
लाइफस्टाइल डेस्क। भारत के कर्नाटक में मौजूद चेन्नकेशव मंदिर कला, भक्ति और अद्भुत वास्तुकला का अनोखा उदाहरण है। इस मंदिर की सुंदरता और पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी को देखकर आज भी लोग आश्चर्य में पड़ जाते हैं। विजयनारायण मंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह ऐतिहासिक धरोहर 12वीं शताब्दी की उन्नत कला और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है।
12वीं शताब्दी की भव्य कारीगरी का नमूना
चेन्नकेशव मंदिर का निर्माण 1117 ईस्वी में होयसला साम्राज्य के शक्तिशाली शासक राजा विष्णुवर्धन ने करवाया था। यह मंदिर कर्नाटक के हासन जिले में यगाची नदी के किनारे स्थित है। बताया जाता है कि इस मंदिर को पूरी तरह तैयार होने में करीब 103 साल लगे और इसके निर्माण में तीन पीढ़ियों ने योगदान दिया। ‘चेन्नकेशव’ का अर्थ है ‘सुंदर केशव’, जो भगवान विष्णु का ही एक रूप है और मंदिर उन्हीं को समर्पित है।
इतिहास में कई हमलों के बावजूद कायम रही पहचान
अपने लंबे इतिहास के दौरान इस मंदिर ने कई कठिन दौर देखे। विदेशी आक्रमणों के समय इसे नुकसान भी पहुंचाया गया और लूटपाट की घटनाएं भी हुईं। हालांकि समय-समय पर मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया, जिसके कारण इसकी भव्यता आज भी बरकरार है। यह ऐतिहासिक स्थल हासन से लगभग 35 किलोमीटर और बेंगलुरु से करीब 220 किलोमीटर दूर स्थित है।
पत्थरों पर जीवंत होती पौराणिक कथाएं
मंदिर की सबसे खास पहचान इसकी शानदार शिल्पकला है। यहां के स्तंभों, दीवारों और छतों पर नर्तक-नर्तकियों, संगीतकारों और पौराणिक कथाओं को बेहद बारीकी से उकेरा गया है। मंदिर की मूर्तियों में रामायण, महाभारत और विभिन्न पुराणों की कहानियों के दृश्य देखने को मिलते हैं। हालांकि यह विष्णु को समर्पित वैष्णव मंदिर है, लेकिन इसकी कलाकृतियों में शैव और शाक्त परंपराओं का प्रभाव भी दिखाई देता है।
यूनेस्को ने दी विश्व धरोहर की मान्यता
मध्यकालीन साहित्य में भी इस मंदिर की प्रसिद्धि का उल्लेख मिलता है। इसकी अद्वितीय वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए साल 2023 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया। चेन्नकेशव मंदिर को हालेबीड के होयसलेश्वर मंदिर और सोमनाथपुरा के केशव मंदिर के साथ “होयसला के पवित्र मंदिर समूह” में शामिल किया गया है।
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