
नईदुनिया प्रतिनिधि, सिवनी। बदलते मौसम के अलावा ठंडे के दौरान त्वचा में रूखापन, खुजली, रैशेज जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। वर्तमान में बिगड़ी जीवनशैली के कारण महिलाओं में पिंपल्स और चेहरे में झाइयों की समस्याएं ज्यादा आ रही हैं। साथ ही कोविड के बाद बाल झड़ने की समस्या महिला और पुरुषों दोनों में बढ़ गई है।
यह जानकारी आयुष स्किन क्लीनिक के विशेषज्ञ डाॅ. भूपेंद्र मिश्रा ने नईदुनिया के हैलो डाॅक्टर कार्यक्रम में पाठकों के सवालों का जवाब देते हुए कहीं। त्वचा संबंधी समस्याओं का समाधान करते हुए डाॅ. मिश्रा ने बताया कि इन सभी विकारों का होम्योपैथी पद्धति से सुरक्षित और प्रभावी उपचार संभव है।
मौसमी बदलावों से त्वचा का पीएच स्तर प्रभावित होता है, जिससे बचाव के लिए नियमित माइस्चराइज़र का उपयोग और संतुलित जीवनशैली आवश्यक है।
साथ ही पिंपल्स, सफेद दाग, फंगल इन्फेक्शन और हेयर फाल जैसी समस्याओं से निपटने तनावमुक्त दिनचर्या, पौष्टिक आहार के साथ डाक्टर का आवश्यक परामर्श लेने की सलाह दी।स्पष्ट किया कि होम्योपैथिक दवाएं पूरी तरह प्राकृतिक होती हैं और बीमारियों को बिना किसी दुष्प्रभाव के जड़ से समाप्त करती हैं।
Moonsoon Skin Care: त्वचा पर लगातार खुजली, लालिमा, चकत्ते दिखाई दें तो अपने मन से कोई क्रीम न लगाएं

सवाल: ठंड के दौरान त्वचा में खुजली और रैशेज की समस्या होती है, इससे कैसे बचें?
श्याम यादव, सिवनी
जवाब: जब मौसम बदलता है, जैसे गर्मी से सर्दी या मानसून, तो त्वचा का पीएच लेवल भी बदलता है। ठंडे मौसम में त्वचा अधिक रूखी हो जाती है। इसके अलावा हम सर्दियों के कपड़े (ऊनी कपड़े) निकालते हैं, जिन्हें बिना धोए और धूप दिखाए पहनने से रैशेज, खुजली की संभावना बढ़ जाती है। बचाव के लिए माइस्चराइजर का उपयोग करें। बच्चों और बुजुर्गों की त्वचा का विशेष ध्यान रखें और पुराने कपड़ों को अच्छी तरह धोकर तथा धूप दिखाकर ही पहनें।
सवाल: सफेद दाग की समस्या क्यों होती है और क्या इसका कोई इलाज है?
संजय तिवारी, सिवनी
जवाब: सफेद दाग का मुख्य कारण आनुवांशिक (हेरिडिटी) है। इसके अलावा तनाव, फास्ट फूड का अधिक सेवन और अस्वास्थ्यकर जीवनशैली भी इसके कारण हो सकते हैं। सभी सफेद दाग विटिलिगो नहीं होते, कुछ हल्के भूरे दाग कृमि (वार्म इन्फेक्शन) के कारण भी हो सकते हैं, जो बच्चों में आम है। यदि माता-पिता को सफेद दाग हैं, तो बच्चों को होने की 80% संभावना होती है। इसका इलाज संभव है, लेकिन सही समय पर होम्योपैथिक या अन्य चिकित्सा परामर्श लेना जरूरी है।
सवाल: महिलाओं में पिंपल्स की समस्या पुरुषों से अधिक क्यों होती है?
वैष्णवी साहू, सिवनी
जवाब: महिलाओं में हार्मोनल बदलाव पिंपल्स का सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा आयली त्वचा भी एक मुख्य कारक है। जिन लोगों की त्वचा आयली है, उन्हें बार-बार चेहरा धोना चाहिए। तेल मुक्त माइस्चराइजर का उपयोग करना चाहिए। त्वचा और बालों में रोजाना तेल लगाने से बचना चाहिए।
सवाल: बाल झड़ने (हेयर फाल) की समस्या बहुत आम हो गई है। इसके क्या कारण हैं?
सागर झारिया, सिवनी
जवाब: कोविड के बाद से हेयर फाल की समस्या, जिसे ''टेलोजन एफ्लुवियम'' कहा जाता है, बहुत बढ़ गई है। इसका मुख्य कारण तनाव और पोषण की कमी है। हमारे आहार में जंक-फूड अधिक है और पौष्टिक सब्जियों का अभाव है। इसके बचाव के लिए तनाव कम करें, पौष्टिक आहार लें, व्यायाम करें और कम से कम 8 घंटे की पर्याप्त नींद लें।
सवाल: त्वचा के कालेपन और झाइयों का क्या इलाज है ?
नेहा यादव, बंडोल
जवाब: पर्यावरण में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। धूप भी बीते कुछ वर्षो की अपेक्षा तेज हो गई है। ऐसे में सीधी किरणों के अलावा वातावरण के कारण भी ऐसा होता है। हार्मोनल असंतुलन भी झाइयों का मुख्य कारण है। महिलाओं में यह समस्या ज्यादा होती है, गर्भ निरोधक गोलियां और तनाव भी झाइयों को बढ़ाता है। इससे बचने के लिए घर से बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन का प्रयोग करना बहुत जरूरी है। सनस्क्रीन का एसपीएफ डाॅक्टर की सलाह के अनुसार ही चुनना चाहिए।
सवाल: नाखून पीले और काले होकर टूट रहे हैं, इसका क्या उपचार है?
सुनील दाहिया, केवलारी
जवाब: नाखूनों का मोटा होना, काला पड़ना और पीला होकर टूटना फंगल इन्फेक्शन के लक्षण हैं, जिसे ''ओनिकोमाइकोसिस'' कहा जाता है। यह संक्रमण एक नाखून से शुरू होकर दूसरों में फैल सकता है। इसके लिए समय पर डाक्टर से इलाज कराना आवश्यक है।
सवाल: होम्योपैथी में त्वचा रोगों का इलाज से कोई साइड इफेक्ट्स हैं?
गोपाल बघेल, सिवनी
जवाब: होम्योपैथी में त्वचा रोगों का इलाज बहुत प्रभावी है। होम्योपैथिक दवाइयां आर्गेनिक होती हैं और इनके कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होते। यह एक भ्रांति है कि होम्योपैथिक इलाज लंबा चलता है। असल में अगर कोई बीमारी 10 साल पुरानी है, तो उसे ठीक होने में कम से कम 1 साल तो लगेगा ही। होम्योपैथी बीमारी को जड़ से खत्म करने पर काम करती है।