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3D प्रिंटिंग की मदद से गणेश जी का डिजिटल अवतार, स्‍क्रैप से तैयार प्रतिमा, भक्ति में युवाओं का एक्‍सपेरिमेंट

किसी ने स्क्रैप की चीजों को कलाकृति का रूप दिया है तो किसी ने मिट्टी में पौधों के बीज मिलाकर प्रतिमा तैयार की है। वहीं एक कलाकार ने 3डी तकनीक की मदद स...और पढ़ें

By bharat mandhanyaEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Thu, 24 Sep 2026 12:36:58 PM (IST)Updated Date: Thu, 24 Sep 2026 12:49:26 PM (IST)
3D प्रिंटिंग की मदद से गणेश जी का डिजिटल अवतार, स्‍क्रैप से तैयार प्रतिमा, भक्ति में युवाओं का एक्‍सपेरिमेंट
गणेश जी के नए-नए स्‍वरूप।

HighLights

  1. किसी ने स्क्रैप की चीजों को कलाकृति का रूप दिया।
  2. मिट्टी में पौधों के बीज मिलाकर प्रतिमा तैयार की है।
  3. 3डी तकनीक की मदद से प्रतिमा का ढांचा बनाया।

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। गणेशोत्सव के दौरान शहर में गणपति की अलग-अलग रूपों में प्रतिमाएं देखने को मिल रही हैं। हर साल की तरह इस बार भी कलाकारों ने भगवान गणेश की प्रतिमा को पारंपरिक रूप से अलग बनाने के लिए नए प्रयोग किए हैं।

किसी ने स्क्रैप की चीजों को कलाकृति का रूप दिया है तो किसी ने मिट्टी में पौधों के बीज मिलाकर प्रतिमा तैयार की है। वहीं एक कलाकार ने 3डी तकनीक की मदद से प्रतिमा का शुरुआती ढांचा तैयार किया और बाकी काम हाथ से किया।


इन प्रतिमाओं में कला के साथ पर्यावरण और तकनीक का मेल भी दिखाई देता है। खास बात यह है कि इन कलाकारों ने प्रतिमाओं को कुछ दिनों के उत्सव तक सीमित नहीं रखा है।

वे इनका विसर्जन नहीं करेंगे, बल्कि इन्हें सुरक्षित रखेंगे। इसके पीछे भगवान गणेश के प्रति आस्था के साथ अपनी कला को लंबे समय तक सहेजकर रखने की सोच है।

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स्क्रैप से तैयार की गणेश प्रतिमा

देवल वर्मा पिछले 10 साल से स्क्रैप से कलाकृतियां और प्रतिमाएं बना रहे हैं। इस बार उन्होंने स्क्रैप की अलग-अलग चीजों का इस्तेमाल कर भगवान गणेश की करीब चार प्रतिमाएं तैयार की हैं। इनमें एक प्रतिमा करीब दो फीट ऊंची है। इसे बनाने में लगभग दो महीने का समय लगा।

प्रतिमा में पुराने बर्तन, कटलरी, गियर, आटोमोबाइल पार्ट्स, स्प्रिंग और बेयरिंग जैसी चीजों का इस्तेमाल किया गया है। इन सामान को एक-दूसरे के साथ जोड़कर गणेशजी का आकार दिया गया।

देवल ने बताया कि उन्होंने इस प्रतिमा को गणेश चतुर्थी को ध्यान में रखकर तैयार किया था। स्क्रैप से काम करने के कारण हर प्रतिमा में अलग तरह की बनावट दिखाई देती है। इसके अलावा उन्होंने भगवान गणेश का चेहरा और एक म्यूरल भी तैयार किया है।

बीज वाली मिट्टी से तैयार की गणेश प्रतिमा

कलाकार मयंक जोशी ने इस बार गणेश प्रतिमा बनाने के लिए ऐसी मिट्टी तैयार की, जिसमें अलग-अलग पौधों के बीज मिलाए गए हैं। प्रतिमा तैयार करने से पहले मिट्टी को साफ किया।

उसमें तुलसी, गेंदा सहित कुछ स्थानीय पौधों के बीज मिलाए। इसके बाद इसी मिट्टी को आकार देकर भगवान गणेश की प्रतिमा तैयार की गई। प्रतिमा के हर हिस्से को मयंक ने हाथ से बनाया है।

इसे रंगने के लिए भी प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया गया है। मयंक ने बताया कि प्रतिमा को इस तरह तैयार किया गया है कि गणेशोत्सव के बाद भी इसका उपयोग किया जा सके। वे प्रतिमा घर पर विसर्जित करने के बाद इसी मिट्टी से पौधे तैयार किए जाएंगे।

3डी तकनीक से तैयार की प्रतिमा

कलाकार सौरभ मेहरा ने भगवान गणेश की प्रतिमा तैयार करने में 3डी तकनीक का इस्तेमाल किया। उन्होंने सबसे पहले भगवान गणेश की पूरी आकृति का डिजिटल माडल तैयार किया।

इसके बाद 3डी प्रिंटिंग की मदद से प्रतिमा का अंदरूनी ढांचा तैयार किया गया। इस ढांचे पर प्राकृतिक मिट्टी की कई परतें चढ़ाकर प्रतिमा को अंतिम रूप दिया।

इसके बाद मुकुट, आभूषण, कपड़े और दूसरे हिस्से सौरभ ने हाथ से तैयार किए। इस तरह मशीन का इस्तेमाल केवल शुरुआती ढांचा तैयार करने के लिए किया, जबकि प्रतिमा की बारीकियों पर हाथ से काम किया गया।

सौरभ के अनुसार इस तकनीक से ऐसी आकृति तैयार करने में मदद मिली, जिसे केवल हाथ से बनाते समय बार-बार एक जैसा बनाना मुश्किल होता।

प्रतिमा तैयार करने में करीब डेढ़ महीने का समय लगा। गणेशोत्सव के बाद इसका विसर्जन नहीं किया जाएगा। सौरभ इसे अपने स्टूडियो में सुरक्षित रखेंगे।