
आज की तेज रफ्तार जिंदगी, अनियमित दिनचर्या और बढ़ता मानसिक तनाव डायबिटीज को तेजी से बढ़ा रहा है। मधुमेह अब केवल उम्र से जुड़ी बीमारी नहीं रही, बल्कि युवा और कामकाजी वर्ग भी इसकी चपेट में है।
अनियंत्रित ब्लड शुगर न सिर्फ थकान और कमजोरी बढ़ाता है, बल्कि समय के साथ किडनी, आंखों, नसों और हृदय को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
अच्छी बात यह है कि सही खान-पान और अनुशासित जीवनशैली से शुगर लेवल को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। शुगर नियंत्रण का पहला आधार संतुलित आहार है।
भोजन में अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट और मीठे पदार्थ शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं। इसलिए सफेद चावल, मैदा और मिठाइयों से दूरी बनाना जरूरी है। इसके स्थान पर हरी पत्तेदार सब्जियां, सलाद, दालें, मोटे अनाज और चोकर युक्त आटे को अपनाएं।
फाइबर युक्त भोजन शुगर को धीरे-धीरे बढ़ने देता है और लंबे समय तक पेट भरा रखता है। करेले का रस, जामुन, मेथी दाना और दालचीनी जैसे प्राकृतिक विकल्प भी शुगर नियंत्रण में सहायक माने जाते हैं। एक साथ अधिक खाने के बजाय दिन में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन करना बेहतर रहता है।
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू नियमित शारीरिक गतिविधि है। रोजाना 30 से 45 मिनट की तेज चाल से पैदल चलना इंसुलिन की कार्यक्षमता बढ़ाता है और शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद करता है। योग और प्राणायाम न सिर्फ शरीर को सक्रिय रखते हैं, बल्कि तनाव को भी कम करते हैं, जो डायबिटीज बढ़ने का बड़ा कारण है।
पर्याप्त नींद और पानी का सेवन भी उतना ही जरूरी है। रोज सात से आठ घंटे की नींद हार्मोन संतुलन बनाए रखती है। वहीं, शरीर में पानी की कमी होने पर रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ सकती है, इसलिए दिनभर पर्याप्त पानी पीते रहें। डायबिटीज को डर से नहीं, बल्कि अनुशासन से नियंत्रित किया जा सकता है।
नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करना बेहद जरूरी है। बिना डाक्टर की सलाह दवाएं बंद करना खतरनाक हो सकता है। मीठे और प्रोसेस्ड फूड से परहेज करें और सक्रिय जीवनशैली अपनाएं। यदि बार-बार प्यास लगना, पेशाब आना या घाव भरने में देर जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें।
अमित गुप्ता, वरिष्ठ चिकित्सक एवं डायबिटीज विशेषज्ञ