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Amarnath Yatra: 45 मिनट की वॉक और सीढ़ी चढ़ने-उतरने का अभ्यास अमरनाथ यात्रा को बनाएगा सहज

अमरनाथ यात्रा शुरू हो चुकी है और इस बार श्रद्धालुओं को हेलीकॉप्टर सेवा नहीं मिलेगी, जिससे पैदल यात्रा अनिवार्य हो गई है।

By Harshal RathoreEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Tue, 30 Jun 2026 02:04:10 PM (IST)Updated Date: Tue, 30 Jun 2026 02:19:32 PM (IST)
Amarnath Yatra: 45 मिनट की वॉक और सीढ़ी चढ़ने-उतरने का अभ्यास अमरनाथ यात्रा को बनाएगा सहज
अमरनाथ गुफा करीब 12 हजार 700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। - एआई इमेज

HighLights

  1. 12,700 फीट की ऊंचाई पर ऑक्सीजन कम होने से सांस फूल सकती है
  2. विशेषज्ञों के मुताबिक तैयारी कई सप्ताह पहले शुरू करनी चाहिए
  3. मधुमेह, बीपी, हृदय रोग, अस्थमा, मोटापे वाले लोग यात्रा से पहले जांच जरूर कराएं

नईदुनिया प्रतिनिध, इंदौर। अमरनाथ यात्रा शुरू हो चुकी है। इस बार श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ा बदलाव किया गया है, जिसके चलते उन्हें हेलीकाप्टर सेवा उपलब्ध नहीं होगी। ऐसे में श्रद्धालुओं को पैदल यात्रा करनी पड़ेगी। हालांकि, हजारों श्रद्धालु हेलीकॉप्टर के बजाय पैदल यात्रा करना ही पसंद करते हैं। अमरनाथ गुफा करीब 12 हजार 700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इस ऊंचाई पर हवा में ऑक्सीजन की मात्रा मैदानों की तुलना में काफी कम हो जाती है।

यही कारण है कि सामान्य दिनों में बिना रुके 3-4 किलोमीटर चलने वाला व्यक्ति भी यहां कुछ सौ मीटर की चढ़ाई के बाद सांस फूलने की समस्या का सामना कर सकता है। यदि आप भी अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले हैं, तो इसकी तैयारी अभी से शुरू कर देनी चाहिए।


विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश लोग यात्रा से कुछ दिन पहले चलना शुरू करते हैं, जबकि शरीर को ऊंचाई और लंबे शारीरिक श्रम के लिए तैयार होने में कई सप्ताह लगते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति बिना रुके पांच किलोमीटर तेज चाल से चल सकता है और उसके बाद भी अत्यधिक थकान महसूस नहीं होती तो यह यात्रा के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है। यात्रा से पहले रोजाना 45 मिनट से एक घंटे तक वाक करना बेहतर माना जाता है। अमरनाथ यात्रा में लगातार चढ़ना-उतरना होता है।

धीरे-धीरे बढ़ाएं क्षमता

डॉ. अमन यादव के अनुसार, यात्रा से पहले रोज 40 से 50 सीढ़ियां चढ़ने-उतरने का अभ्यास शुरू करें। धीरे-धीरे इसकी संख्या बढ़ाकर 100 तक ले जाई जा सकती है। इससे पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और हृदय लंबे समय तक श्रम सहने के लिए तैयार होता है।

वहीं, 12 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर शरीर को पर्याप्त आक्सीजन भी नहीं मिलती। इसकी वजह से सिरदर्द, बेचैनी, नींद न आना, भूख कम लगना और सांस फूलने जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं। इसे हाई एल्टीट्यूड सिकनेस कहा जाता है।

इन लोगों को यात्रा से पूर्व करवाना चाहिए जांच

  • 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग
  • मधुमेह के मरीज
  • उच्च रक्तचाप वाले लोग
  • हृदय रोगी
  • अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी वाले मरीज
  • मोटापे से ग्रस्त लोग
  • जिनको पहले कभी हार्ट अटैक आ चुका हो

यात्रा के दौरान लक्षणों को न करें नजरअंदाज

  • आराम करने के बाद भी सांस फूलना
  • सीने में दर्द या दबाव महसूस होना
  • लगातार चक्कर आना
  • उल्टी होना
  • चलने में संतुलन बिगड़ना
  • होंठ या अंगुलियां नीली पड़ना
  • अचानक अत्यधिक कमजोरी

साथ ले जा सकते हैं ये वस्तुएं

  • ड्राई फ्रूट्स, गुड़, भुना चना, और चाकलेट। ये जल्दी ऊर्जा देती हैं और आसानी से साथ ले जाई जा सकती हैं।
  • डिहाइड्रेशन से बचने के लिए ओआरएस या इलेक्ट्रोलाइट पाउडर साथ रखें।
  • अच्छी ग्रिप वाले ट्रेकिंग जूते, एक मजबूत वाकिंग स्टिक साथ रखें।
  • अस्थमा या सांस की समस्या वाले लोग रेस्क्यू इनहेलर, धूल और ठंडी हवा से कुछ सुरक्षा के लिए मास्क या स्कार्फ।

कार्डियो एक्सरसाइज भी करें

फिटनेस एक्सपर्ट राहुल शर्मा बताते हैं कि श्रद्धालुओं को सप्ताह में कम से कम पांच दिन कार्डियो एक्सरसाइज करनी चाहिए। रोजाना पांच से छह किलोमीटर वाक, सीढ़ियां चढ़ना, हल्की जागिंग और स्क्वाट्स जैसे व्यायाम पैरों और फेफड़ों को मजबूत बनाते हैं।

यात्रा से पहले सांस संबंधी क्षमता बढ़ाने के लिए प्राणायाम और गहरी सांस लेने के अभ्यास भी करना चाहिए। पर्याप्त पानी पीना, संतुलित आहार लेना और नींद पूरी करना भी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यात्रा के दौरान शरीर में ऊर्जा बनाए रखने के लिए ड्राई फ्रूट्स, फल और हल्के स्नैक्स साथ रखना चाहिए।

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