रील्स की रफ्तार के बीच किताबों का ठहराव, पढ़ने की दुनिया में लौट रहे युवा
तेज रफ्तार डिजिटल जीवन के बीच एक ऐसा वर्ग भी है, जो कुछ देर ठहरकर पढ़ना, किसी कहानी के पात्रों के साथ जीना, विचारों की गहराई में उतरना और किताब के पन्...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 23 Oct 2026 01:07:53 PM (IST)Updated Date: Fri, 23 Oct 2026 01:14:33 PM (IST)
युवाओं में बढ़ रहा पढ़ने का शौक।HighLights
- रील्स की रफ्तार के बीच किताबों का ठहराव, पढ़ने की दुनिया में लौट रहे युवा
- मोबाइल की स्क्रीन से पुस्तकों के पन्नों तक पहुंच रही नई पीढ़ी की रुचि
- उपन्यास से दर्शन और आत्मकथा से व्यक्तित्व विकास तक बदल रही पसंद
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। एक के बाद एक बदलती रील्स, कुछ सेकंड में सिमटती कहानियां और उंगलियों के इशारे पर खुलती डिजिटल दुनिया। आज के युवाओं की दिनचर्या का बड़ा हिस्सा मोबाइल स्क्रीन के इर्द-गिर्द घूमता है। इसके बावजूद किताबों की दुनिया पूरी तरह पीछे नहीं छूटी है।
तेज रफ्तार डिजिटल जीवन के बीच एक ऐसा वर्ग भी है, जो कुछ देर ठहरकर पढ़ना, किसी कहानी के पात्रों के साथ जीना, विचारों की गहराई में उतरना और किताब के पन्नों में अपने सवालों के जवाब तलाशना चाहता है। संस्कारधानी जबलपुर में पढ़ने की आदत और नई पीढ़ी की पठन रुचि को इसी बदलते परिदृश्य में समझने की जरूरत है।
जबलपुर के घमापुर क्षेत्र में पुस्तक विक्रय का पुराना प्रतिष्ठान संचालित कर रहे अमित परनामी के अनुसार किताबों से युवाओं का रिश्ता अब केवल पाठ्यक्रम, परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तक सीमित नहीं है। व्यक्तिगत रुचि, मानसिक सुकून, जीवन को समझने की जिज्ञासा और स्वयं को बेहतर बनाने की आकांक्षा भी उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
उपन्यास, प्रेम कहानियां, आत्मकथाएं, दर्शन, मनोविज्ञान और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी पुस्तकें युवाओं के लिए अपनी-अपनी रुचि के अनुसार दुनिया को जानने के माध्यम बन सकती हैं। हालांकि, उनकी वास्तविक पसंद और पढ़ने की आदत में आए बदलाव को समझने के लिए पुस्तकालयों, पुस्तक विक्रेताओं और युवा पाठकों के अनुभव महत्वपूर्ण हैं।
कहानी से खुद को जोड़ने की चाह
- शहर के कई पुस्तकालयों को पुस्तकों की भेंट दे चुकीं छाया राय के अनुसार युवाओं के लिए साहित्य का आकर्षण केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहता।
- उपन्यास का कोई पात्र उन्हें अपने जीवन का हिस्सा लगता है, प्रेम कहानी रिश्तों को समझने का नजरिया देती है और आत्मकथा संघर्षों के बीच आगे बढ़ने की प्रेरणा दे सकती है।
- कई बार किसी पुस्तक का एक विचार भी लंबे समय तक मन में बना रहता है। यही किताबों की वह विशेषता है, जो त्वरित डिजिटल सामग्री से अलग अनुभव देती है।
- पुस्तक पढ़ते समय पाठक को घटनाओं, पात्रों और विचारों के साथ अपनी गति से आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
- वह किसी पंक्ति पर रुक सकता है, उसे दोबारा पढ़ सकता है और अपने अनुभवों के संदर्भ में उसका अर्थ तलाश सकता है।
- साहित्य से मिलने वाला यह जुड़ाव पढ़ने को केवल सूचना हासिल करने के बजाय आत्मचिंतन की प्रक्रिया में बदल सकता है।
लाइब्रेरी से बुक स्टोर तक बदलती दुनिया
- जबलपुर में सार्वजनिक पुस्तकालयों, कालेज लाइब्रेरी और पुस्तक दुकानों को युवाओं की पठन रुचि समझने के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देखा जा सकता है।
- यहां यह जानना दिलचस्प होगा कि युवा पाठक किन विषयों की पुस्तकें तलाश रहे हैं, कौन-सी विधाएं उन्हें अधिक आकर्षित करती हैं और क्या वे अपनी पसंद से पुस्तकें खरीदते हैं या पुस्तकालय की सदस्यता लेकर पढ़ना पसंद करते हैं।
- कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय पढ़ाई के साथ एकाग्र होकर समय बिताने का स्थान भी हो सकता है। वहीं, पुस्तक दुकानों में अपनी पसंद की किताब चुनना पाठक को साहित्य की विविधता से परिचित कराता है।
- किसी लेखक की दूसरी पुस्तक तलाशना, मित्र की सलाह पर नया उपन्यास खरीदना या किसी विषय में रुचि जागने पर उससे संबंधित किताब पढ़ना पठन संस्कृति को आगे बढ़ाने के अलग-अलग रास्ते हैं।
- इस तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है। सोशल मीडिया पर किसी पुस्तक की चर्चा, लेखक का साक्षात्कार अथवा किसी चर्चित रचना की समीक्षा देखकर भी युवा उस किताब तक पहुंच सकते हैं।
- इस तरह डिजिटल माध्यम किताबों से दूरी बनाने के साथ-साथ उनके प्रति जिज्ञासा जगाने का काम भी कर सकते हैं।
ई-बुक और आडियोबुक ने खोले नए रास्ते
- किताब पढ़ने का पारंपरिक तरीका बदल रहा है। अब मुद्रित पुस्तकों के साथ ई-बुक और आडियोबुक भी उपलब्ध हैं।
- मोबाइल या टैबलेट पर पुस्तक पढ़ना, यात्रा के दौरान आडियोबुक सुनना अथवा इंटरनेट के माध्यम से किसी दुर्लभ रचना तक पहुंचना पहले की तुलना में आसान हुआ है।
- इससे उन लोगों को भी पढ़ने-सुनने का अवसर मिल सकता है, जिनके पास समय या पुस्तकों तक पहुंच की सीमाएं हैं।
- हालांकि, डिजिटल माध्यमों की सुविधा के साथ ध्यान भटकने की चुनौती भी जुड़ी है।
- किताब पढ़ने के लिए खोला गया मोबाइल कुछ ही क्षणों में संदेशों, सूचनाओं और दूसरी सामग्री की ओर ध्यान खींच सकता है।
- ऐसे में पढ़ने की निरंतरता बनाए रखना पाठक की आदत और एकाग्रता पर निर्भर करता है।
- दूसरी ओर, मुद्रित पुस्तक के साथ बैठना कई पाठकों को स्क्रीन से अलग एकाग्रता का अवसर देता है।
- दोनों माध्यमों के अपने लाभ हैं और पाठक अपनी सुविधा के अनुसार उनका चुनाव कर सकते हैं।
पढ़ना यानी विचारों की दुनिया को विस्तार देना
- पुस्तकें केवल ज्ञान बढ़ाने का साधन नहीं हैं। वे भाषा को समृद्ध करती हैं, कल्पनाशीलता को अवसर देती हैं और दूसरे लोगों के अनुभवों को समझने की क्षमता विकसित करने में मदद कर सकती हैं।
- दर्शन जीवन के बुनियादी सवालों से परिचित कराता है, मनोविज्ञान व्यवहार को समझने की दृष्टि देता है और इतिहास वर्तमान को व्यापक संदर्भ में देखने का अवसर प्रदान करता है।
- साहित्य पाठक को अपने अनुभवों से बाहर निकलकर दूसरे जीवनों की संवेदनाओं से जुड़ने का मौका देता है।
- डिजिटल दुनिया में सूचना की कमी नहीं है, लेकिन किसी विषय को गहराई से समझने के लिए समय देना अब भी जरूरी है।
- छोटी-छोटी सामग्री से मिलने वाली त्वरित जानकारी और किसी विषय पर विस्तार से पढ़ने का अनुभव एक जैसा नहीं होता।
- किताबें पाठक को किसी विचार के साथ लंबे समय तक बने रहने और उसके विभिन्न पक्षों पर विचार करने का अवसर देती हैं।