधित माल की हेराफेरी, अपहरण, जालसाजी पूर्ण योजनाओं व मल्‍टी लेवल मार्केटिंग जैसी योजनाओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा। उनका कहना है कि विदेशों में बैठकर राज्‍य में आतंकवाद को प्रश्रय देने वालों को पुलिस संदेश व्‍यवहारों के आधार पर पकड़ सकेगी। पुलिस के समक्ष दिया गया बयान अदालत में सबूत के रुप में मान्‍य होगा।

कैसे बना गुजटॉक

महाराष्‍ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्‍ड क्राइम एक्‍ट मकोका की तर्ज पर बने गुजरात कंट्रोल टेरेरिज्‍म एंड ऑर्गेनाइज्‍ड क्राइम एक्‍ट को पहली बार जून 2004 में देश के गृहमंत्री अमित शाह ने गुजरात सरकार में गृह राज्‍यमंत्री रहते गुजरात कंट्रोल ऑर्गेनाइज्‍ड क्राइम बिल के रूप में पेश किया था। गुजकॉक कानून को लेकर तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र के साथ एक लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी थी।

राष्‍ट्रपति व राज्‍यपालों ने इस कानून को कई बार संशोधन के लिए वापस भी लौटाया वहीं कांग्रेस ने इसकी जरुरत पर ही यह कहते हुए सवाल उठा दिए थे कि इसका अल्‍पसंख्‍यकों के खिलाफ दुरुपयोग होगा। राज्‍यपाल नवल किशोर शर्मा व राज्‍यपाल डॉ कमला के कार्यकाल में यह काफी विवादास्‍पद बना रहा। राज्‍यपाल ओ पी कोहली ने 2015 में इसे राष्‍ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा था।

क्‍यूं होता रहा इसका विरोध

आतंकवाद के अलावा यह कानून सुपारी देकर हत्‍या कराने, मादक पदार्थों की तस्‍करी, फिरौती वसूलने, प्रतिबंधित माल की हेराफेरी, अपहरण, जालसाजी पूर्ण योजनाओं व मल्‍टी लेवल मार्केटिंग जैसी योजनाओं के जरिए लोगों से आर्थिक धोखाधड़ी पर भी लगाम कसता है।

इस कानून के तहत पुलिस अधिकारी के समक्ष दिया गया बयान सबूत के रूप में मान्‍य होगा साथ ही पुलिस को आरोप पत्र पेश करने के लिए छह माह का समय मिलेगा। अन्‍य अपराध में चार्जशीट 90 दिन में पेश करनी होती है।