
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। देश 15 अगस्त को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। इस मौके पर देशभर में ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम्’ की गूंज सुनाई देगी। दोनों ही भारत की राष्ट्रीय पहचान और स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़े हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में क्या अंतर है? दोनों की रचना किसने की और इनके सम्मान से जुड़े नियम क्या हैं?
भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ रवींद्रनाथ टैगोर ने लिखा था। इसे पहली बार 1911 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था। संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को इसे भारत के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया।
वहीं ‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। इसे पहली बार 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया। बाद में इसे राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया।
‘जन गण मन’ के पूर्ण संस्करण को गाने में करीब 52 सेकंड लगते हैं। आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगान बजाए या गाए जाने के दौरान लोगों से सम्मान में सावधान की मुद्रा में खड़े रहने की अपेक्षा की जाती है।
राष्ट्रगान के सम्मान से जुड़े कानूनी प्रावधान भी हैं। Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 के तहत राष्ट्रगान का जानबूझकर अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने जैसी गतिविधियों पर कार्रवाई का प्रावधान है।
‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान की तरह कोई निश्चित गायन अवधि या समान आधिकारिक प्रोटोकॉल हासिल नहीं है। इसके बजने या गाए जाने के दौरान खड़ा होना सम्मान प्रकट करने का तरीका माना जाता है, लेकिन राष्ट्रगान के मामले में लागू समान कानूनी प्रावधान यहां लागू नहीं होते। अब इसे हर सामाजिक कार्यरृक्रमों में जरूरी कर दिया गया है।
स्वतंत्रता दिवस के लाल किले के मुख्य समारोह में दशकों से राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। लेकिन 2026 में कार्यक्रम के क्रम में बदलाव देखने को मिलेगा।
15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन से पहले ‘वंदे मातरम्’ का गायन होगा और इसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया जाएगा। यह बदलाव 80वें स्वतंत्रता दिवस के समारोह को खास बना रहा है।
‘जन गण मन’ आज भारत का राष्ट्रगान है और राष्ट्रीय समारोहों में इसकी विशेष संवैधानिक और आधिकारिक भूमिका है। वहीं ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक स्मृति और देशभक्ति की भावना से जुड़ा राष्ट्रगीत है। दोनों की भूमिका अलग है, लेकिन भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय चेतना में दोनों का स्थान बेहद महत्वपूर्ण है।
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