
हेल्थ डेस्क। दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ अच्छी नींद और एक्सरसाइज ही नहीं, बल्कि सही खानपान भी जरूरी है। हम जो खाते हैं, उसका असर शरीर के साथ दिमाग की वर्किंग पर भी पड़ता है। कुछ न्यूट्रिएंट्स दिमाग की सेल्स के सामान्य कामकाज, याददाश्त और एकाग्रता को बनाए रखने में मदद करते हैं।
अमेरिका के NYU लैंगोन हॉस्पिटल, ब्रुकलिन में न्यूरोलॉजी प्रमुख डॉ. आरोन लॉर्ड ने New York Post को बताया कि न्यूट्रिएंट्सों से भरपूर डाइट दिल, ब्लड सेल्स और दिमाग की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, खानपान का असर दिमाग पर भी पड़ता है।
डॉ. लॉर्ड नियमित रूप से कुछ ऐसी चीजें खाते हैं, जिनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट जैसे न्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं। आइए जानते हैं इन 5 चीजों के बारे में और यह भी कि इन्हें भारतीय डाइट में कैसे शामिल किया जा सकता है।
सैल्मन जैसी फैटी फिश ओमेगा-3 फैटी एसिड का अच्छा सोर्स है। ओमेगा-3 में DHA और EPA जैसे फैटी एसिड शामिल होते हैं, जो शरीर में कई महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। DHA दिमाग की सेल्स की संरचना का एक अहम हिस्सा है।
डॉ. लॉर्ड अपनी डाइट में मछली शामिल करते हैं। उनका सुझाव है कि संभव हो तो ताजी मछली चुनें। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति के लिए जंगली मछली फार्म में पाली गई मछली से हमेशा बेहतर हो। दोनों की पोषण गुणवत्ता मछली की प्रजाति और पालन की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
भारतीय डाइट में कैसे शामिल करें?
जो लोग मछली नहीं खाते, वे अलसी, चिया सीड्स और अखरोट से ALA नाम का ओमेगा-3 फैटी एसिड प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, शरीर ALA को DHA और EPA में सीमित मात्रा में बदलता है।
पालक, सरसों का साग, मेथी और दूसरी हरी पत्तेदार सब्जियां शरीर को फोलेट, फाइबर और कई विटामिन उपलब्ध कराती हैं। ये न्यूट्रिएंट्स शरीर के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी हैं।
डॉ. लॉर्ड बोक चॉय, एस्पैरागस और ब्रोकोलिनी जैसी सब्जियां पसंद करते हैं। वे इन्हें स्टीम, ब्लांच या हल्के तेल में पकाकर खाने की सलाह देते हैं।
हरी सब्जियों में मौजूद फोलेट सेल्स के सामान्य कामकाज में मदद करता है। वहीं, फाइबर आंतों में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों के लिए उपयोगी होता है। आंत और दिमाग के बीच संबंध पर वैज्ञानिक शोध जारी है, लेकिन किसी एक सब्जी से याददाश्त बढ़ने का दावा नहीं किया जा सकता।
भारतीय डाइट में कैसे शामिल करें?
टमाटर में लाइकोपीन नाम का एंटीऑक्सिडेंट पाया जाता है। एंटीऑक्सिडेंट शरीर में ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस से निपटने में मदद करते हैं। ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस तब होता है, जब शरीर में फ्री रेडिकल्स और उन्हें नियंत्रित करने वाले एंटीऑक्सिडेंट के बीच संतुलन बिगड़ जाता है।
ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को कई बीमारियों की प्रक्रिया से जोड़ा गया है। हालांकि, सिर्फ टमाटर खाने से न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों को रोकने या याददाश्त बेहतर होने की गारंटी नहीं मिलती।
टमाटर की खास बात यह है कि इसे कच्चा और पकाकर, दोनों तरह से खाया जा सकता है। पकाने और थोड़ी मात्रा में तेल के साथ खाने से शरीर को लाइकोपीन उपलब्ध होने में मदद मिल सकती है।
भारतीय डाइट में कैसे शामिल करें?
अखरोट में ALA ओमेगा-3 फैटी एसिड, फाइबर और कई अन्य न्यूट्रिएंट्स होते हैं। इसे संतुलित डाइट में शामिल करना हृदय स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी हो सकता है।
ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी और दूसरी बेरीज में फ्लेवोनॉइड्स जैसे पौधों से मिलने वाले यौगिक पाए जाते हैं। ये एंटीऑक्सिडेंट गुणों के लिए जाने जाते हैं। कुछ शोध में बेरीज और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य के बीच संभावित संबंध पाया गया है, लेकिन इनका असर व्यक्ति की उम्र, डाइट और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों पर भी निर्भर कर सकता है।
डॉ. लॉर्ड सुबह बेरीज खाते हैं और अखरोट को ओट्स के साथ शामिल करना पसंद करते हैं।
भारतीय डाइट में कैसे शामिल करें?
चाय और कॉफी में कैफीन के अलावा कई पौधों से मिलने वाले यौगिक होते हैं। कैफीन थोड़े समय के लिए सतर्कता और एकाग्रता बढ़ा सकता है। चाय और कॉफी में मौजूद फ्लेवोनॉइड्स पर भी स्वास्थ्य संबंधी शोध हुए हैं।
कुछ अध्ययनों में कॉफी पीने और डिमेंशिया के कम जोखिम के बीच संबंध देखा गया है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि कॉफी पीने से डिमेंशिया जरूर रुक जाएगा। चाय या कॉफी को दिमागी बीमारियों से बचाने वाली दवा की तरह नहीं देखना चाहिए।
डॉ. लॉर्ड नियमित रूप से चाय पीते हैं। चाय और कॉफी का असर इस बात पर भी निर्भर करता है कि व्यक्ति कितनी मात्रा में पीता है और उसमें कितनी चीनी मिलाता है।
भारतीय डाइट में कैसे शामिल करें?
अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए FDA के अनुसार रोजाना 400 मिलीग्राम तक कैफीन ऐसी मात्रा है, जो आम तौर पर नकारात्मक प्रभावों से जुड़ी नहीं होती। लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित सीमा नहीं है। कैफीन की मात्रा पेय और उसके आकार के अनुसार काफी बदल सकती है।
दिमाग की सेहत किसी एक चीजें से तय नहीं होती। संपूर्ण डाइट, नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसे जोखिमों का नियंत्रण भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए रोजाना अलग-अलग तरह की सब्जियां और फल खाएं, साबुत अनाज और दालों को भोजन में शामिल करें, मेवे सीमित मात्रा में लें और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम रखें।