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नईदुनिया प्रतिनिधि इंदौर। रसोई गैस सिलेंडर अथवा एलपीजी से संबंधित दुर्घटना किसी परिवार के लिए शारीरिक और आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। ऐसे मामलों में पात्र पंजीकृत एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए तेल विपणन कंपनियों की सार्वजनिक दायित्व बीमा व्यवस्था के तहत बीमा लाभ का प्रावधान हो सकता है।
अधिवक्ता मयंक खरे के अनुसार, दुर्घटना की स्थिति में प्रभावित उपभोक्ता या उसके परिवार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत बीमा क्लेम किया जा सकता है। हालांकि क्लेम की पात्रता और राशि दुर्घटना की परिस्थितियों तथा लागू बीमा पालिसी की शर्तों के आधार पर तय होती है।
अधिवक्ता मयंक खरे बताते हैं कि एलपीजी से संबंधित दुर्घटना होने पर उपभोक्ता या उसके परिजनों को बिना देरी किए संबंधित गैस वितरक को सूचना देनी चाहिए। जरूरत के अनुसार पुलिस को सूचना देकर घटना का आधिकारिक रिकॉर्ड भी तैयार कराना चाहिए। दुर्घटना के कारण और उससे हुई क्षति का सत्यापन क्लेम प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होता है, इसलिए घटनास्थल के फोटो-वीडियो और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखना चाहिए।
दुर्घटना के स्वरूप के अनुसार एफआईआर या पुलिस रिपोर्ट, अस्पताल के उपचार संबंधी दस्तावेज, चिकित्सकीय रिपोर्ट, दवाइयों और उपचार के बिल मांगे जा सकते हैं। मृत्यु होने की स्थिति में मृत्यु प्रमाणपत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य वैधानिक दस्तावेज जरूरी हो सकते हैं। संपत्ति के नुकसान की स्थिति में फोटो, बिल और नुकसान से जुड़े अन्य प्रमाण भी उपयोगी रहेंगे।
बीमा क्लेम की राशि सभी मामलों में समान नहीं होती। मृत्यु, शारीरिक चोट या संपत्ति के नुकसान की प्रकृति और लागू पालिसी की निर्धारित सीमाओं के आधार पर दावे का आकलन किया जाता है। केवल सिलेंडर फटने की घटना को अपने आप बीमा भुगतान का आधार नहीं माना जा सकता। दुर्घटना का एलपीजी रिसाव या एलपीजी से संबंध और घटना की वास्तविक परिस्थितियां भी जांच का हिस्सा होती हैं।
गैस रिसाव जैसी आपात स्थिति में 1906 पर सूचना दी जा सकती है। गैस की गंध आने पर माचिस, लाइटर या किसी भी लौ का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। बिजली के स्विच को चालू या बंद करने से भी बचना चाहिए। खिड़की-दरवाजे खोलकर गैस के बाहर निकलने का रास्ता बनाने के बाद सुरक्षित स्थान पर पहुंचकर सहायता लेनी चाहिए।
दुर्घटना के बाद गैस एजेंसी को मौखिक सूचना देने के साथ लिखित सूचना देना भी उपयोगी है, ताकि सूचना दिए जाने का रिकार्ड रहे। पुलिस रिकार्ड, चिकित्सकीय दस्तावेज, उपचार के बिल और दुर्घटना से जुड़े अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखने से क्लेम प्रक्रिया में मदद मिल सकती है। अंतिम रूप से क्लेम की पात्रता और राशि बीमा पालिसी की शर्तों तथा जांच के निष्कर्षों के आधार पर निर्धारित होगी।
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