
हेल्थ डेस्क, नई दिल्ली। सोचिए, उम्र सिर्फ 22 साल हो और शादी की एक तस्वीर में अचानक आपको अपनी हेयरलाइन पहले से ज्यादा पीछे जाती हुई दिख जाए। यही चीज आज कई युवाओं को परेशान कर रही है।
भारत के शहरों में अब अडल्ट्स और टीन्स भी बाल झड़ने और हेयरलाइन पीछे जाने की शिकायत लेकर डॉक्टर्स के पास पहुंच रहे हैं। कभी जहां हेयर लॉस की समस्या आमतौर पर 30-40 की उम्र के पुरुषों में ज्यादा देखने को मिलती थी, अब मरीजों की उम्र कम होती नजर आ रही है। और इसकी वजह सिर्फ उम्र नहीं है।
डर्मेटोलॉजिस्ट के मुताबिक, पिछले करीब दो दशकों में हेयर लॉस की समस्या लेकर क्लिनिक पहुंचने वाले मरीजों की उम्र में बदलाव आया है। पहले आमतौर पर 30 से 40 साल के पुरुष तब डॉक्टर के पास आते थे, जब बाल काफी पतले हो चुके होते थे। अब बड़ी संख्या में युवा समस्या की शुरुआत में ही डॉक्टर से सलाह लेने पहुंच रहे हैं।
सेल्फी कैमरा और सोशल मीडिया भी इस बदलाव का एक हिस्सा हैं। लगातार अपनी तस्वीरें और वीडियो देखने की वजह से युवा हेयरलाइन में होने वाले छोटे बदलावों को भी पहले की तुलना में जल्दी नोटिस कर लेते हैं। लेकिन डॉक्टर्स के मुताबिक कहानी सिर्फ आईने और कैमरे की नहीं है।
पुरुषों में बाल झड़ने का एक बड़ा कारण Genetics है। अगर परिवार में पुरुषों को कम उम्र में बाल झड़ने की समस्या रही है, तो अगली पीढ़ी में भी इसका जोखिम बढ़ सकता है। लेकिन आधुनिक जीवनशैली भी समस्या को प्रभावित कर सकती है।
खराब खान-पान, नींद की कमी, लगातार तनाव और प्रदूषण शरीर पर असर डालते हैं और बालों की सेहत को भी प्रभावित कर सकते हैं। यानी जेनेटिक्स पहले से मौजूद जोखिम हो सकता है, लेकिन कुछ जीवनशैली से जुड़े कारक समस्या के दिखाई देने का समय बदल सकते हैं।
इस समस्या का पैमाना भी छोटा नहीं है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत के शहरी इलाकों में करीब 8.2 करोड़ लोग बाल झड़ने की समस्या से जूझ रहे हैं। लेकिन इनमें से ज्यादातर लोग डॉक्टर तक नहीं पहुंचते।
रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 5.9 करोड़ लोग घरेलू नुस्खे आजमाते हैं, जबकि लगभग 1.6 करोड़ लोग शैंपू या सीरम जैसे सामान्य हेयर-केयर प्रोडक्ट इस्तेमाल करते हैं। मेडिकेटेड प्रोडक्ट इस्तेमाल करने वालों की संख्या करीब 50 लाख और क्लिनिक पहुंचने वालों की संख्या लगभग 10 लाख बताई गई है। यानी करोड़ों लोग समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स से सलाह लेने वालों की संख्या बहुत कम है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सबसे जरूरी चीज है समस्या का सही कारण पता लगाना। हर व्यक्ति में बाल झड़ने की वजह एक जैसी नहीं होती। किसी में जेनेटिक्स कारण हो सकता है, तो किसी में दूसरी स्वास्थ्य या जीवनशैली से जुड़ी वजहें भूमिका निभा सकती हैं।
इसलिए इंटरनेट पर दिखने वाले किसी घरेलू नुस्खे या सोशल मीडिया ट्रेंड को देखकर खुद इलाज शुरू करने के बजाय जरूरत पड़ने पर त्वचा रोग स्पेशलिस्ट से सलाह लेना बेहतर माना जाता है।
आज की Gen Z के लिए हेयरलाइन सिर्फ उम्र बढ़ने का संकेत नहीं है। सेल्फी, वीडियो कॉल और सोशल मीडिया की लगातार मौजूदगी ने युवाओं को अपनी शक्ल-सूरत को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक कर दिया है। यही वजह है कि जिस उम्र में पहले गंजापन दूर की चिंता लगता था, उसी उम्र में अब कई युवा अपनी हेयरलाइन पर नजर रख रहे हैं।
22-23 की उम्र में बालों का झड़ना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि कोई व्यक्ति जल्द ही गंजा हो जाएगा। लेकिन कम उम्र में लगातार या तेजी से बाल झड़ रहे हों, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय वजह समझना जरूरी है।