
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। त्योहारों और शादी के सीजन में हर कोई खूबसूरत और आकर्षक दिखना चाहता है। खासतौर पर दीपावली के आसपास महिलाएं मेकअप और त्वचा की देखभाल के लिए नए-नए कास्मेटिक उत्पाद खरीदती हैं। बाजार में मिलने वाले सस्ते और आकर्षक पैकेजिंग वाले उत्पाद कई बार इस चाहत को नुकसान में बदल सकते हैं। कम कीमत के लालच में खरीदे गए नकली और घटिया गुणवत्ता के कास्मेटिक्स त्वचा पर एलर्जी, जलन और गंभीर रिएक्शन पैदा कर सकते हैं। ऐसे उत्पाद चेहरे की रंगत निखारने के बजाय उसे खराब कर सकते हैं।
त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार, चेहरे पर इस्तेमाल होने वाले सौंदर्य प्रसाधनों का चयन बेहद सावधानी से करना चाहिए। हमेशा विश्वसनीय और प्रमाणित ब्रांड के उत्पाद खरीदें। केवल पैकेजिंग और कम कीमत देखकर किसी उत्पाद पर भरोसा करना नुकसानदायक हो सकता है। खासतौर पर गोरा होने या तुरंत ग्लो पाने के दावे करने वाली क्रीमों से सतर्क रहने की जरूरत है।
कई बार जल्दी गोरा होने की चाह में महिलाएं ऐसी क्रीमों का इस्तेमाल करने लगती हैं, जिनमें स्टेरॉयड मिला होता है। शुरुआत में इनसे चेहरे पर चमक या बदलाव दिखाई दे सकता है, लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल त्वचा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इससे त्वचा पतली होना, नसें दिखाई देना, लालिमा, सूजन, खुजली और घाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में चेहरे पर कालापन और मुंहासे भी बढ़ जाते हैं।
त्वचा रोग विशेषज्ञ जयेश कोठारी बताते हैं कि उनके पास कई बार ऐसे मरीज आते हैं, जिन्होंने चेहरा गोरा करने के लिए बिना चिकित्सकीय सलाह के स्टेरॉयड युक्त क्रीम का इस्तेमाल किया होता है। एक महिला मरीज ने कई दिनों तक बेट्नोवेट क्रीम चेहरे पर लगाई, जिसके बाद उसकी त्वचा बेहद पतली हो गई और घाव तक हो गए।
ऐसी स्थिति को टापिकल स्टेरॉयड डैमेज्ड फेस (टीएसडीएफ) कहा जाता है। खराब गुणवत्ता वाले उत्पादों और बिना सलाह स्टेरॉयड क्रीम के इस्तेमाल से यह समस्या बढ़ रही है। फेस्टिव सीजन और सर्दियों में ऐसे मामले अधिक सामने आते हैं।