कैंसर का पता चलने पर घबराएं नहीं, समय पर जांच और सही इलाज से संभव है बेहतर रिजल्ट, जानें एक्सपर्ट्स की राय
कैंसर की पुष्टि होने पर डरने के बजाय तुरंत इलाज शुरू करें। कैंसर के ज्यादातर केसेज में बेहतर परिणाम संभव हैं। शरीर में असामान्य गांठ, बिना कारण वजन कम होना, अत्यधिक थकान, असामान्य ब्लीडिंग और हफ्तों पुरानी खांसी जैसे चेतावनी संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
Publish Date: Wed, 28 Oct 2026 07:11:05 PM (IST)Updated Date: Wed, 28 Oct 2026 07:11:05 PM (IST)
कैंसर का पता चलने पर घबराएं नहीं और तुरंत इलाज करवाएंHighLights
- कैंसर का पता चलने पर घबराएं नहीं और तुरंत इलाज करवाएं
- शरीर में गांठ, वजन घटना, लगातार थकान को नजरअंदाज न करें
- कैेंसर का पता चलने के बाद घरेलू नुस्खों के भरोसे इलाज न करें
हेल्थ डेस्क। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की पुष्टि होने पर मरीज और उसके परिवार का मानसिक रूप से विचलित होना स्वाभाविक है, लेकिन घबराने या डरने के बजाय उपचार की सही और व्यवस्थित योजना पर ध्यान केंद्रित करना सबसे महत्वपूर्ण है। वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ (Oncologist) डॉ. अक्षय निगम ने कैंसर के प्रबंधन, लक्षणों की शीघ्र पहचान और उपचार की निरंतरता को लेकर महत्वपूर्ण चिकित्सकीय परामर्श साझा किया है।
डॉ. निगम के अनुसार, चिकित्सा विज्ञान में आधुनिक तकनीकों के चलते कैंसर के अधिकांश प्रकारों में शुरुआती अवस्था (Early Stage) में पहचान और समय पर इलाज शुरू होने से मरीज के पूरी तरह स्वस्थ होने और बेहतर परिणाम मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
इन चेतावनी संकेतों को न करें नजरअंदाज
शरीर में होने वाले कुछ असामान्य परिवर्तनों को सामान्य मानकर टालना खतरनाक साबित हो सकता है। डॉ. निगम ने निम्नलिखित लक्षणों के लगातार बने रहने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी है:
- लंबे समय तक रहने वाली गांठ: शरीर के किसी भी हिस्से में असामान्य गांठ या सूजन।
- अस्पष्ट वजन घटना: बिना किसी स्पष्ट कारण या प्रयास के अचानक तेजी से वजन कम होना।
- लगातार थकान: पर्याप्त आराम के बाद भी अत्यधिक और निरंतर कमजोरी महसूस होना।
- असामान्य ब्लीडिंग: शरीर के किसी भी अंग से अस्वाभाविक ब्लीडिंग होना।
- न भरने वाले घाव: त्वचा या मुंह में कोई ऐसा घाव अथवा छाला जो लंबे समय तक ठीक न हो रहा हो।
- पुरानी खांसी: हफ्तों तक लगातार बनी रहने वाली खांसी या आवाज में बदलाव।
उपचार में जरूरी सावधानियां
डॉ. अक्षय निगम ने स्पष्ट किया कि कैंसर के इलाज में समय और अनुशासन सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं-
- नियमित उपचार: डॉक्टर द्वारा निर्धारित की गई थेरेपी (कीमोथेरेपी, रेडिएशन, सर्जरी आदि) और दवाइयों का समय पर और नियमित पालन करें।
- उपचार में देरी न करें: बीमारी की पुष्टि के बाद इलाज शुरू करने में किसी भी प्रकार की देरी स्थिति को जटिल बना सकती है।
- घरेलू नुस्खों पर निर्भरता से बचें: केवल पारंपरिक या घरेलू नुस्खों के भरोसे रहकर मुख्य चिकित्सीय इलाज को छोड़ना मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा या थेरेपी बंद न करें।
पोषण और आहार का रखें खासध्यान
कैंसर के उपचार के दौरान मरीज के शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को बनाए रखने के लिए संतुलित पोषण अत्यंत आवश्यक है-
- संतुलित थाली: आहार में दालें, साबुत अनाज, ताजे मौसमी फल और हरी सब्जियों को पर्याप्त मात्रा में शामिल करें।
- एक्सपर्ट्स की मदद: यदि मरीज को भूख कम लग रही हो, लगातार वजन घट रहा हो या खाना निगलने में किसी प्रकार की कठिनाई हो रही हो, तो तुरंत अपने ऑन्कोलॉजिस्ट या क्लिनिकल डायटीशियन (आहार विशेषज्ञ) से सलाह लेकर डाइट चार्ट तैयार करवाएं।