
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। धूम्रपान का असर केवल फेफड़ों और हृदय तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे सुनने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। एम्स भोपाल के ईएनटी विभाग में हुई एक रिसर्च में धूम्रपान करने वालों में गैर-धूम्रपान करने वालों की तुलना में सुनने की समस्या अधिक पाई गई है।
अध्ययन में शामिल 100 पुरुषों में से 50 धूम्रपान करने वाले और 50 गैर-धूम्रपान करने वाले थे। सभी की उम्र 18 से 55 वर्ष के बीच थी। रिसर्च में धूम्रपान करने वाले 50 लोगों में से 18 यानी 36 प्रतिशत में सुनने की कमी मिली, जबकि गैर-धूम्रपान करने वाले 50 लोगों में केवल सात यानी 14 प्रतिशत लोगों में यह समस्या पाई गई।
शोधकर्ताओं के अनुसार दोनों समूहों के बीच यह अंतर सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण था। रिसर्च के दौरान प्रतिभागियों की सुनने की क्षमता की जांच आडियोमेट्री, ट्यूनिंग फोर्क टेस्ट और कान की जांच से की गई।
धूम्रपान करने वालों में अधिकांश मामलों में सुनने की कमी हल्की थी। 13 लोगों में हल्की, चार में मध्यम और एक व्यक्ति में मध्यम से अधिक स्तर की सुनने की कमी मिली।

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अध्ययन में यह भी देखा गया कि रोजाना अधिक सिगरेट या बीड़ी पीने वालों में निकोटीन पर निर्भरता अधिक थी। 50 धूम्रपान करने वालों में 44 प्रतिशत में निर्भरता बहुत कम, 26 प्रतिशत में कम, 12 प्रतिशत में मध्यम, 14 प्रतिशत में अधिक और चार प्रतिशत में बहुत अधिक पाई गई।
रोजाना सिगरेट की संख्या बढ़ने के साथ निकोटीन निर्भरता बढ़ने का संबंध महत्वपूर्ण पाया गया। यह अध्ययन एम्स भोपाल के ईएनटी-हेड एंड नेक सर्जरी विभाग की खुशी मेघानी, शैला सिडाम, आशीष पाखरे, अपर्णा जी. चव्हाण, विवेक के. भारती और अंजन के. साहू ने किया है।
शोध में धूम्रपान करने वालों और गैर-धूम्रपान करने वालों में अवसाद, चिंता और तनाव का भी आकलन किया गया। धूम्रपान करने वालों में अवसाद 20 प्रतिशत और गैर-धूम्रपान करने वालों में 12 प्रतिशत पाया गया। वहीं चिंता धूम्रपान करने वालों में 36 प्रतिशत और गैर-धूम्रपान करने वालों में 46 प्रतिशत थी। तनाव क्रमश: चार और शून्य प्रतिशत रहा।