
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। बढ़ती उम्र के निशानों को कम करने और चेहरे को युवा बनाए रखने की चाह अब महानगरों तक सीमित नहीं है। भोपाल में भी लोग अपने रूप-रंग और व्यक्तित्व को लेकर पहले की तुलना में अधिक सजग हुए हैं।
खासतौर पर 20 से 40 वर्ष की उम्र के लोगों में कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं और सर्जरी के प्रति रुचि बढ़ी है। वहीं 40 वर्ष के बाद आंखों के नीचे उभरने वाले आई बैग्स, चेहरे की ढीली त्वचा और बालों की समस्या को दूर करने के लिए भी लोग विशेषज्ञों की सलाह ले रहे हैं।
ब्लेफरोप्लास्टी, फेस लिफ्टिंग, राइनोप्लास्टी, हेयर ट्रांसप्लांट, पीआरपी, बोटॉक्स और फिलर्स जैसी प्रक्रियाएं अब शहर में भी कराई जा रही हैं।
प्लास्टिक सर्जन Dr. सुनील राठौर के अनुसार, खूबसूरत दिखना आज के समय में लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण हो गया है। पहले चेहरे के रूप-रंग को लेकर इतनी जागरूकता नहीं थी, लेकिन अब व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन दोनों में लोग अपने लुक को लेकर सजग हैं। ब्लेफरोप्लास्टी काफी सामान्य प्रक्रिया बन रही है।
इसमें ऊपरी और निचली पलकों के नीचे जमा अतिरिक्त चर्बी या आई बैग्स को हटाया जाता है। ये समस्या 40 वर्ष की उम्र के बाद अधिक दिखाई देने लगती है। इन्हें ठीक करने से आंखों का लुक अधिक युवा नजर आता है। इसे पुरुष भी करा रहे हैं।
इसके अलावा नाक का आकार सुधारने के लिए राइनोप्लास्टी, चेहरे की त्वचा में कसाव के लिए फेस लिफ्टिंग और शरीर के जिद्दी फैट को कम करने के लिए लाइपोसक्शन जैसी सर्जरी भी कराई जा रही हैं। गर्भावस्था या उम्र बढ़ने के बाद ब्रेस्ट सैगिंग की समस्या को ठीक करने के लिए महिलाएं ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन जैसी प्रक्रियाओं का सहारा ले रही हैं।

Dr. राहुल दुबेपुरिया, एसोसिएट प्रोफेसर, बर्न्स एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग, एम्स के अनुसार, राइनोप्लास्टी, फेस लिफ्टिंग और ब्लेफरोप्लास्टी जैसी प्रक्रियाओं के प्रति लोगों की रुचि बढ़ी है।
बालों को घना करने के लिए हेयर ट्रांसप्लांट और पीआरपी भी कराया जा रहा है। पीआरपी में व्यक्ति के अपने रक्त से प्लाज्मा अलग कर उसे बालों की जड़ों में लगाया जाता है।
महिलाओं में बोटॉक्स और फिलर्स का चलन भी बढ़ा है। उन्होंने बताया कि एम्स में सामान्य मरीज अधिक आते हैं, जबकि निजी स्तर पर शहर में कॉस्मेटिक प्रक्रियाएं कराने वालों की संख्या बढ़ी है। लोग चेहरे से मस्से, तिल और छोटे निशान तक लेजर के जरिए हटवा रहे हैं।

युवा दिखने की चाह केवल कॉस्मेटिक सर्जरी तक सीमित नहीं है। फिटनेस के प्रति सजग लोगों के बीच बायोहैकिंग भी चर्चा में है। इसमें शरीर और जीवनशैली को बेहतर बनाए रखने के लिए नींद की निगरानी, विशेष खान-पान, ध्यान, व्यायाम, फिटनेस ट्रैकर और स्मार्ट रिंग जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
शहर के कुछ वेलनेस सेंटरों में ठंडे पानी की थेरेपी यानी आइस बाथ जैसे सत्र भी शुरू हुए हैं। इनके लिए करीब 1,500 से 2,500 रुपये प्रति सत्र तक शुल्क लिया जा रहा है। स्मार्ट रिंग और फिटनेस बैंड के जरिए नींद, तनाव और हृदय गति जैसी गतिविधियों पर नजर रखने का चलन भी फिटनेस प्रेमियों में बढ़ा है।
इन उपकरणों की कीमत करीब 20 हजार से 60 हजार रुपये तक बताई गई है। कुछ केंद्रों में त्वचा संबंधी उपचार और विटामिन की आईवी ड्रिप जैसी प्रक्रियाएं भी उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत करीब 10 हजार से 40 हजार रुपये तक हो सकती है।
