
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। रंग-बिरंगी तितलियों की उड़ान केवल प्रकृति की खूबसूरती नहीं बढ़ाती, बल्कि यह पर्यावरण के स्वस्थ होने का भी संकेत है। तितलियां पारिस्थितिकी तंत्र में परागण से लेकर खाद्य शृंखला तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से 12 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘बटरफ्लाई बिग डे’ के रूप में मनाया जा रहा है।
वहीं सितंबर का पूरा महीना भारत में ‘बिग बटरफ्लाई मंथ’ के तौर पर मनाया जा रहा है। इस दौरान तितलियों की विभिन्न प्रजातियों की पहचान, उनकी संख्या और आवास को लेकर जागरूकता बढ़ाने के साथ इनके संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है। जबलपुर की हरियाली और विविध प्राकृतिक क्षेत्रों में भी तितलियों की कई प्रजातियां देखने को मिलती हैं।

शहर के उद्यानों, जलस्रोतों के आसपास के क्षेत्रों, जंगलों और ग्रामीण इलाकों में मौसम के अनुसार अलग-अलग रंग और आकार की तितलियां दिखाई देती हैं। मानसून के बाद वनस्पतियों में आई हरियाली और फूलों की उपलब्धता के कारण इन दिनों तितलियों की गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं।

शहर में प्रकृति और जैव विविधता को लेकर काम करने वाले सिटीजंस फार नेचर कंजर्वेशन से जुड़े पर्यावरणविद् डा. विजय कुमार यादव के अनुसार तितलियां किसी भी क्षेत्र की जैव विविधता को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। तितलियों का संरक्षण केवल तितलियों को बचाने तक सीमित नहीं है।

इनके संरक्षण के साथ उन पौधों, फूलों और पूरे प्राकृतिक आवास का संरक्षण होता है, जिन पर ये निर्भर रहती हैं। जब किसी क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों की तितलियां दिखाई देती हैं तो यह वहां के पर्यावरण की स्थिति के बारे में भी महत्वपूर्ण संकेत देता है। जबलपुर में प्राकृतिक और हरित क्षेत्र अभी भी जैव विविधता के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। जरूरत इस बात की है कि स्थानीय स्तर पर इनके आवास को सुरक्षित रखा जाए और लोगों को इनके महत्व की जानकारी दी जाए।”
