
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। एक दौर था जब घरों में दीपावली की तैयारियां कई दिन पहले शुरू हो जाती थीं। समय के साथ यह परंपरा कुछ कमजोर पड़ी। व्यस्त जीवनशैली ने लोगों को बाजार की मिठाइयों और नमकीन पर निर्भर कर दिया। अब एक बार फिर घर जैसे स्वाद की तलाश लोगों को क्लाउड किचन तक ले जा रही है। खास बात यह है कि इस बार पारंपरिक पकवानों के साथ सेहत का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है। इंदौर में दीपावली के मौके पर क्लाउड किचन के जरिए पारंपरिक मिठाइयों और नमकीन की मांग बढ़ रही है। खास बात यह है कि इससे महिलाओं के लिए भी आय के रास्ते खुल रहे हैं।
मिष्ठी जैन ने 2023 में क्लाउड किचन शुरू किया। दोनों मिलकर गुझिया और अलग-अलग तरह के लड्डू तैयार करती हैं। उनके यहां मिठाइयों का मेन्यू ग्राहकों की पसंद के अनुसार तय होता है। वे बताती हैं कि कम शक्कर वाले और ड्राईफ्रूट से तैयार लड्डुओं की मांग सबसे ज्यादा रहती है। वहीं, गुझिया बनाते समय भी ग्राहकों की पसंद का ध्यान रखा जाता है और उसमें चाश्नी का उपयोग नहीं किया जाता। उनका कहना है कि अब ग्राहक ऑर्डर देते समय ही बता देते हैं कि उन्हें कितनी मिठास चाहिए और किस तरह की सामग्री उपयोग की जाए।
रूपाली तिवारी के लिए घर से शुरू हुआ मिठाई बनाने का काम अब दीपावली के दौरान बड़े आर्डर तक पहुंच चुका है। उन्होंने लाकडाउन के समय घर पर मिठाइयां बनाना शुरू किया था। धीरे-धीरे लोगों को उनके बनाए पकवान पसंद आने लगे और अब हर दीपावली पर उन्हें अच्छी संख्या में आर्डर मिलते हैं। वे बताती हैं कि इस बार बेसन, अंजीर और ड्राईफ्रूट से तैयार मिठाइयों की मांग अधिक है। ग्राहक शुगर-फ्री विकल्पों के साथ गुड़ से बनी मिठाइयां भी पसंद कर रहे हैं।
क्लाउड किचन संचालिका श्वेता सिंह के अनुसार, त्योहारों के दौरान इंदौर में इस तरह के किचन की मांग तेजी से बढ़ रही है। लोगों की बदलती खानपान संबंधी प्राथमिकताओं को देखते हुए उन्होंने भी दीपावली के लिए विशेष मेन्यू तैयार किया है। इसमें शुगर-फ्री गुझिया, बेक्ड चकली और गुड़-पीनट बार जैसे विकल्प शामिल हैं। इन व्यंजनों को तैयार करते समय पारंपरिक स्वाद बरकरार रखने की कोशिश की जाती है, लेकिन सामग्री और पकाने के तरीके में जरूरत के मुताबिक बदलाव किया जाता है।