
हेल्थ डेस्क। डायबिटीज को आमतौर पर ब्लड शुगर बढ़ने से जुड़ी बीमारी माना जाता है, लेकिन इसका असर शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी पड़ सकता है। मसूड़ों की बीमारी और डायबिटीज के बीच भी दोतरफा संबंध देखा गया है। यानी लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने से मसूड़ों की समस्या का खतरा बढ़ सकता है और गंभीर मसूड़ों की बीमारी ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में परेशानी बढ़ा सकती है।
रायपुर के आंबेडकर हॉस्पिटल और सरकारी डेंटल कॉलेज की रिसर्च में लोगों में जागरूकता की कमी सामने आई। स्टडी में 300 लोगों को शामिल किया गया था। इनमें 150 डायबिटीज मरीज और 150 गैर-डायबिटिक लोग थे।
रिसर्च के मुताबिक, 64% डायबिटीज मरीजों को यह जानकारी नहीं थी कि बढ़ा हुआ ब्लड शुगर मसूड़ों और दांतों को प्रभावित कर सकता है। वहीं, सभी लोगों में से 76% को डायबिटीज और डेंटल हेल्थ के बीच संबंध की जानकारी नहीं थी।
डायबिटीज में लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने पर शरीर की इन्फेक्शन से लड़ने की क्षमता और घाव भरने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसका असर डेंटल हेल्थ पर भी पड़ सकता है।
मसूड़ों में बैक्टीरियल इन्फेक्शन बढ़ने पर जिंजिवाइटिस और आगे चलकर पेरियोडॉन्टाइटिस जैसी समस्या हो सकती है। पेरियोडॉन्टाइटिस मसूड़ों और दांतों को सहारा देने वाले ऊतकों को प्रभावित करने वाली गंभीर बीमारी है। रिसर्च में पहले स्टडी के हवाले से बताया गया है कि अनियंत्रित डायबिटीज वाले लोगों में गंभीर पेरियोडॉन्टाइटिस का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में करीब 2.9 गुना अधिक हो सकता है। इसलिए डायबिटीज मरीजों में मसूड़ों से खून आना, सूजन या लंबे समय तक मुंह से बदबू जैसी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
गंभीर पेरियोडॉन्टाइटिस में मसूड़ों में लंबे समय तक सूजन और इन्फेक्शन बना रह सकता है। शरीर में चलने वाली यह सूजन इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ी हो सकती है, जिससे ब्लड शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।
इसी वजह से डायबिटीज और पेरियोडॉन्टाइटिस को एक-दूसरे से पूरी तरह अलग समस्याएं मानने के बजाय दोनों के बीच संभावित संबंध को समझना जरूरी है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मसूड़ों की बीमारी ही डायबिटीज का एकमात्र कारण है या मसूड़ों का इलाज करने से डायबिटीज खत्म हो जाएगी। डायबिटीज एक जटिल बीमारी है, जिस पर कई अलग-अलग कारकों का प्रभाव पड़ता है।
स्टडी में जब पूछा गया कि क्या डायबिटीज होने से मसूड़ों की बीमारी का खतरा बढ़ सकता है, तो 54.7% डायबिटीज मरीजों को इसकी जानकारी नहीं थी। गैर-डायबिटिक लोगों में यह आंकड़ा 65.3% था।
वहीं, सिर्फ 36% डायबिटीज मरीजों को पता था कि बढ़ी हुई शुगर का असर मसूड़ों पर पड़ सकता है। गैर-डायबिटिक समूह में यह जानकारी सिर्फ 9.3% लोगों को थी। ये आंकड़े बताते हैं कि डायबिटीज के साथ ओरल हेल्थ को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
स्टडी में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई। 75.3% डायबिटीज मरीजों ने बताया कि उनके फिजीशियन ने कभी उन्हें दांतों और मसूड़ों की जांच के लिए डेंटिस्ट के पास जाने की सलाह नहीं दी। सिर्फ 24.7% मरीजों को ऐसी सलाह मिली थी।
रिसर्च के नजरिए से यह आंकड़ा डायबिटीज की देखभाल में मेडिकल और डेंटल हेल्थ के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत की ओर इशारा करता है।
स्टडी में लोगों से यह भी पूछा गया कि क्या अच्छी ओरल हाइजीन डायबिटीज से बचाव में मदद कर सकती है। सिर्फ 16% लोगों ने ‘हां’ कहा। 32.7% ने ‘नहीं’ और 51.3% ने ‘कोई जानकारी नहीं’ विकल्प चुना।
यहां यह समझना जरूरी है कि अच्छी ओरल हाइजीन को डायबिटीज से बचाव की गारंटी नहीं माना जा सकता। लेकिन नियमित ब्रशिंग, फ्लॉसिंग, तंबाकू से दूरी और समय-समय पर डेंटल चेकअप डेंटल हेल्थ बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
स्टडी में छत्तीसगढ़ में ओरल हाइजीन से जुड़े पूर्व स्टडी का भी उल्लेख किया गया है। इन आंकड़ों के अनुसार, करीब 49.9% लोग उंगली और गुड़ाखू से दांत साफ करते हैं, जबकि करीब 35.6% लोग टूथब्रश का इस्तेमाल करते हैं।
गुड़ाखू और अन्य तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल मुंह और मसूड़ों की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। तंबाकू का सेवन ओरल कैंसर समेत कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से भी जुड़ा है।
रिसर्च में पहले प्रकाशित स्टडी और मेटा-एनालिसिस का हवाला देते हुए बताया गया है कि पेरियोडॉन्टाइटिस के इलाज के बाद कुछ स्टडी में HbA1c में 0.36 से 0.65 प्रतिशत तक की औसत कमी देखी गई। एक अन्य मेटा-एनालिसिस में 0.79% की कमी बताई गई।
लेकिन यहां एक जरूरी अंतर समझना होगा। ये आंकड़े रायपुर में हुए मौजूदा स्टडी के मरीजों पर किए गए इलाज के परिणाम नहीं हैं। वर्तमान स्टडी मुख्य रूप से लोगों की जानकारी और जागरूकता का प्रश्नावली के माध्यम से आकलन करता है।
डायबिटीज के साथ अगर मसूड़ों में बार-बार सूजन या खून आता है, ब्रश करते समय bleeding होती है, मुंह से लगातार बदबू आती है, मसूड़े पीछे हट रहे हैं या दांत हिलने लगे हैं, तो इन्हें सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ऐसे लक्षण होने पर डेंटिस्ट से जांच कराना जरूरी है। डायबिटीज मरीजों के लिए ब्लड शुगर की नियमित निगरानी के साथ ओरल हेल्थ पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण है।
रिसर्च का मुख्य संदेश यही है कि डायबिटीज की देखभाल केवल ब्लड शुगर की रिपोर्ट तक सीमित नहीं होनी चाहिए। मसूड़ों और दांतों की सेहत भी मरीज की ओवरऑल हेल्थ का महत्वपूर्ण हिस्सा है।