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घर-घर बुखार, पहचानना मुश्किल वायरल है या डेंगू, पैरासीटामोल से भी नहीं हो रहा कंट्रोल

करीब 80 प्रतिशत मरीज वायरल संक्रमण से पीड़ित हैं, लेकिन इसके साथ डेंगू, चिकनगुनिया और स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने से चिंता बढ़ गई है।

By Anoop BhargavEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Tue, 15 Sep 2026 11:58:48 AM (IST)Updated Date: Tue, 15 Sep 2026 12:07:00 PM (IST)
घर-घर बुखार, पहचानना मुश्किल वायरल है या डेंगू, पैरासीटामोल से भी नहीं हो रहा कंट्रोल
इन दिनों फैल रहा है वायरल बुखार।

HighLights

  1. पैरासीटामोल से बुखार नहीं हो रहा कम।
  2. 80 प्रतिशत मरीज वायरल संक्रमण के हैं।
  3. डेंगू के 90 और स्वाइन फ्लू के तीन केस।

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर में इन दिनों बुखार ने घर-घर दस्तक दे दी है, लेकिन सबसे बड़ी मुश्किल बुखार नहीं बल्कि उसकी पहचान है। तेज बुखार, सर्दी-जुकाम, खांसी, बदन और जोड़ों में दर्द, सिरदर्द और कमजोरी यही लक्षण वायरल संक्रमण से लेकर डेंगू और स्वाइन फ्लू तक में दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में मरीजों के लिए शुरुआत में यह समझना मुश्किल हो रहा है कि आखिर उन्हें कौन सी बीमारी ने जकड़ा है।

स्थिति यह है कि जया आरोग्य अस्पताल (जेएएच), जिला अस्पताल मुरार, सिविल अस्पताल और निजी अस्पतालों की ओपीडी में बुखार के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

चिकित्सकों के अनुसार करीब 80 प्रतिशत मरीज वायरल संक्रमण से पीड़ित हैं, लेकिन इसके साथ डेंगू, चिकनगुनिया और स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने से चिंता बढ़ गई है।

अब तक जिले में डेंगू के 90 मामले, चिकनगुनिया के छह और स्वाइन फ्लू के छह मामले सामने आ चुके हैं। स्वाइन फ्लू के संक्रमितों में तीन मरीज ग्वालियर के हैं।

यानी एक तरफ वायरल संक्रमण तेजी से फैल रहा है, तो दूसरी ओर मच्छरजनित और सांस के जरिए फैलने वाली बीमारियां भी सक्रिय हैं।

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वायरल का बदला मिजाज: बुखार के साथ निमोनिया, गिर रहे प्लेटलेट्स, पैरासीटामोल से भी नहीं उतर रहा बुखार

बुखार उतरा नहीं तो बढ़ रही परेशानी

  • इस बार वायरल संक्रमण का स्वरूप भी मरीजों को ज्यादा परेशान कर रहा है।
  • कई मरीजों का कहना है कि पैरासीटामोल लेने के बाद भी बुखार जल्दी नियंत्रित नहीं हो रहा।
  • बुखार के साथ कमजोरी और बदन दर्द कई दिनों तक बना हुआ है।
  • कुछ मरीजों को हालत बिगड़ने पर अस्पताल के वार्ड और आइसीयू तक में भर्ती करना पड़ रहा है।
  • कई मरीजों के एक्स-रे में निमोनिया के लक्षण मिल रहे हैं और सांस लेने में परेशानी भी सामने आ रही है।
  • कुछ मरीजों की जांच में विडाल और टाइफाइड टेस्ट भी पाजिटिव मिले हैं।
  • इससे साफ है कि इस समय बुखार के पीछे केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि कई संक्रमण सक्रिय हैं।

डेंगू निगेटिव, फिर भी घट रहे प्लेटलेट्स

बुखार के मरीजों में एक और स्थिति चिकित्सकों की चिंता बढ़ा रही है। कई मरीजों की डेंगू जांच निगेटिव आने के बावजूद प्लेटलेट्स कम हो रहे हैं। तेज बुखार और कमजोरी के साथ प्लेटलेट्स में गिरावट होने पर मरीज और परिजन डेंगू की आशंका से घबरा रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी तय नहीं की जा सकती, इसलिए जरूरत पड़ने पर जांच कराना जरूरी है।


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ये लक्षण हों तो इंतजार न करें

तेज या लगातार बुखार, सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी, पसलियों में दर्द, तेज सिरदर्द, उल्टी, भूख कम लगना और अत्यधिक कमजोरी होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

बच्चों में भी लंबा खिंच रहा वायरल

वायरल संक्रमण का असर बच्चों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। शिशु रोग विभाग में वायरल से पीड़ित बच्चे भर्ती हैं और गंभीर बच्चों के लिए बेड भी भरे हुए हैं। शिशु रोग विशेषज्ञ विनीत चतुर्वेदी के अनुसार सामान्य तौर पर बच्चों का वायरल बुखार तीन दिन के आसपास नियंत्रित हो जाता है, लेकिन इस समय कई बच्चों को ठीक होने में पांच दिन या उससे अधिक समय लग रहा है।

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एक्सपर्ट व्यू: खुद से एंटीबायोटिक लेना खतरनाक

वर्षा और मौसम में बदलाव के दौरान इन्फ्लूएंजा व पैराइन्फ्लूएंजा जैसे वायरस तेजी से फैलते हैं। इस बार सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार के साथ उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायतें भी बढ़ी हैं। कुछ मरीजों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर संक्रमण फेफड़ों तक पहुंच सकता है। उन्होंने बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं लेने से बचने की सलाह दी है।

अजय पाल सिंह, मेडिसिन विशेषज्ञ, जेएएच

बचाव जरुरी

लोगों से घरों में कूलर, टंकियों और गमलों में पानी जमा नहीं होने देने की अपील की जा रही है। उनको बताया जा रहा है कि मच्छरों से बचाव करें और बुखार होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सक की सलाह से जांच व उपचार कराएं।

विनोद कुमार दौनेरिया, जिला मलेरिया अधिकारी