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बच्चा नहीं सुनता आपकी बात? चिल्लाने के बजाय अपनाएं ये 6 जादुई तरीके, जिद्दी स्वभाव भी हो जाएगा शांत

अकसर माता-पिता की सबसे बड़ी शिकायत यही होती है कि बच्चा सुनता ही नहीं! ऐसे में हम झिझक कर डांट का सहारा लेते हैं, जो धीरे-धीरे बच्चे को या तो विद्रोही ...और पढ़ें

By Dheeraj BelwalEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 22 Mar 2026 05:18:40 PM (IST)Updated Date: Sun, 22 Mar 2026 05:18:40 PM (IST)
बच्चा नहीं सुनता आपकी बात? चिल्लाने के बजाय अपनाएं ये 6 जादुई तरीके, जिद्दी स्वभाव भी हो जाएगा शांत
आज ही बदलें अपना बात करने का अंदाज। (AI से जेनरेट की गई इमेज)

HighLights

  1. जिद्दी बच्चों को संभालने का 'स्मार्ट' फॉर्मूला
  2. बात मनवाने के लिए साइकोलॉजिकल हैक्स
  3. आज ही बदलें अपना बात करने का अंदाज

लाइफस्टाइल डेस्क। बच्चों की परवरिश किसी कच्ची मिट्टी को आकार देने जैसी है। अकसर माता-पिता की सबसे बड़ी शिकायत यही होती है कि "बच्चा सुनता ही नहीं!" ऐसे में हम झिझक कर डांट का सहारा लेते हैं, जो धीरे-धीरे बच्चे को या तो विद्रोही बना देता है या बेहद डरा हुआ। अगर आप भी इस चुनौती से जूझ रहे हैं, तो इन 6 मनोवैज्ञानिक तरीकों से आप बिना चिल्लाए अपनी बात मनवा सकते हैं।

जिद्दी बच्चों को प्यार से समझाने के 6 जादुई तरीके

1. आदेश नहीं, विकल्प (Options) दें

जब आप बच्चे को सीधा ऑर्डर देते हैं, तो उनका मन अनजाने में ही विरोध करने लगता है। इसकी जगह उन्हें 'चुनने की आजादी' दें।

"चलो, अब दूध पियो!" कहने के बजाय पूछें, "बेटा, आप दूध नीले मग में पियोगे या लाल वाले में?" जब बच्चा खुद चुनाव करता है, तो वह जिम्मेदारी महसूस करता है और काम खुशी-खुशी कर लेता है।

2. चिल्लाने के बजाय 'आई कॉन्टैक्ट' करें

अक्सर मां-बाप किचन या दूसरे कमरे से जोर से चिल्लाकर निर्देश देते हैं, जिसे बच्चे अक्सर अनसुना कर देते हैं।

बच्चे के पास जाएं, उसके घुटनों के स्तर तक झुकें और उसकी आंखों में आंखें डालकर (Eye Contact) धीमे स्वर में बात करें। आपकी शारीरिक मौजूदगी और शांत आवाज किसी भी डांट से ज्यादा प्रभावशाली होती है।

3. स्पष्ट और सीधे नियम बनाएं

"अच्छे बच्चे बनो" या "बदमाशी मत करो" जैसे वाक्य बच्चों के लिए बहुत उलझे हुए होते हैं। उन्हें समझ नहीं आता कि असल में करना क्या है।

उन्हें सीधे निर्देश दें, जैसे- "बेटा, खेलने के बाद सारे खिलौने इस नीले डिब्बे में रखने हैं।" नियम जितने सरल और सीधे होंगे, बच्चा उन्हें उतनी ही सटीकता से मानेगा।

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4. 'नहीं' की जगह 'हां' का प्रयोग करें

अगर बच्चा दिन भर सिर्फ "नहीं" और "मत करो" सुनेगा, तो वह इन शब्दों के प्रति लापरवाह हो जाएगा। नकारात्मक वाक्यों को सकारात्मकता में बदलें।

"सोफे पर जूते पहनकर मत चढ़ो" की जगह कहें - "बेटा, सोफे पर बैठने से पहले जूते उतार दो।" सकारात्मक भाषा बच्चे के दिमाग पर कम दबाव डालती है।

5. तारीफ करने में कंजूसी न करें

हम अक्सर बच्चों की गलतियों पर तो तुरंत टोकते हैं, लेकिन उनके छोटे-छोटे अच्छे कामों को नजरअंदाज कर देते हैं।

अगर बच्चा अपनी प्लेट खुद सिंक में रखे या किसी की मदद करे, तो दिल खोलकर उसकी तारीफ करें। जब उसे लगेगा कि अच्छे काम से 'अटेंशन' और 'प्यार' मिलता है, तो वह उसे दोहराएगा।

6. 'रोल मॉडल' बनें, 'भाषण' न दें

याद रखिए, बच्चे आपको सुनते कम हैं और देखते ज्यादा हैं। जैसे अगर आप खुद फोन में लगे रहते हैं या जोर से चिल्लाकर बात करते हैं, तो बच्चा भी वही सीखेगा। यदि आप चाहते हैं कि बच्चा अनुशासित रहे, तो पहले आपको खुद को एक उदाहरण के रूप में पेश करना होगा।


बच्चों को सुधारना कोई एक दिन का प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि धैर्य और असीम प्रेम की प्रक्रिया है। डांट-डपट से आप बात मनवा तो सकते हैं, लेकिन प्यार खो देंगे। इन तरीकों से आप बात भी मनवाएंगे और रिश्ता भी मजबूत करेंगे।