
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। दीपावली पर रोशनी और आतिशबाजी के बीच आंखों की सेहत को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। पटाखों से निकलने वाला धुआं, हानिकारक रासायनिक कण और चिंगारियां आंखों में जलन, एलर्जी, सूखापन और संक्रमण की वजह बन सकती हैं।
त्योहार के दौरान ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ने की आशंका रहती है। आकुलर ट्रामा सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं रतन ज्योति नेत्रालय के डायरेक्टर वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ. पुरेंद्र भसीन एवं डाॅ. प्रियंवदा भसीन ने कहा कि पटाखों से आंख में लगी चोट को कभी मामूली नहीं समझना चाहिए।
कई बार बाहरी रूप से सामान्य दिखने वाली चोट भी आंख के अंदर गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में तत्काल विशेषज्ञ से जांच और उपचार कराना आवश्यक है।
जिला अस्पताल मुरार के नेत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ. गजराज सिंह गुर्जर ने भी लोगों को आतिशबाजी के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। डाॅ. गुर्जर के अनुसार, पटाखों से निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड और अन्य रासायनिक गैसें आंखों की संवेदनशील सतह को प्रभावित करती हैं।
इससे आंखों में जलन, खुजली, लालिमा, पानी आना और सूखापन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जिन लोगों को पहले से ड्राइ आइ, एलर्जी या कार्निया संबंधी परेशानी है, उन्हें अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
- आतिशबाजी के दौरान सुरक्षा चश्मे (सेफ्टी गागल्स) का इस्तेमाल करें।
- पटाखे जलाते समय चेहरे और आंखों को सुरक्षित दूरी पर रखें।
- बच्चों को पटाखे जलाते समय अकेला न छोड़ें।
- धुआं या कोई कण आंख में जाने पर आंखों को साफ पानी से धोएं, रगड़ें नहीं।
- आंख में चिंगारी या चोट लगने पर तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें।
- बिना डाक्टर की सलाह के कोई आइ ड्राप या दवा इस्तेमाल न करें।
- बाहर निकलते समय चश्मा पहनें, ताकि धूल और धुएं के कणों से बचाव हो सके।
- कान्टैक्ट लेंस पहनने वाले लोग आतिशबाजी के दौरान लेंस लगाने से बचें।
- कार्बाइड गन का उपयोग बिल्कुल न करें और न ही इसे खरीदें।