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लाइफस्टाइल डेस्क: बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव के कारण अनिद्रा अब आम समस्या बनती जा रही है। इसी बीच सोशल मीडिया पर ‘डार्क शॉवरिंग’ (Dark Showering) नाम का नया ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि कम रोशनी या अंधेरे में नहाने से दिमाग शांत होता है और नींद बेहतर आती है। विशेषज्ञ इसे रिलैक्सेशन तकनीक के रूप में देख रहे हैं, हालांकि इसे कोई चमत्कारी इलाज नहीं माना जा रहा।

डार्क शॉवरिंग का अर्थ है बहुत कम रोशनी या लगभग अंधेरे में स्नान करना। माना जाता है कि इस दौरान शरीर की इंद्रियां शांत हो जाती हैं और मस्तिष्क को आराम का संकेत मिलता है। कुछ लोग इसे पारंपरिक स्नान संस्कार से भी जोड़कर देखते हैं, जहां नहाना केवल सफाई नहीं बल्कि मानसिक शुद्धि का माध्यम माना जाता है।
आज की व्यस्त दिनचर्या में नींद से जुड़ी समस्याएं जैसे देर से नींद आना, बार-बार जागना और दिनभर थकान आम हो चुकी हैं। ऐसे में बिना खर्च वाला यह तरीका लोगों को आकर्षित कर रहा है। डार्क शॉवर लेने से शरीर रिलैक्स मोड में जाता है और व्यक्ति मानसिक रूप से शांत महसूस करता है, इसलिए कई लोग इसे आसान घरेलू उपाय के रूप में अपनाने लगे हैं।
डार्क शॉवरिंग को एक तरह का ध्यान अनुभव भी माना जा रहा है। अंधेरे में दृश्य उत्तेजना कम हो जाती है, जिससे ध्यान पानी के तापमान, खुशबू और आवाज पर केंद्रित होता है। इससे तनाव से जुड़ा कोर्टिसोल हार्मोन कम हो सकता है और मन शांत महसूस करता है। कई लोग इसे दिनभर की थकान दूर करने वाला अनुभव बताते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि डार्क शॉवरिंग नींद की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं है। इसे आरामदायक आदत के रूप में अपनाया जा सकता है, लेकिन गंभीर अनिद्रा या मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में चिकित्सकीय सलाह जरूरी है। यदि इसे जल्दबाजी या तनाव में किया जाए तो इसका लाभ कम हो सकता है।