
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। घरों में रोशनी, मिठाइयों की खुशबू और आसमान में रंग-बिरंगी आतिशबाजी...दीपावली की रात इंसानों के लिए खुशियों और उत्साह का प्रतीक होती है, लेकिन इसी रात शहर के बेजुबानों के लिए डर और दहशत का माहौल बन जाता है।
पटाखों की तेज आवाज से पालतू कुत्ते-बिल्लियां सहमकर घरों के कोनों में दुबक जाते हैं तो सड़कों पर रहने वाले आवारा पशु इधर-उधर भागने लगते हैं। जिन आवाजों को इंसान उत्सव का हिस्सा मानकर आनंद लेते हैं, वही आवाजें बेजुबान पशुओं के लिए तनाव और परेशानी का कारण बनती हैं।
पटाखों की अचानक होने वाली तेज आवाज से पशु घबरा जाते हैं। कई कुत्ते डर के कारण भौंकने लगते हैं, कुछ घरों में छिपने की जगह तलाशते हैं तो कुछ बाहर भागने की कोशिश करते हैं। इस दौरान उनके घायल होने, रास्ता भटकने और दुर्घटना का शिकार होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
बिल्लियां भी तेज आवाज से बचने के लिए बंद और सुरक्षित जगहों में छिप जाती हैं। वेटरनरी डाक्टर आरके मावई के अनुसार दीपावली के दौरान पालतू पशुओं के मालिकों के सामने उन्हें सुरक्षित रखने की चुनौती रहती है। पटाखे चलने के दौरान पालतू कुत्तों और बिल्लियों को घर के भीतर सुरक्षित कमरे में रखा जाए।
खिड़की-दरवाजे बंद रखें और उनके आसपास ऐसा माहौल बनाएं, जहां बाहरी शोर का असर कम हो। पशुओं को अकेला छोड़ने के बजाय उनके साथ रहना चाहिए। डरने पर उन्हें डांटने या जबरदस्ती बाहर निकालने से बचना चाहिए।
पालतू पशुओं के लिए उनके मालिक सुरक्षा के इंतजाम कर लेते हैं, लेकिन सड़कों पर रहने वाले आवारा कुत्तों और मवेशियों की चिंता करने वाला कोई तय तंत्र नजर नहीं आता। पटाखों की आवाज से घबराकर ये पशु सड़कों पर दौड़ने लगते हैं। ऐसे में वाहन चालकों के लिए भी दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। पशु प्रेमियों और स्वयंसेवी संस्थाओं के सामने इन पशुओं को सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर उपचार उपलब्ध कराने की चुनौती रहती है।
कुत्ते और बिल्लियों की सुनने की क्षमता इंसानों के मुकाबले कई गुना ज्यादा होती है। उन्हें जरा सी आहट भी सुनाई दे जाती है। ऐसे में दीपावली पर जब तेज आवाज के पटाखे चलते हैं, तो सुनने की यही खासियत उनके लिए हानिकारक हो जाती है। हर तेज आवाज पर वे घबरा जाते हैं। जरूरी है कि इन दिनों में अपने कुत्ते या बिल्ली को कमरे में बंद रखें। यदि वह ज्यादा घबरा रहा है, तो उसके कान में रुई डालकर कानों को कपड़े से बांध दें। इससे उन्हें कुछ राहत मिलेगी।
डाॅ. आरके मावई, वेटरनरी डाॅक्टर