अहमदाबाद। पूर्ववर्ती राजपिपला स्टेट के वंशज मानवेंद्र सिंह गोहिल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में आइपीसी की धारा 377 को अपराध के दायरे से बाहर किया जाने से उन्हें वास्तविक स्वतंत्रता मिली है।
यह धारा सहमति से अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने से संबंधित है। राजकुमार ने कहा कि देश की आजादी के 71 वर्ष बाद यह आजादी मिली है।
पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने गुरुवार को ध्वनिमत से 158 वर्ष पुराने उपनिवेश कालीन कानून के हिस्से को अपराध मुक्त कर दिया। इस कानून के तहत सहमति से अप्राकृतिक यौन संबंध को अपराध घोषित किया गया था।
शीर्ष कोर्ट ने धारा 377 के इस हिस्से को अतार्किक, समर्थन के लायक नहीं और स्पष्ट रूप से भेदभाव पूर्ण माना है। गोहिल ने अपने यौन स्वीकृति कुछ साल पहले सार्वजनिक की थी।
वह एलजीबीटीक्यू समुदाय की बेहतरी के लिए अपने लक्ष्य ट्रस्ट के माध्यम से काम कर रहे हैं। उनके समर्थकों ने उन्हें ग्रे प्रिंस उपनाम से नवाजा है।
वडोदरा में गोहिल ने संवाददाताओं से कहा, 'देश की आजादी के 71 वर्ष बाद इस फैसले ने हमें मुक्त कर दिया है। मेरे और मेरे समुदाय के लिए यही वास्तविक स्वतंत्रता का दिन है।
एलजीबीटीक्यू समुदाय के लिए यह सकारात्मक प्रगति है। हम मुक्त महसूस कर रहे हैं, आज हम भार मुक्त हो गए हैं। इस ऐतिहासिक फैसले से दुनिया में देश की छवि सुधरेगी। अन्य देश जहां गे सेक्स को अपराध माना जाता है वह भी भारत के उदाहरण को अपनाएंगे।'
एमनेस्टी ने कहा
न्याय के लिए संघर्ष करने वालों की उम्मीद बढ़ी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन करते हुए एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने कहा कि इससे न्याय और बराबरी के लिए संघर्ष करने वालों की उम्मीद बढ़ी है।
इस फैसले ने भारतीय इतिहास के काले अध्याय का दरवाजा बंद कर दिया है। फैसले ने भारत में लाखों लोगों के लिए बराबरी के नए युग की शुरुआत की है।