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1980s वाला AI फोटो ट्रेंड बना सकता है मुसीबत? बायोमेट्रिक डेटा भी हो सकता है चोरी…फोटो अपलोड करने से पहले जान लें 3 जरूरी बातें

सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरों को 1980 की रेट्रो ईयरबुक पोर्ट्रेट में बदलने का ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है। लेकिन, अनजान AI ऐप्स और वेबसाइट्स पर अपनी...और पढ़ें

By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Thu, 17 Sep 2026 02:09:48 PM (IST)Updated Date: Thu, 17 Sep 2026 02:09:48 PM (IST)
1980s वाला AI फोटो ट्रेंड बना सकता है मुसीबत? बायोमेट्रिक डेटा भी हो सकता है चोरी…फोटो अपलोड करने से पहले जान लें 3 जरूरी बातें
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे 1980s रेट्रो ईयरबुक AI फोटो ट्रेंड के पीछे छिपा बायोमेट्रिक डेटा और प्राइवेसी का खतरा। (AI जनरेटेड)

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। इन दिनों सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीर को 1980 की रेट्रो ईयरबुक पोर्ट्रेट में बदलने का ट्रेंड वायरल हो रहा है। कुछ सेकंड में सामान्य सेल्फी पुराने जमाने की तस्वीर जैसी दिखाई देने लगती है। देखने में यह सिर्फ मनोरंजन लगता है, लेकिन किसी अनजान AI ऐप या वेबसाइट पर अपनी असली तस्वीर अपलोड करने से पहले कुछ डिजिटल सुरक्षा सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए।

AI फोटो टूल को तस्वीर देने का मतलब यह जरूरी नहीं कि आपकी फोटो का गलत इस्तेमाल होगा, लेकिन आपकी तस्वीर किस सर्वर पर जा रही है, कितने समय तक रखी जाएगी और कंपनी उसका क्या इस्तेमाल करेगी, यह उसकी प्राइवेसी पॉलिसी पर निर्भर करता है।


AI फोटो और बायोमेट्रिक डेटा का कनेक्शन

सामान्य फोटो फिल्टर में तस्वीर के रंग, रोशनी या कुछ दूसरे विजुअल इफेक्ट बदले जा सकते हैं। वहीं कई आधुनिक AI सिस्टम चेहरे की अलग-अलग विशेषताओं का विश्लेषण करके नया चेहरा या फोटो तैयार करते हैं। यही वजह है कि अपनी तस्वीर किसी AI सेवा को देने से पहले उसकी डेटा कलेक्शन और इस्तेमाल की शर्तें देखना जरूरी है।

चेहरा पहचानने से जुड़ी जानकारी संवेदनशील हो सकती है। पासवर्ड चोरी होने पर उसे बदला जा सकता है, लेकिन चेहरे जैसी जैविक पहचान को बदलना आसान नहीं होता। ऐसे डेटा के गलत इस्तेमाल से पहचान संबंधी धोखाधड़ी या बिना अनुमति के किसी व्यक्ति की तस्वीर से डीपफेक जैसी सामग्री तैयार करने का जोखिम पैदा हो सकता है।

वायरल ट्रेंड के साथ आते हैं फर्जी ऐप

कोई फोटो ट्रेंड वायरल होते ही इंटरनेट पर उससे जुड़े कई ऐप और वेबसाइट दिखाई देने लगते हैं। इनमें से हर सेवा भरोसेमंद हो, यह जरूरी नहीं। कुछ संदिग्ध ऐप जरूरत से ज्यादा परमिशन मांग सकते हैं। उदाहरण के लिए फोटो एडिट करने वाले ऐप को अगर कॉन्टैक्ट्स, माइक्रोफोन, लोकेशन या पूरी गैलरी का एक्सेस चाहिए, तो सावधान हो जाना चाहिए। ऐप इंस्टॉल करने से पहले यह देखें कि उसे वास्तव में कौन-सी परमिशन चाहिए और उसका डेवलपर कौन है।

मुफ्त AI टूल की असली कीमत क्या है?

‘फ्री’ सेवा का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि आपकी तरफ से कोई डेटा साझा नहीं किया जा रहा। कुछ कंपनियां यूजर डेटा को अपने बिजनेस मॉडल का हिस्सा बना सकती हैं। किसी सेवा की शर्तों में डेटा को AI मॉडल सुधारने, विज्ञापन, एनालिटिक्स या दूसरे उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति हो सकती है।

इसलिए AI फोटो बनाने से पहले उसकी Privacy Policy और Terms of Service पढ़ना जरूरी है। सिर्फ दो-तीन फोटो मुफ्त बनाने के बाद सब्सक्रिप्शन मांगना अलग बात है, जबकि आपकी फोटो या अन्य जानकारी का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है, यह सेवा की नीतियों पर निर्भर करता है।

फोटो के साथ छिपी जानकारी भी हो सकती है

डिजिटल तस्वीरों में कभी-कभी EXIF मेटाडेटा मौजूद होता है। इसमें कैमरा मॉडल, फोटो लेने का समय और कुछ मामलों में GPS लोकेशन जैसी जानकारी शामिल हो सकती है।

अगर किसी फोटो में लोकेशन डेटा मौजूद है और वह किसी सार्वजनिक प्लेटफॉर्म या अनजान व्यक्ति के साथ साझा हो जाता है, तो यह प्राइवेसी के लिए जोखिम बन सकता है। हालांकि, हर फोटो में GPS लोकेशन सेव हो, यह जरूरी नहीं है। यह कैमरा, फोन और उसकी सेटिंग पर निर्भर करता है।

अपनी तस्वीर को सुरक्षित रखने के 3 आसान तरीके

1. AI ट्रेनिंग की परमिशन जांचें

अगर किसी सेवा में आपकी सामग्री को AI मॉडल ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल करने से जुड़ी सेटिंग उपलब्ध है, तो उसे ध्यान से पढ़ें और जरूरत न होने पर ऑप्ट-आउट विकल्प चुनें।

2. असली फोटो की जगह AI-generated चेहरा इस्तेमाल करें

अगर सिर्फ किसी AI ट्रेंड को आजमाना है, तो अपनी वास्तविक पहचान वाली तस्वीर अपलोड करने के बजाय काल्पनिक चेहरा या ऐसी तस्वीर इस्तेमाल की जा सकती है जिसमें व्यक्तिगत पहचान कम हो।

3. शेयर करने से पहले मेटाडेटा जांचें

फोटो शेयर करने से पहले देखें कि उसमें लोकेशन जैसी संवेदनशील जानकारी तो मौजूद नहीं है। जरूरत पड़ने पर डिवाइस या फोटो-एडिटिंग टूल के जरिए मेटाडेटा हटाया जा सकता है।

हर वायरल ट्रेंड के साथ रखें डिजिटल सावधानी

रेट्रो फोटो फिल्टर हो या कोई दूसरा AI ट्रेंड, किसी भी अनजान ऐप पर अपनी तस्वीर अपलोड करने से पहले कुछ सवाल जरूर पूछें- ऐप किसने बनाया है, कौन-सी परमिशन मांग रहा है, फोटो कहां स्टोर होगी और कंपनी उसका इस्तेमाल किस काम के लिए करेगी?

कुछ मिनट का ट्रेंड खत्म हो सकता है, लेकिन इंटरनेट पर साझा की गई निजी जानकारी का नियंत्रण हमेशा पूरी तरह वापस पाना आसान नहीं होता। इसलिए AI का इस्तेमाल करें, लेकिन अपनी डिजिटल पहचान और निजी डेटा की कीमत समझकर।

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