
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। आईने में गर्दन के सामने छोटी-सी गांठ दिखाई दे या कालर बंद करते समय गर्दन में कुछ उभरा हुआ महसूस हो तो इसे सामान्य सूजन मानकर नजरअंदाज न करें। थायराइड की गांठ आम समस्या है और अधिकांश गांठें कैंसर नहीं होतीं, लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है। समय पर जांच से बीमारी की पहचान और उचित उपचार संभव है।
नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में थायराइड से जुड़े ऑपरेशन के मामले पिछले कुछ वर्षों में बढ़े हैं। विभाग के अनुसार करीब पांच वर्ष पहले सालाना लगभग 100 थायराइड ऑपरेशन होते थे, अब यह संख्या बढ़कर 150 से 180 तक पहुंच गई है। पिछले छह महीने में ही 60 से अधिक मरीजों की सर्जरी हो चुकी है।
पिछले कुछ वर्षों में थायराइड नोड्यूल और थायराइड कैंसर के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ी है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के सहायक प्रोफेसर Dr. संजय के यादव के अनुसार सर्जरी विभाग में करीब पांच वर्ष पहले जहां लगभग 100 थायराइड ऑपरेशन प्रतिवर्ष किए जाते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर लगभग 150–180 ऑपरेशन प्रतिवर्ष तक पहुंच गई है।
इस कारण संस्थान मध्य भारत के अधिक कार्यभार वाले थायराइड सर्जरी केंद्रों में शामिल हो चुका है। चुनिंदा मरीजों में दाग रहित दूरबीन से की जाने वाली सर्जरी भी उपलब्ध है। मेडिकल कॉलेज डीन डा नवनीत सक्सेना, सर्जरी विभागाध्यक्ष डा दीप्तिबाला शर्मा और अधीक्षक डा अरविंद शर्मा की टीम बढ़ते केस के बीच उन्नत तकनीक पर फोकस कर रहे हैं।
कुल मरीजों में 60 से 70 प्रतिशत महिलाएं हैं। महिलाओं में गर्भावस्था, मासिक धर्म और मेनोपॉज के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव थायराइड संबंधी समस्याओं के साथ जुड़े हो सकते हैं। तनाव, नींद की कमी और खान-पान की आदतें भी स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। जबलपुर और महाकौशल क्षेत्र में भोजन-पानी में आयोडीन की कमी को भी एक संभावित कारण माना जा रहा है। हालांकि किसी मरीज में बीमारी का कारण जांच के बिना तय नहीं किया जा सकता।

साल दर साल ऐसे बढ़े मरीज।
थायराइड की कई गांठों में शुरुआत में दर्द या कोई खास परेशानी नहीं होती। यहां तक कि थायराइड की सामान्य ब्लड जांच भी सामान्य आ सकती है। इसलिए केवल सामान्य रिपोर्ट या दर्द नहीं होने के आधार पर गांठ को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। गर्दन में गांठ तेजी से बढ़ रही हो, वह कठोर महसूस हो, गर्दन में दूसरी गांठें हों, आवाज में अचानक बदलाव आए या निगलने और सांस लेने में परेशानी हो तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
डॉक्टर पहले गर्दन की जांच और अल्ट्रासाउंड के जरिए गांठ का मूल्यांकन करते हैं। जरूरत पड़ने पर एफएनएसी यानी सुई से गांठ की जांच कराई जाती है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की निगरानी, दवा या सर्जरी का निर्णय लिया जाता है। इसलिए गांठ मिलते ही घबराने या सीधे ऑपरेशन कराने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
थायराइड सर्जरी के बाेलते आंकड़े:
पहले सालाना ऑपरेशन लगभग - 100
वर्तमान सालाना ऑपरेशन 150-180
पहले हर माह ऑपरेशन 10-12
अब हर माह ऑपरेशन 20-25
कुल मरीजों में महिलाएं 60-70 फीसद
पिछले कुछ वर्षों में थायराइड नोड्यूल और थायराइड कैंसर के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ी है। सर्जरी विभाग में करीब पांच वर्ष पहले जहां लगभग 100 थायराइड ऑपरेशन प्रतिवर्ष किए जाते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर लगभग 150–180 आपरेशन प्रतिवर्ष तक पहुंच गई है। इस कारण संस्थान मध्य भारत के अधिक कार्यभार वाले थायराइड सर्जरी केंद्रों में शामिल हो चुका है।
संजय के यादव, सहायक प्रोफेसर, नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज