
लाइफस्टाइल डेस्क। पीरियड्स के दौरान होने वाला दर्द (Period Cramps) कई महिलाओं के लिए बेहद असहनीय हो जाता है। कुछ महिलाओं को यह दर्द हल्का-फुल्का महसूस होता है, जबकि कई महिलाओं के लिए यह इतना गंभीर रूप ले लेता है कि उनका रोजमर्रा का काम करना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे समय में राहत पाने के लिए कई महिलाएं पेन किलर (दर्द निवारक दवाओं) का सहारा लेती हैं।
हालांकि, हमारे समाज में पीरियड्स के दौरान पेन किलर लेने को लेकर कई तरह के भ्रम और डर फैले हुए हैं। सबसे बड़ा मिथक यह है कि 'पीरियड्स में पेन किलर खाने से आगे चलकर प्रेग्नेंसी (मां बनने) में दिक्कत आती है।' आइए जानते हैं कि इस बात में कितनी सच्चाई है।
मेडिकल साइंस के अनुसार, पीरियड्स के दौरान होने वाला दर्द यूटेरस (गर्भाशय) में होने वाले संकुचन (Contraction) के कारण होता है। दरअसल, हर महीने महिला का शरीर प्रेग्नेंसी की तैयारी में यूटेरस के अंदर एक मुलायम परत (Lineining) बनाता है। जब प्रेग्नेंसी नहीं होती, तो यूटेरस इस परत को शरीर से बाहर निकालने के लिए सिकुड़ता है।
इस संकुचन को ट्रिगर करने के लिए महिला का शरीर प्रोस्टाग्लैंडिंस (Prostaglandins) नाम का केमिकल रिलीज करता है। पीरियड्स शुरू होने से ठीक पहले शरीर में इसका स्तर काफी बढ़ जाता है। जिस महिला के शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिंस का स्तर जितना अधिक होगा, उसे उतना ही तेज दर्द और क्रैम्प्स महसूस होंगे। इसके अलावा, संकुचन के दौरान गर्भाशय में ऑक्सीजन की सप्लाई कुछ समय के लिए कम हो जाती है, जो दर्द की एक बड़ी वजह है।
पीरियड पेन से राहत पाने के लिए सीमित और सही मात्रा में पेन किलर लेना बिल्कुल सुरक्षित है। आमतौर पर पीरियड क्रैम्प्स के लिए इबुप्रोफेन (Ibuprofen) या मेफेनेमिक एसिड (Mefenamic Acid) जैसी दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है।
ये दवाएं शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिंस केमिकल के प्रोडक्शन को धीमा कर देती हैं। जब शरीर में यह केमिकल कम बनता है, तो यूटेरस का संकुचन सामान्य हो जाता है और महिला को दर्द से तुरंत राहत मिलती है। इसके अलावा, ये दवाएं पीरियड्स के दौरान होने वाली हैवी ब्लीडिंग को भी नियंत्रित करने में मदद करती हैं।
एक्सपर्ट्स की मानें तो पीरियड्स के दौरान ली जाने वाली पेन किलर्स का महिला के यूटेरस या उसकी फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है। यह धारणा कि इससे आगे चलकर मां बनने में दिक्कत आएगी, पूरी तरह से एक मिथक और अफवाह है। ये दवाएं सिर्फ कुछ घंटों के लिए दर्द के सिग्नल और सूजन को रोकती हैं, इनका रीप्रोडक्टिव सिस्टम पर कोई स्थाई प्रभाव नहीं होता।
भले ही ये दवाएं सुरक्षित हैं, लेकिन इन्हें लेते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
खाली पेट न लें - पेन किलर दवाओं को कभी भी खाली पेट नहीं खाना चाहिए, इससे एसिडिटी या पेट में अल्सर की समस्या हो सकती है।
डॉक्टर से सलाह लें - हमेशा डॉक्टर या गायनेकोलॉजिस्ट की सलाह पर ही सही डोज (खुराक) लें। मनमाने तरीके से बार-बार दवा न खाएं।
असामान्य दर्द को न करें इग्नोर - अगर पीरियड्स का दर्द इतना असहनीय है कि दवा लेने के बाद भी ठीक नहीं हो रहा, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। यह एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) या फाइब्रॉएड जैसी किसी अन्य मेडिकल स्थिति का संकेत हो सकता है।