
लाइफस्टाइल डेस्क। पढ़ाई का बढ़ता दबाव, होमवर्क पूरा करने की चिंता और अच्छे अंक हासिल करने की अपेक्षा बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। लगातार किताबों में व्यस्त रहने से कई बार बच्चे थकान और तनाव महसूस करने लगते हैं।
ऐसे में पढ़ाई के साथ खेलों के लिए समय निकालना भी जरूरी है। खासतौर पर माइंड गेम्स बच्चों को मनोरंजन के साथ सोचने-समझने और समस्याओं का हल खोजने का अवसर देते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, शतरंज, कैरम, सुडोकू, क्रॉसवर्ड और जिग्सॉ पजल जैसी गतिविधियों के लिए रोजाना करीब एक घंटा निकालना बच्चों की दिनचर्या का उपयोगी हिस्सा बन सकता है।
इन खेलों के जरिए बच्चे धैर्य रखना, अपनी रणनीति बनाना और किसी काम को चरणबद्ध तरीके से पूरा करना सीखते हैं। स्कूल से लौटने के बाद कुछ समय बाहर खेलने और फिर इनडोर गेम्स में हिस्सा लेने से बच्चों को पढ़ाई की एकरसता से बाहर निकलने का अवसर मिलता है।
मनोविज्ञानी उनके पास कुछ ऐसे बच्चे भी आते हैं, जो पढ़ाई या दूसरी परिस्थितियों के कारण काफी तनाव में रहते हैं। ऐसे बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार परामर्श दिया जाता है। काउंसलिंग के दौरान रिलैक्सेशन तकनीकों का उपयोग कर उन्हें तनाव से निपटने में मदद की जाती है। कई मामलों में एक सप्ताह तक परामर्श देने के बाद उनकी स्थिति और जरूरत के अनुसार आगे की प्रक्रिया तय की जाती है। बच्चों के लिए जरूरी है कि वे अपनी परेशानियों को मन में दबाकर न रखें और अभिभावक भी उनकी बातों को समझने का प्रयास करें।
अनुजा खरे बताती हैं कि उन्हें कैरम और शतरंज दोनों खेलना अच्छा लगता है। वह इन खेलों के लिए रोजाना लगभग एक घंटा निर्धारित रखते हैं। अपनी बहन के साथ कैरम खेलने से उन्हें अच्छा महसूस होता है और पढ़ाई के बाद होने वाली थकान से राहत मिलती है। उनके अनुसार, नियमित समय पर पसंदीदा खेल खेलने से दिनचर्या में मनोरंजन के लिए भी पर्याप्त समय मिल जाता है।
शिवन्या चौधरी के अनुसार स्कूल से आने के बाद वह कुछ देर आउटडोर गेम्स खेलती हैं। इसके बाद उन्हें इनडोर गेम्स में शतरंज खेलना पसंद है। उनका मानना है कि शतरंज खेलने से दिमाग सक्रिय रहता है और पढ़ाई के अलावा भी कुछ नया करने का मौका मिलता है।
शिवम ने कहा कि मुझे कैरम और शतरंज दोनों खेलना अच्छा लगता है। वह इन खेलों के लिए रोजाना लगभग एक घंटा निर्धारित रखते हैं। अपनी बहन के साथ कैरम खेलने से उन्हें अच्छा महसूस होता है और पढ़ाई के बाद होने वाली थकान से राहत मिलती है। उनके अनुसार, नियमित समय पर पसंदीदा खेल खेलने से दिनचर्या में मनोरंजन के लिए भी पर्याप्त समय मिल जाता है।