
हेल्थ डेस्क। पेरू के अमेजन जंगलों में रहने वाली Mashco Piro जनजाति की दुर्लभ तस्वीरें और वीडियो समय-समय पर दुनिया का ध्यान खींचते हैं। जनवरी 2026 में भी इस जनजाति का एक दुर्लभ हाई-डेफिनिशन वीडियो सामने आया था। Mashco Piro को दुनिया के उन Indigenous समूहों में गिना जाता है जो बाहरी समाज से बेहद सीमित या बिना संपर्क के रहते हैं।
लेकिन इन तस्वीरों के पीछे एक गंभीर स्वास्थ्य पहलू भी है। सवाल उठता है कि अगर ये लोग हमारे बीच आ जाएं या बाहरी लोग इनके संपर्क में जाएं, तो खतरा इतना बड़ा क्यों माना जाता है? इसका एक बड़ा कारण है इन्फेक्शन के खिलाफ इनके शरीर में पहले से मौजूद इम्यूनिटी का बहुत कम होना।
अक्सर सोशल मीडिया पर कहा जाता है कि अनकॉन्टैक्टेड जनजातियों की “जीरो इम्यूनिटी” होती है। यह वैज्ञानिक तौर पर सही शब्द नहीं है।
इन लोगों का इम्यून सिस्टम बिल्कुल काम करता है। वे अपने वातावरण में मौजूद इन्फेक्शन से लड़ने में सक्षम होते हैं। समस्या यह है कि बाहरी समाज में लंबे समय से फैल रहे कई इन्फेक्शन का इनके शरीर ने सामना नहीं किया होता।
हमारी तरह उन्हें बचपन से कई इन्फेक्शन के संपर्क और कई बीमारियों के खिलाफ टीकाकरण का अनुभव भी नहीं मिला होता। इसलिए इन्फ्लूएंजा, खसरा या चिकनपॉक्स जैसे इन्फेक्शन के खिलाफ उनकी आबादी में पहले से बनी इम्यूनिटी बहुत कम हो सकती है।
Survival International के अनुसार, अलग-थलग समुदायों के लिए इन्फ्लूएंजा, खसरा और चिकनपॉक्स जैसे इन्फेक्शन विशेष रूप से खतरनाक हो सकते हैं।
बाहरी दुनिया में रहने वाले व्यक्ति के लिए सर्दी-जुकाम या फ्लू कई बार कुछ दिनों में ठीक हो सकता है। लेकिन किसी ऐसे समुदाय में जहां उस इन्फेक्शन के खिलाफ पहले से पर्याप्त इम्यूनिटी न हो, उसका असर बहुत गंभीर हो सकता है।
इतिहास में इसके कई उदाहरण मिलते हैं। UN की एक रिपोर्ट में पेरू के नाहुआ समुदाय का उदाहरण दिया गया है। 1980 के दशक में बाहरी गतिविधियों और संपर्क के बाद वहां खांसी, चेचक और इन्फ्लूएंजा जैसे इन्फेक्शन पहुंचे और अनुमान के मुताबिक करीब 50% आबादी की मौत हुई।
खसरा बेहद संक्रामक वायरस है। ऐसे समुदाय में जहां लोगों का एक-दूसरे से करीबी संपर्क होता है और बीमारी के खिलाफ पहले से इम्यूनिटी कम हो सकती है, इन्फेक्शन तेजी से फैलने की आशंका बढ़ जाती है। इसी तरह फ्लू और दूसरे श्वसन इन्फेक्शन भी गंभीर समस्या बन सकते हैं।
इतिहास में अमेजन और अन्य क्षेत्रों के अलग-अलग समुदायों में इन्फेक्शन के बाद बड़े पैमाने पर बीमारी और मौत के मामले दर्ज किए गए हैं।
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि इन समुदायों के लिए बीमारी का खतरा केवल उनकी इम्यूनिटी तक सीमित नहीं है। वे बेहद दूर-दराज के जंगलों में रहते हैं। वहां आधुनिक अस्पताल, डॉक्टर, दवाएं और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं।
इसलिए कोई इन्फेक्शन फैलने पर इलाज मिलने में भी गंभीर देरी हो सकती है। UN ने Indigenous समुदायों के संदर्भ में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और बीमारी से बचाव के लिए उपायों की जरूरत पर जोर दिया है।
हजारों साल तक छोटे समूहों में रहने वाले समुदायों की आनुवंशिक संरचना पर अलगाव का असर पड़ सकता है, लेकिन यह कहना कि ‘कम जेनेटिक डायवर्सिटी के कारण उनकी इम्यूनिटी बहुत कमजोर है’ एक स्थापित सामान्य नियम नहीं है।
उनके लिए सबसे स्पष्ट और अच्छी तरह दर्ज स्वास्थ्य खतरा यह है कि बाहरी दुनिया से आने वाले नए इन्फेक्शन के खिलाफ उनकी आबादी में पहले से बनी इम्यूनिटी कम हो सकती है। यही कारण है कि किसी भी तरह का जबरन या अनियोजित संपर्क बेहद जोखिम भरा माना जाता है।
पेरू जैसे समुदायों के मामले में संपर्क से बचना सिर्फ उनकी संस्कृति या जीवनशैली का सम्मान करने का मुद्दा नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और अस्तित्व का सवाल भी है।
पेरू में अलगाव में रहने वाले Indigenous समूहों की सुरक्षा के लिए उनके क्षेत्रों और बाहरी गतिविधियों को लेकर विशेष संरक्षण व्यवस्था की जरूरत बताई जाती रही है। हाल में भी पेरू के क्षेत्र में बाहरी आर्थिक गतिविधियों को लेकर Indigenous संगठनों ने चिंता जताई है।
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