
हेल्थ डेस्क, नई दिल्ली। अगर सुबह आंख खुलते ही आपका हाथ कॉफी के कप की तरफ जाता है, तो आप अकेले नहीं हैं। बहुत से लोग नींद और थकान दूर करने के लिए कॉफी पर निर्भर रहते हैं। लेकिन क्या हो अगर हम कहें कि कॉफी पीने के तुरंत बाद थोड़ी देर सोना, सिर्फ कॉफी पीने से ज्यादा असरदार हो सकता है?
सुनने में यह थोड़ा अजीब जरूर लगता है, लेकिन इस तरीके को ‘Coffee Nap’ या ‘Nappuccino’ कहा जाता है। इसमें कॉफी पीने के बाद करीब 20 मिनट की छोटी झपकी ली जाती है। दावा यह है कि जागने के बाद नींद और सुस्ती कम महसूस हो सकती है और दिमाग ज्यादा अलर्ट रह सकता है।
कॉफी में मौजूद कैफीन सेंट्रल नर्वस सिस्टम को एक्टिव करता है। यह दिमाग में मौजूद एडेनोसिन नाम के न्यूरोट्रांसमीटर के असर को रोकता है। एडेनोसिन शरीर में थकान और नींद महसूस कराने में भूमिका निभाता है।
कैफीन एडेनोसिन के असर को रोककर जागने और सतर्कता को बढ़ाने में मदद करता है। यही वजह है कि कॉफी पीने के बाद हमें अक्सर नींद कम और ऊर्जा ज्यादा महसूस होती है। लेकिन कैफीन पीते ही तुरंत अपना पूरा असर नहीं दिखाता।
कॉफी में मौजूद कैफीन को शरीर में अवशोषित होने और दिमाग तक पहुंचने में कुछ समय लगता है। आमतौर पर इसका असर महसूस होने में करीब 20 से 30 मिनट लग सकते हैं। यही समय ‘Coffee Nap’ का सबसे दिलचस्प हिस्सा है।
कॉफी पीने के तुरंत बाद अगर आप करीब 20 मिनट की छोटी झपकी लेते हैं, तो इस दौरान शरीर और दिमाग थोड़ी देर आराम कर लेते हैं। जब आप जागते हैं, तब तक कैफीन का असर शुरू हो चुका होता है।
यानी इस तरीके में दो चीजों का फायदा एक साथ लेने की कोशिश की जाती है- छोटी झपकी से थकान कम करना और कैफीन से सतर्कता बढ़ाना।
अगर आप इस तरीके को आजमाना चाहते हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
1. कॉफी पीने में ज्यादा समय न लगाएं
एक कप कॉफी, ब्लैक कॉफी, आइस्ड कॉफी या एस्प्रेसो को अपेक्षाकृत जल्दी पी लें। इसका उद्देश्य यह है कि कैफीन लेने और झपकी के बीच ज्यादा अंतर न हो।
2. 20 मिनट का अलार्म लगाएं
कॉफी खत्म करने के बाद करीब 20 मिनट का अलार्म लगाकर आराम करें। बहुत देर तक सोने से बचना बेहतर है। लंबी झपकी में आप गहरी नींद की अवस्था में जा सकते हैं और उठने पर कुछ समय तक और ज्यादा सुस्ती महसूस हो सकती है।
3. नींद आए तो सोएं, नहीं तो सिर्फ आराम करें
जरूरी नहीं कि हर बार कॉफी पीने के बाद आपको तुरंत नींद आ जाए। अगर आप पूरी तरह सो नहीं पाते, तो भी आंखें बंद करके शांत अवस्था में थोड़ी देर आराम करना थकान कम करने में मदद कर सकता है।
छोटी झपकी के बाद दिमाग को थोड़े समय के लिए आराम मिलता है। इसी दौरान कैफीन का असर भी शुरू हो सकता है। इसका नतीजा यह हो सकता है कि जागने के बाद आपको कम सुस्ती, ज्यादा सतर्कता और बेहतर फोकस महसूस हो।
इसी वजह से ‘Coffee Nap’ को कई लोग काम या पढ़ाई के दौरान नींद से निपटने के एक आसान तरीके के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।
सिर्फ कॉफी पीने से कैफीन आपको जगाने में मदद करता है, लेकिन थकान का एहसास पूरी तरह खत्म नहीं होता। दूसरी तरफ, छोटी झपकी शरीर और दिमाग को कुछ समय का आराम देती है।
‘Coffee Nap’ में दोनों को एक साथ इस्तेमाल किया जाता है। पहले कैफीन, फिर छोटी झपकी और जागने तक कैफीन का असर शुरू।
हालांकि, इसे नींद की कमी का स्थायी समाधान नहीं समझना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को लगातार पर्याप्त नींद लेने के बावजूद दिनभर अत्यधिक नींद या थकान महसूस होती है, तो इसकी वजह जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। यह किसी योग्य डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। कैफीन का सेवन अपनी स्वास्थ्य स्थिति और सहनशीलता के अनुसार करें। किसी बीमारी, गर्भावस्था या दवाओं के सेवन की स्थिति में कैफीन को लेकर डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।