अहमदाबाद। गुजरात दंगों का चेहरा रहे अशोक परमार उर्फ अशोक मोची आज मुस्लिम-दलित एकता की पहचान हैं। कभी हाथ में लोहे की रॉड लिए चेहरे पर गुस्से दिखा रहे अशोक ने उस दिन की जो कहानी बताई, वो हैरान करने वाली है।

वह बताते हैं कि उस दिन उस तरह से खड़े होने के लिए उन्हें एक फोटोग्राफर ने कहा था। इसके बाद की कहानी तो सब जानते हैं। जब उनसे पूछा गया कि उन्‍होंने ऐसे पोज क्‍यों दिया था, तो उन्‍होंने बताया कि दंगों से कुछ दिन पहले ही उस लड़की की शादी हो गई, जिससे वह प्‍यार करते थे।

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उस दिन सुबह 10 बजे जब गुजरात में बंद हो रहा था, तब उनकी दाढ़ी बढ़ी हुई थी और वह मुस्लिम की तरह दिख रहे थे। हिंदू लोग मुस्लिमों को गोधरा का बदला लेने के लिए मार रहे थे। ऐसे में खुद को हिंदू बताने के लिए उन्‍होंने माथे पर भगवा पट्टी बांध ली थी। बंद के कारण उनके जैसे दिहाड़ी मजदूरों का नुकसान हो रहा था।

बंद के कारण वह पैसे नहीं कमा पाए और इसके चलते उन्‍हें कुछ खाने को नहीं मिला, जिससे वह आक्रोशित थे। इसी दौरान एक फोटोग्राफर ने उनसे लोहे की राड लेकर पोज देने को कहा। उन्‍होंने कहा कि क्‍या मैं किसी भीड़ में शामिल था। नहीं, मैं अकेले ही अलग खड़ा था।

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आज वह दलितों और मुस्लिमों की एकता के लिए काम कर रहे हैं। उन्‍होंने अपने कुछ दोस्‍तों के साथ 10 दिनों की यात्रा की, जो 15 अगस्‍त को ऊना में खत्‍म हुई। वही, जगह जहां गाय के मांस को लेकर कुछ दलितों की पिटाई की गई थी। इस यात्रा में अशोक के कुछ मुस्लिम दोस्‍त भी शामिल थे।

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