
लाइफस्टाइल डेस्क। मौसम में आ रहा तेजी से बदलाव न केवल इंसानों की सेहत और इम्युनिटी पर असर डाल रहा है, बल्कि आपके घर के आंगन, बालकनी या टैरेस गार्डन में लगे हरे-भरे पौधों के लिए भी बेहद संवेदनशील साबित हो रहा है। इस मौसम में तापमान में उतार-चढ़ाव और हवा में नमी के कारण पौधों में कई तरह के फंगल इन्फेक्शन और घातक कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है। यदि समय रहते इनकी सही देखभाल और बचाव न किया जाए, तो आपकी महीनों की मेहनत और बगीचे की सुंदरता पल भर में खराब हो सकती है।
कृषि और बागवानी विशेषज्ञ एमपीएस बुंदेला के मुताबिक इस मौसम में गमलों में लगे शो-प्लांट्स, सब्जियों और फूलों पर मुख्य रूप से निम्नलिखित समस्याएं देखने को मिलती हैं। पत्तियों के पीछे और नए तनों पर सफेद रंग के चिपचिपे कीट जमा हो जाते हैं, जो पौधों का रस चूसकर उन्हें सुखा देते हैं। जड़ों में ज्यादा पानी रुकने या नमी के कारण जड़ों में सड़ांध और पत्तियों पर काले-भूरे धब्बे बनने लगते हैं। वायरस और कीटों के हमले से नई पत्तियां मुड़ने लगती हैं और पौधे का विकास पूरी तरह रुक जाता है।
- नियमित सफाई और छंटाई : जिन पत्तियों या टहनियों पर फंगस या कीट दिखे, उन्हें तुरंत काटकर अलग कर दें। गमलों के आसपास सूखी पत्तियां न जमा होने दें।
- सटीक सिंचन: गमले की ऊपरी मिट्टी सूखने पर ही पानी दें। गमले के नीचे जल निकासी का छिद्र खुला होना चाहिए ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके।
- नीम के तेल का स्प्रे: एक लीटर पानी में पांच मिलीलीटर नीम का तेल और दो तीन बूंदें लिक्विड सोप या शैम्पू मिलाकर घोल बनाएं। इसे हफ्ते में एक बार पौधों पर स्प्रे करें। यह कीटों के लिए काल साबित होता है।
- हल्दी और राख का देसी नुस्खा: जड़ों में फंगस से बचाव के लिए मिट्टी की गुड़ाई करके उसमें थोड़ी सी हल्दी पाउडर या लकड़ी की राख मिला दें। यह एक बेहतरीन प्राकृतिक एंटी-फंगल का काम करता है।
-पर्याप्त धूप और हवा: गमलों को ऐसे स्थान पर रखें जहां उन्हें रोजाना तीन से चार घंटे की ताजी हवा और धूप मिल सके, जिससे फंगस पनपने का खतरा कम हो जाता है।
अक्सर वर्षा का पानी घरों में रखे गमलों व क्यारियों में भरा रहता है। ऐसे में यह पानी इस मौसम में डेंगू के लार्वा के पनपने की जगह बन जाता है। बाद में इनसे पैदा हुए मच्छर आपको बीमार कर सकते हैं। इसलिए गमलों में पानी बिल्कुल न रुकने दें।