
नईदुनिया प्रतिनिधि,खंडवा। बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं। इनमें हड्डियों का कमजोर होना भी प्रमुख समस्या है। उम्र बढ़ने पर हड्डियों का अस्थि द्रव्यमान यानी बोन मास डेंसिटी कम होने लगती है। इससे हड्डियां खोखली और कमजोर हो जाती हैं। कई बार स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि मामूली चोट, खिंचाव या सामान्य वजन पड़ने से भी फ्रैक्चर हो जाता है।
इस स्थिति को आस्टियोपोरोसिस कहा जाता है। जिला अस्पताल खंडवा के अस्थि रोग विशेषज्ञ डाॅ. शक्ति सिंह राठौर के अनुसार आस्टियोपोरोसिस को साइलेंट बीमारी भी कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती दौर में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। नईदुनिया के हेलो डाॅक्टर कार्यक्रम में उन्होने पाठकों को आवश्यक परामर्श भी दिया।
डाॅ. राठौर ने बताया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में आस्टियोपोरोसिस का खतरा अधिक रहता है। खासकर मेनोपाज के बाद महिलाओं में हड्डियों का घनत्व तेजी से कम हो सकता है।
शरीर में कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी, पौष्टिक आहार का अभाव, थायराइड संबंधी समस्या, कुछ बीमारियों के इलाज की थैरेपी और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके जोखिम को बढ़ा सकती है।
आस्टियोपोरोसिस होने पर फ्रैक्चर के बाद हड्डी को जुड़ने में भी अपेक्षाकृत अधिक समय लग सकता है। जोड़ों खासकर घुटनों के दर्द से बचने के लिए वजन को नियंत्रित रखें।


हड्डियों को मजबूत रखने के लिए भोजन में दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, दाल, राजमा, मूंगफली, अंडे और अन्य प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें। शरीर में विटामिन-डी का स्तर बनाए रखने के लिए नियमित रूप से सुबह की धूप लें। डॉक्टर की सलाह पर विटामिन-डी और कैल्शियम की दवा ली जा सकती है। नियमित सैर, योग और उचित व्यायाम वजन नियंत्रित रखने के साथ हड्डियों और जोड़ों को मजबूत रखने में मदद करते हैं।
सवाल : दोनों घुटनों में दर्द रहता है,बैठने में परेशानी होती है, क्या करें। रीना गंगराड़े ,बोरगांव
जवाब : 40 वर्ष की उम्र के बाद आर्थराइटिस की समस्या शुरू होती है। चिकित्सकीय जांच कराने के साथ नियमित योग और व्यायाम करें। विटामिन-डी की कमी होने पर डाक्टर की सलाह से सप्लीमेंट और उपचार लें। जमीन पर पालकी लगाकर और सीढ़ियां ज्यादा चढ़ने-उतरने से बचें।
सवाल : 17 साल से सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस है,इसकी क्या वजह है। दीपक सोलार,खंडवा
जवाब : नियमित गर्दन और शरीर के लिए उचित व्यायाम करें। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें और आवश्यकता होने पर विशेषज्ञ से जांच कराएं। कंप्यूटर-लेपटाप का उपयोग करते समय शरीर को तानकर रखें।
सवाल : आर्थराइटिस का इलाज न कराने पर क्या समस्या हो सकती है। शेख सलमान,खंडवा
जवाब : लंबे समय तक इलाज नहीं कराने पर जोड़ धीरे-धीरे खराब हो सकते हैं और दर्द व चलने-फिरने में परेशानी बढ़ सकती है।
सवाल : कमर से लेकर पैर तक पीछे की ओर झिंझनी और दर्द होता है। करीब दो साल से परेशानी है,डाक्टरों को दिखाया आराम नहीं हो रहा। श्याम सुंदर, बरूड़
जवाब : यदि पैर में कमजोरी या अन्य गंभीर लक्षण नहीं हैं तो विशेषज्ञ की सलाह से कुछ समय फिजियोथेरेपी और व्यायाम आजमाया जा सकता है। उम्र की वजह से हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर होने से भी समस्या होती है।