साइलेंट किलर हैं BP और डायबिटीज: लक्षण न दिखने पर भी क्यों कराएं जांच? जानिए एक्सपर्ट्स की चेतावनी
हाई ब्लड प्रेशर (बीपी) और डायबिटीज (शुगर) की शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, जिसके कारण जांच में देरी हो जाती है। लंबे समय तक इन्हें अनियंत्रि...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 21 Oct 2026 05:39:51 PM (IST)Updated Date: Wed, 21 Oct 2026 05:39:50 PM (IST)
लक्षण न दिखने पर भी कराएं नियमित बीपी और शुगर की जांच हेल्थ डेस्क। हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियां शुरुआती दौर में शरीर में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे पनपती हैं, जिसके कारण अधिकांश मरीज समय पर जांच कराने से चूक जाते हैं। खोखोपारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. शुभ्रत सिंह ठाकुर ने स्वास्थ्य परामर्श जारी करते हुए बताया कि पूरी तरह स्वस्थ महसूस करने के बावजूद समय-समय पर बीपी और शुगर की जांच कराना हर व्यक्ति के लिए बेहद जरूरी है।
डॉ. ठाकुर के अनुसार, लंबे समय तक बीपी और शुगर का स्तर अनियंत्रित रहने से हार्ट (Heart), किडनी, आंखों की रोशनी और नर्वस सिस्टम (Nerves) को गंभीर और स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।
बीपी और शुगर नियंत्रण हेतु प्रमुख चिकित्सकीय और जीवनशैली परामर्श
1. खान-पान और संतुलित आहार
- नमक और शक्कर पर नियंत्रण: अपने दैनिक भोजन में नमक और अत्यधिक मीठी चीजों की मात्रा को तुरंत सीमित करें।
- पोषक तत्वों का समावेश: आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और ताजा मौसमी फल पर्याप्त मात्रा में शामिल करें।
2. शारीरिक सक्रियता और व्यायाम
अपनी शारीरिक क्षमता और उम्र के अनुसार प्रतिदिन नियमित रूप से पैदल चलें (Brisk Walk) या हल्का व्यायाम करें। वजन नियंत्रित रखना और शारीरिक रूप से सक्रिय रहना इन बीमारियों को दूर रखने में सहायक है।
3. दवाइयों के सेवन से जुड़ी सावधानी
- बिना सलाह दवा बंद न करें: बीपी या शुगर के मरीज कभी भी डॉक्टर की सलाह के बिना दवा खाना बंद न करें।
- रीडिंग सामान्य आने का भ्रम: कई बार नियमित जांच में रीडिंग सामान्य आने पर मरीज समझ लेते हैं कि बीमारी पूरी तरह ठीक हो गई है, जबकि यह सामान्य रीडिंग दवा के नियमित सेवन के कारण ही संभव हो पाती है।
खुराक में बदलाव: दवा की डोज (मात्रा) में किसी भी प्रकार का बदलाव केवल और केवल डॉक्टर की सलाह से ही किया जाना चाहिए। किन्हें है नियमित जांच की ज्यादा जरूरत?
- यदि आपके परिवार में हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज का पारिवारिक इतिहास (Genetic History) रहा हो।
- यदि आपका वजन सामान्य से अधिक (Overweight) है।
- यदि आपकी जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि (Physical Activity) बहुत कम है।
डॉ. शुभ्रत सिंह ठाकुर ने जोर देकर कहा कि समय रहते बीमारी की पहचान, नियमित निगरानी और संतुलित जीवनशैली से इन बीमारियों के कारण होने वाली जानलेवा और गंभीर जटिलताओं के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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