
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। ‘भगवान ने मुझे तब वापस अपनी ओर खींचा, जब मैं पूरी तरह निराश था।’
‘भगवान ने मुझे ड्रग्स, शराब और पोर्न से दूर होने में मदद की।’
‘मेरे भीतर का गुस्सा खत्म हो गया।’
‘मुझे फिर से खुशी महसूस होने लगी।’
ये कुछ ऐसे अनुभव हैं, जो एक चर्च से जुड़े युवाओं ने अपनी लाइफ के बारे में शेयर किए हैं। एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, Gen Z युवाओं में धार्मिक विश्वास और आध्यात्मिकता को लेकर एक अलग तरह की दिलचस्पी देखी गई।
जहां एक तरफ Gen Z को अक्सर कम धार्मिक पीढ़ी के तौर पर देखा गया है, वहीं कुछ युवा समुदायों में चर्च, विश्वास और आध्यात्मिक अनुभवों की ओर दोबारा रुचि दिखाई दे रही है। लेकिन, इसकी वजह क्या है…यह समझना आसान नहीं। इसलिए इन 5 प्वॉइंट्स में समझेंगे कि Gen Z में स्पिरिचुअलिटी बढ़ने की क्या वजह है।
Gen Z की आध्यात्मिक खोज के पीछे सबसे बड़ी वजहों में अकेलापन और अपनापन पाने की इच्छा को बताया गया है।
कोरोना महामारी के दौरान स्कूल, कॉलेज, दोस्तों से दूरी ने युवाओं के सामाजिक जीवन को प्रभावित किया। हार्वर्ड के एक रिसर्च के मुताबिक, 18 से 25 साल के युवाओं में अकेलेपन की भावना काफी अधिक है। ऐसे में कई युवा केवल दोस्त नहीं, बल्कि ऐसा समुदाय चाहते हैं जहां उन्हें सुना और स्वीकार किया जाए। यही जरूरत उन्हें धार्मिक या आध्यात्मिक समुदायों की ओर भी आकर्षित कर सकती है।
Gen Z का बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया के दौर में बड़ा हुआ है। इंस्टाग्राम, टिकटॉक और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लोग अपनी जिंदगी का चुना हुआ और बेहतर दिखने वाला हिस्सा सामने रखते हैं।
हर समय खुद को बेहतर दिखाने, अपनी डिजिटल पहचान बनाने और दूसरों की प्रतिक्रिया पाने की कोशिश मानसिक रूप से थकाने वाली हो सकती है। युवाओं में ऐसे रिश्तों की चाह बढ़ रही है जहां उन्हें परफेक्ट दिखने की जरूरत न हो।
यानी ऑनलाइन मौजूदगी के बीच ऑफलाइन और वास्तविक रिश्तों की अहमियत भी उनके लिए बढ़ रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Gen Z की बढ़ती चिंता और मानसिक दबाव को भी आध्यात्मिक खोज से जोड़ा गया है। महामारी के दौरान दुनियाभर में चिंता और अवसाद की समस्या बढ़ी और युवाओं पर इसका असर खास तौर पर देखा गया।
ऐसे माहौल में कुछ युवा मानसिक शांति, उम्मीद और जीवन के किसी बड़े उद्देश्य की तलाश में आध्यात्मिकता की तरफ मुड़ सकते हैं। हालांकि, आध्यात्मिकता को मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज मानना उचित नहीं है। जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेना भी जरूरी है।
Gen Z पारंपरिक नेतृत्व और संस्थाओं को लेकर काफी सतर्क है। राजनीतिक नेताओं से लेकर सेलिब्रिटी, शिक्षकों और धार्मिक नेताओं तक से जुड़े विवादों और घोटालों ने युवाओं के भरोसे को प्रभावित किया है।
ऐसे में युवा उन लोगों से ज्यादा जुड़ाव महसूस कर सकते हैं जो अपनी कमजोरियों को छिपाने के बजाय उनके बारे में ईमानदारी से बात करते हैं। युवाओं को प्रभावशाली दिखने वाले नेताओं से ज्यादा विनम्र, पारदर्शी और भरोसेमंद लोगों की जरूरत महसूस हो रही है।
आज की युवा पीढ़ी के सामने एक और चुनौती है- बड़ी उम्र के लोगों से स्वाभाविक रूप से जुड़ने के मौके कम होना। Gen Z में मेंटरशिप की जरूरत है, लेकिन बहुत से युवाओं के पास ऐसे लोग नहीं हैं जिनसे वे जीवन, करियर या व्यक्तिगत समस्याओं पर खुलकर बात कर सकें।
धार्मिक संस्थाएं अगर युवाओं और बड़ी पीढ़ी के लोगों के बीच स्वस्थ रिश्ते और मेंटरशिप का माहौल बनाती हैं, तो ये संस्थाएं युवाओं के लिए दोबारा प्रासंगिक हो सकती हैं।
Gen Z को पूरी तरह धार्मिक या पूरी तरह गैर-धार्मिक पीढ़ी के रूप में देखना शायद तस्वीर को बहुत सरल बना देना होगा। इस पीढ़ी के भीतर विश्वास, धर्म, मानसिक शांति, समुदाय और जीवन के उद्देश्य को लेकर अलग-अलग तरह के अनुभव मौजूद हैं।
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