
लाइफस्टाइल डेस्क। 2 अक्टूबर 2026 को देशभर में महात्मा गांधी की 157वीं जयंती यानी गांधी जयंती मनाई जाएगी। इस साल 2 अक्टूबर शुक्रवार को पड़ रहा है। गांधी जयंती के मौके पर देश में प्रार्थना सभाएं, श्रद्धांजलि कार्यक्रम और अलग-अलग तरह के स्मरण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
महात्मा गांधी को भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान और सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह और शांतिपूर्ण प्रतिरोध के विचारों के लिए याद किया जाता है। यही वजह है कि 2 अक्टूबर का महत्व भारत तक सीमित नहीं है। संयुक्त राष्ट्र भी इसी दिन International Day of Non-Violence मनाता है।
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। इसी वजह से हर साल 2 अक्टूबर को गांधी जयंती मनाई जाती है।
गांधी ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में अहिंसक प्रतिरोध, असहयोग और सविनय अवज्ञा को महत्वपूर्ण राजनीतिक माध्यम बनाया। उनके नेतृत्व में बड़े पैमाने पर लोगों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलनों में हिस्सा लिया। स्वतंत्रता के बाद भी 2 अक्टूबर को गांधी की जयंती के रूप में मनाया जाता रहा। यह दिन राष्ट्रीय स्मृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।
दिल्ली स्थित राजघाट महात्मा गांधी का प्रमुख स्मारक है। गांधी जयंती पर यहां श्रद्धांजलि और प्रार्थना सभा जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में भी गांधी के जीवन और विचारों पर कार्यक्रम होते हैं। स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में निबंध, भाषण, प्रार्थना सभा और अन्य गतिविधियों के जरिए गांधी के विचारों को याद किया जाता है।
गांधी की जयंती का अंतरराष्ट्रीय महत्व भी है। 15 जून 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने Resolution 61/271 को अपनाकर 2 अक्टूबर को International Day of Non-Violence घोषित किया था। इसका उद्देश्य शिक्षा और जन-जागरूकता के जरिए अहिंसा का संदेश फैलाना है।
संयुक्त राष्ट्र गांधी को अहिंसा के दर्शन और रणनीति के प्रमुख प्रवर्तकों में से एक के तौर पर याद करता है। UN के अनुसार उनके विचारों ने भारत के बाहर भी नागरिक अधिकारों और सामाजिक बदलाव से जुड़े अहिंसक आंदोलनों को प्रभावित किया।
गांधी के सार्वजनिक जीवन से कई विचार जुड़े हैं। इनमें प्रमुख हैं-
गांधी के लिए अहिंसा सिर्फ शारीरिक हिंसा से बचना नहीं थी, बल्कि अन्याय का विरोध करने के लिए शांतिपूर्ण तरीकों का इस्तेमाल भी उनके राजनीतिक दर्शन का हिस्सा था।
गांधी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे। दक्षिण अफ्रीका में उन्होंने भेदभावपूर्ण कानूनों के खिलाफ भारतीय समुदाय के साथ अहिंसक प्रतिरोध के प्रयोग किए थे।
भारत लौटने के बाद वह स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए। असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे बड़े आंदोलनों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।
1930 का दांडी मार्च गांधी के सबसे चर्चित आंदोलनों में से एक था। उन्होंने नमक पर ब्रिटिश कर और ब्रिटिश नमक कानून के विरोध में साबरमती आश्रम से दांडी तक मार्च किया। यह आंदोलन सविनय अवज्ञा का बड़ा उदाहरण बना और भारत के स्वतंत्रता संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में लाया।
1942 में कांग्रेस ने भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान किया। गांधी और कांग्रेस नेतृत्व ने ब्रिटिश शासन को समाप्त करने की मांग को बड़े जनआंदोलन का रूप दिया।
यह स्वतंत्रता आंदोलन के अंतिम बड़े जन अभियानों में शामिल था। इसके कुछ वर्षों बाद 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ।
भारत में गांधी जयंती 2026 के लिए किसी एक आधिकारिक राष्ट्रव्यापी थीम की पुष्टि उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिलती। इसलिए किसी अभियान या कार्यक्रम की थीम को पूरे देश की आधिकारिक गांधी जयंती थीम के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
हालांकि, संयुक्त राष्ट्र के International Day of Non-Violence 2026 के संदेश में संवाद, अहिंसा, सहानुभूति, गरिमा और साझा मानवता जैसे विचारों पर जोर दिया गया है। यह संदेश आज के संघर्ष और सामाजिक विभाजन के बीच शांतिपूर्ण संवाद और अहिंसक तरीकों के महत्व से गांधी के विचारों को जोड़ता है।
इसलिए 2026 में 2 अक्टूबर की अंतरराष्ट्रीय चर्चा का केंद्र अहिंसा, संवाद और सामाजिक विभाजन के बीच शांतिपूर्ण रास्ते जैसे विषयों के आसपास देखा जा सकता है।
गांधी जयंती भारत में सिर्फ एक स्वतंत्रता सेनानी की जयंती मनाने का अवसर नहीं है। यह दिन उस राजनीतिक पद्धति को भी याद करने का मौका है जिसमें बिना हथियार उठाए और बिना शारीरिक हिंसा के अन्याय का विरोध करने की कोशिश की गई।
30 जनवरी 1948 को गांधी की हत्या कर दी गई थी, लेकिन उनके राजनीतिक विचार और अहिंसक प्रतिरोध की अवधारणा भारत के साथ-साथ दुनिया के कई हिस्सों में आज भी अध्ययन का विषय हैं।
2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के साथ International Day of Non-Violence भी मनाया जाएगा। इस तरह यह तारीख गांधी के भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान और दुनिया में अहिंसा, संवाद और शांतिपूर्ण प्रतिरोध की बहस- दोनों को एक साथ जोड़ती है।