• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • लाइफस्टाइल

क्या इंसानों को खत्म कर सकता है AI? कंपनियां ही क्यों कह रहीं- कम करें इसका इस्तेमाल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती रफ्तार को लेकर अब केवल आलोचक ही नहीं, बल्कि इसे बनाने वाली कंपनियों के CEO और रिसर्चर भी चिंता जता रहे हैं। एंथ्र...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Akriti kumari
Publish Date: Fri, 09 Oct 2026 08:34:09 PM (IST)Updated Date: Fri, 09 Oct 2026 08:34:09 PM (IST)
क्या इंसानों को खत्म कर सकता है AI? कंपनियां ही क्यों कह रहीं- कम करें इसका इस्तेमाल
सुपरइंटेलिजेंस और मानवता का खतरा।

लाइफस्टाइल डेस्क। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर अब तक सबसे बड़ी चिंता नौकरियों पर इसके असर, फेक न्यूज और साइबर क्राइम की थी। लेकिन अब बहस इससे कहीं आगे पहुंच गई है। सवाल उठ रहा है कि क्या भविष्य में AI इतना शक्तिशाली हो सकता है कि इंसानों के लिए ही खतरा बन जाए?

हैरानी की बात यह है कि यह चिंता सिर्फ AI के आलोचक नहीं जता रहे, बल्कि इसे विकसित करने वाली कंपनियों के भीतर काम कर चुके रिसर्चर और उनके CEO भी उठा रहे हैं। Anthropic के CEO डारियो अमोडेई ने AI की विकास गति धीमी करने की अपील की है। OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने भी AI की रफ्तार पर नियंत्रण और स्वतंत्र सुरक्षा जांच का समर्थन किया। एलन मस्क ने अमोडेई की बात से सहमति जताई, जबकि Google DeepMind के को-फाउंडर डेमिस हसाबिस ने भी AI के लिए सख्त सुरक्षा मानकों की जरूरत पर जोर दिया।


हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आज के ChatGPT, Claude या Gemini जैसे AI सिस्टम इंसानों को खत्म करने की स्थिति में पहुंच चुके हैं। असली चिंता भविष्य में ज्यादा शक्तिशाली और स्वायत्त AI सिस्टम के संभावित खतरों, उनके गलत इस्तेमाल और उन्हें नियंत्रित करने की क्षमता को लेकर है।

कहां से शुरू हुई AI को लेकर यह नई बहस?

सितंबर 2026 में Anthropic के पूर्व रिसर्चर जैकब कॉक्सॉन के इस्तीफे के बाद यह बहस तेज हो गई। कॉक्सॉन ने आरोप लगाया कि AI कंपनियां खुद को बेहतर बनाने में सक्षम सुपरइंटेलिजेंस विकसित करने की दौड़ में लगी हैं, जबकि इससे जुड़े जोखिमों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।

कॉक्सॉन OpenAI और Anthropic में काम कर चुके थे। उन्होंने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी कि AI विकसित करने वाले कुछ लोग भी मानते हैं कि अगर इस तकनीक का विकास बिना पर्याप्त सुरक्षा के जारी रहा, तो यह दशक खत्म होने से पहले मानवता के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। यह उनका आकलन था, कोई स्थापित वैज्ञानिक निष्कर्ष या निश्चित समयसीमा नहीं।

उनकी चेतावनी के बाद AI कंपनियों की सुरक्षा नीतियों, कारोबार के दबाव और तकनीक को विकसित करने की होड़ पर सवाल उठने लगे।

आखिर सुपरइंटेलिजेंस क्या है?

आज के AI मॉडल सवालों के जवाब देने, लेख लिखने, तस्वीरें बनाने, कोड तैयार करने और जानकारी का विश्लेषण करने जैसे काम कर सकते हैं। AI एजेंट इससे आगे जाकर कई चरणों वाले काम भी कर सकते हैं। उन्हें किसी लक्ष्य के लिए निर्देश दिया जाए, तो वे जानकारी खोज सकते हैं, दूसरे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर सकते हैं। कई कामों को क्रम से पूरा कर सकते हैं।

सुपरइंटेलिजेंस एक ऐसी संभावित भविष्य की AI क्षमता को कहा जाता है, जो कई या अधिकांश बौद्धिक कार्यों में इंसानों से आगे निकल जाए। अभी यह तय नहीं है कि ऐसी क्षमता कब विकसित होगी, उसका स्वरूप क्या होगा या उसे नियंत्रित करना कितना मुश्किल होगा।

जोखिम तब बढ़ सकता है, जब शक्तिशाली AI को बहुत अधिक स्वतंत्रता मिल जाए, उसके लक्ष्य गलत हों या उसे साइबर हमले जैसे खतरनाक कामों में इस्तेमाल किया जाए।

डारियो अमोडेई ने क्यों कहा- AI की रफ्तार धीमी करनी होगी?

Anthropic के CEO डारियो अमोडेई ने सितंबर में अपने राइटअप ‘We Must Pace the Frontier’ के जरिए AI के विकास की रफ्तार पर नियंत्रण रखने की अपील की। उनका तर्क है कि AI की क्षमताएं जितनी तेजी से बढ़ रही हैं, सुरक्षा व्यवस्था और जोखिमों का आकलन करने की क्षमता भी उसी अनुपात में विकसित होनी चाहिए।

अमोडेई ने AI का विकास रोकने के बजाय उसकी रफ्तार …

पहला- AI कंपनियों के बीच साझा सुरक्षा मानक

OpenAI, Anthropic और दूसरी बड़ी कंपनियों को केवल एक-दूसरे से आगे निकलने के बजाय AI सुरक्षा के लिए साझा नियम बनाने चाहिए। खासकर उन मॉडलों के लिए जो साइबर हमलों, जैविक खतरों या अन्य गंभीर नुकसान की आशंका पैदा कर सकते हैं।

दूसरा- स्वतंत्र विशेषज्ञों से जांच

AI कंपनियों के सबसे शक्तिशाली मॉडल की जांच सिर्फ कंपनी के अपने कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। स्वतंत्र विशेषज्ञों को सिस्टम का पर्याप्त एक्सेस मिलना चाहिए, ताकि वे उसकी क्षमताओं, संभावित खतरों और सुरक्षा उपायों का आकलन कर सकें।

तीसरा- अंतरराष्ट्रीय सहयोग

AI का विकास किसी एक देश तक सीमित नहीं है। इसलिए साइबर सुरक्षा, खतरनाक तकनीकों के दुरुपयोग और भविष्य के शक्तिशाली AI सिस्टम से जुड़े जोखिमों पर देशों के बीच सहयोग जरूरी है।

अमोडेई की इस अपील का सबसे अहम पहलू यह है कि AI की रफ्तार तय करने में सुरक्षा को भी उतनी ही प्राथमिकता मिले, जितनी नई क्षमताएं विकसित करने में दी जाती है।

एलन मस्क और सैम ऑल्टमैन भी सुरक्षा जांच के समर्थन में

AI की दुनिया में एलन मस्क और सैम ऑल्टमैन के बीच कई मुद्दों पर मतभेद रहे हैं। इसके बावजूद AI की सुरक्षा और विकास की गति पर अमोडेई की अपील के बाद दोनों ने समर्थन जताया।

मस्क ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘Dario is right’ यानी डारियो सही हैं। वहीं, ऑल्टमैन ने स्वतंत्र विशेषज्ञों को AI कंपनियों के सिस्टम तक कर्मचारी-स्तर का एक्सेस देने के विचार का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि OpenAI भी ऐसा करने के लिए तैयार है।

हालांकि, स्वतंत्र जांच का समर्थन करना और AI के विकास को वास्तव में धीमा करना दो अलग-अलग बातें हैं। इसके लिए यह तय करना होगा कि जांच कौन करेगा, उसे कितनी स्वतंत्रता मिलेगी और खतरा सामने आने पर कंपनी या सरकार क्या कार्रवाई कर सकेगी।

Google DeepMind भी क्यों चाहता है सख्त निगरानी?

Google DeepMind के को-फाउंडर डेमिस हसाबिस ने भी AI सुरक्षा के लिए स्वतंत्र मूल्यांकन और मानकों की जरूरत का समर्थन किया है। उनका मानना है कि AI दवाओं की खोज, नई ऊर्जा तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान में बड़ी मदद कर सकता है। लेकिन इसके साथ साइबर हमलों, जैविक खतरों और दूसरे गंभीर दुरुपयोग की आशंकाओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हसाबिस ने फ्रंटियर AI के लिए एक स्वतंत्र मानक संस्था बनाने का विचार भी रखा है। इसका उद्देश्य शक्तिशाली AI मॉडलों की नियमित जांच करना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संभावित जोखिमों का आकलन करना होगा।

इसका मतलब है कि AI से जुड़े फैसले सिर्फ कंपनियों के कारोबारी हितों पर नहीं छोड़े जाने चाहिए। वैज्ञानिकों, स्वतंत्र विशेषज्ञों, सरकारों और समाज की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।

AI के खतरे की चिंता सिर्फ भविष्य तक सीमित नहीं

इंसानों के पूरी तरह खत्म होने की आशंका भविष्य से जुड़ा सवाल है, लेकिन AI के गलत इस्तेमाल के कुछ खतरे आज ही दिखाई दे रहे हैं।

Anthropic ने सितंबर 2026 में प्रकाशित अपने आकलन में बताया कि उसकी जांच के दौरान Claude मॉडल से जुड़े ऐसे चार मामले सामने आए, जिनमें मॉडल ने साइबर सुरक्षा संबंधी परीक्षणों के दौरान वास्तविक बाहरी सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच हासिल की थी। कंपनी ने इन घटनाओं का विश्लेषण किया और प्रभावित पक्षों को सूचित करने की बात कही।

इस तरह की घटनाएं कई सवाल खड़े करती हैं। अगर AI एजेंट को किसी सिस्टम तक जरूरत से ज्यादा पहुंच मिल जाए, तो क्या वह अनजाने में नुकसान पहुंचा सकता है? अगर कोई साइबर अपराधी AI का इस्तेमाल करे, तो क्या वह कम तकनीकी जानकारी के बावजूद ज्यादा बड़े हमले कर सकता है? और अगर AI अपने निर्देशों को गलत तरीके से समझे, तो उसकी गलती को समय रहते कैसे रोका जाएगा?

इन सवालों का जवाब केवल AI की बुद्धिमत्ता बढ़ाने से नहीं मिलेगा। इसके लिए सीमित एक्सेस, निगरानी, सुरक्षा परीक्षण और स्पष्ट जवाबदेही की जरूरत होगी।

क्या AI सचमुच इंसानों को खत्म कर सकता है?

इस सवाल का निश्चित जवाब आज किसी के पास नहीं है। विशेषज्ञों के बीच इस बात पर सहमति नहीं है कि भविष्य में AI से मानव अस्तित्व को कितना बड़ा खतरा हो सकता है।

चिंता जताने वाले विशेषज्ञों का तर्क है कि अगर AI भविष्य में इंसानों से अधिक सक्षम हो गया और उसके लक्ष्य मानव हितों के अनुरूप नहीं रहे, तो उसे नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, AI का इस्तेमाल जैविक हथियारों, साइबर हमलों या महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने के लिए भी किया जा सकता है।

दूसरी ओर, कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इंसानों के खत्म होने जैसे अत्यंत गंभीर परिणामों पर चर्चा करते समय अनुमान और प्रमाण के बीच अंतर करना जरूरी है। AI के संभावित भविष्य के खतरे को आज की वास्तविक समस्याओं के साथ मिलाकर नहीं देखना चाहिए।

फिलहाल गलत जानकारी, धोखाधड़ी, साइबर अपराध, निजता का उल्लंघन और कामकाज पर असर जैसे खतरे ज्यादा ठोस हैं। भविष्य में AI कितना शक्तिशाली होगा और उसका जोखिम कितना बढ़ेगा, यह तकनीकी विकास, सुरक्षा उपायों और नियमन पर निर्भर करेगा।

अमेरिका और चीन की होड़ में सुरक्षा कितनी प्राथमिकता होगी?

AI को लेकर सुरक्षा की बहस के सामने एक बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा है। अमेरिका और चीन दोनों इस तकनीक में अपनी क्षमताएं बढ़ाना चाहते हैं। ऐसे माहौल में कोई एक कंपनी या देश विकास की रफ्तार धीमी करता है, तो उसे आशंका हो सकती है कि प्रतिस्पर्धी आगे निकल जाएंगे।

यही वजह है कि AI सुरक्षा पर सहमति बनाना आसान नहीं है। कंपनियां सुरक्षा मानकों का समर्थन कर सकती हैं, लेकिन अगर उन नियमों को लागू करने का तरीका स्पष्ट नहीं हुआ, तो केवल स्वैच्छिक वादे पर्याप्त नहीं होंगे।

दूसरी चुनौती यह है कि स्वतंत्र जांच करने वाले विशेषज्ञों को वास्तव में कितना अधिकार मिलेगा। अगर उन्हें केवल सीमित जानकारी दिखाई जाए या गंभीर खामियों को सार्वजनिक करने की अनुमति न हो, तो निगरानी का उद्देश्य कमजोर पड़ सकता है।

इसलिए बहस सिर्फ AI को धीमा करने की नहीं, बल्कि ऐसे नियम बनाने की भी है जिनका पालन कंपनियां और सरकारें वास्तविक रूप से करें।

AI की रफ्तार रोकनी चाहिए या सुरक्षित बनाकर आगे बढ़ना चाहिए?

AI से जुड़े जोखिमों को लेकर दुनिया के सामने फिलहाल दो बड़े विचार हैं। एक पक्ष मानता है कि अत्यधिक शक्तिशाली AI विकसित करने की होड़ को धीमा करना चाहिए, ताकि सुरक्षा व्यवस्था पीछे न रह जाए। दूसरा पक्ष AI के संभावित लाभों को देखते हुए इसके विकास को जारी रखने और जोखिमों को तकनीकी उपायों से नियंत्रित करने पर जोर देता है।

वास्तविक चुनौती इन दोनों के बीच संतुलन बनाने की है। AI से चिकित्सा, शिक्षा, विज्ञान और ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े लाभ मिलने की संभावना है। लेकिन इन लाभों के साथ सुरक्षा और जवाबदेही भी जरूरी हैं।

AI से इंसानों का अंत होगा या नहीं, यह अभी एक अनिश्चित भविष्य का सवाल है। लेकिन AI को विकसित करने वाले विशेषज्ञों के बीच सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता एक वास्तविक मुद्दा है। तकनीक की क्षमताएं बढ़ने के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि उसके जोखिमों की पहचान, जांच और नियंत्रण के तरीके पीछे न छूट जाएं।

आखिरकार, सवाल सिर्फ यह नहीं है कि AI कितना शक्तिशाली बन सकता है। सवाल यह भी है कि इंसान उसे कितनी जिम्मेदारी से विकसित करते हैं और उसके गलत इस्तेमाल या नियंत्रण से बाहर जाने की स्थिति में नुकसान रोकने के लिए कितने तैयार हैं।