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दूध की प्योरिटी का पता कैसे लगाए? FSSAI के इन 3 घरेलू तरीकों से मिनटों में करें दूध में मिलावट की पहचान!

दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाले दूध की शुद्धता को लेकर चिंतित लोगों के लिए FSSAI ने कुछ आसान घरेलू तरीके बताए हैं। ढलानदार सतह पर दूध की बूंद गिराकर...और पढ़ें

By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Sun, 20 Sep 2026 01:18:22 PM (IST)Updated Date: Sun, 20 Sep 2026 01:18:22 PM (IST)
दूध की प्योरिटी का पता कैसे लगाए? FSSAI के इन 3 घरेलू तरीकों से मिनटों में करें दूध में मिलावट की पहचान!
दूध में पानी, डिटर्जेंट और स्टार्च की मिलावट जांचने के लिए FSSAI के बताए आसान घरेलू तरीके। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. दूध में पानी, डिटर्जेंट और स्टार्च जैसी मिलावट का शुरुआती अंदाजा लगाने के तरीके
  2. ढलान पर दूध बहाकर पानी, पानी मिलाकर हिलाने पर डिटर्जेंट का पता लगता है
  3. दूध की 100% माइक्रोबायोलॉजिकल सुरक्षा की पुष्टि के लिए लैब टेस्ट ही भरोसेमंद

हेल्थ डेस्क, नई दिल्ली। सुबह की चाय हो या बच्चों का दूध, ज्यादातर घरों में दूध रोजाना इस्तेमाल होता है। ऐसे में दूध की शुद्धता को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है। बाजार में मिलने वाले दूध में पानी, स्टार्च, डिटर्जेंट और दूसरे पदार्थों की मिलावट से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं।

FSSAI ने कुछ ऐसे शुरुआती टेस्ट बताए हैं, जिनसे घर पर दूध में कुछ तरह की मिलावट का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि, ये टेस्ट दूध को पूरी तरह शुद्ध या सुरक्षित साबित नहीं करते। किसी भी संदेह की पुष्टि के लिए लैब टेस्ट सबसे भरोसेमंद तरीका है।


दूध में पानी मिला है या नहीं, ऐसे लगाएं अंदाजा

  • इसके लिए एक साफ, चमकदार और थोड़ी ढलान वाली सतह लें। उस पर दूध की एक बूंद डालें।
  • अगर दूध धीरे-धीरे नीचे की ओर बहे और पीछे सफेद निशान छोड़ता जाए, तो यह अधिक मात्रा में पानी न होने का संकेत माना जाता है।
  • अगर दूध बहुत तेजी से बह जाए और पीछे सफेद निशान न छोड़े, तो पानी की मिलावट का संदेह हो सकता है।

हालांकि, इस तरीके से दूध की पूरी गुणवत्ता या शुद्धता तय नहीं की जा सकती। इसे केवल प्रारंभिक screening test के तौर पर देखें।

डिटर्जेंट की मिलावट का कैसे पता लगाएं?

FSSAI के बताए घरेलू परीक्षण में करीब 5-10 मिलीलीटर दूध लेकर उसमें लगभग इतनी ही मात्रा में पानी मिलाकर अच्छी तरह हिलाया जाता है।

अगर दूध में बहुत ज्यादा और घना झाग बनने लगे, तो डिटर्जेंट की मिलावट का संदेह हो सकता है। सामान्य दूध को हिलाने पर भी कुछ झाग बन सकता है, लेकिन वह आमतौर पर पतली होती है।

सिर्फ झाग देखकर मिलावट की पुष्टि नहीं की जा सकती। संदेह होने पर नमूने की लैब में जांच कराना बेहतर है।

दूध में स्टार्च की मिलावट कैसे पहचानें?

स्टार्च की जांच के लिए FSSAI के Eat Right Handbook में आयोडीन टेस्ट का उल्लेख किया गया है। दूध के नमूने में आयोडीन डालने पर अगर उसका रंग नीला हो जाता है, तो यह स्टार्च की मौजूदगी का संकेत माना जाता है। लेकिन यहां सावधानी बेहद जरूरी है। आयोडीन एक रसायन है, इसलिए इसे बच्चों से दूर रखें। जिस दूध पर यह टेस्ट किया गया है, उसे पीना नहीं चाहिए।

यूरिया की जांच घर पर न करें

दूध में यूरिया की जांच के लिए FSSAI की वैज्ञानिक परीक्षण विधियां मौजूद हैं। इनके तहत कुछ रासायनिक संकेतों के आधार पर added urea की संभावना देखी जाती है और संदिग्ध नमूने को आगे quantitative method से confirm किया जाता है।

इसलिए घर पर खुद रसायनों का इस्तेमाल करके यूरिया की जांच करना उचित नहीं है। यूरिया जैसी मिलावट की पुष्टि के लिए लैब टेस्ट कराना सुरक्षित और बेहतर विकल्प है।

दूध में किन चीजों की मिलावट हो सकती है?

FSSAI की testing methods में दूध में पानी, स्टार्च, यूरिया, डिटर्जेंट और दूसरे पदार्थों से जुड़ी मिलावट की जांच के तरीके दिए गए हैं। FSSAI के अनुसार synthetic milk में यूरिया, laundry detergent, pulverized soap, boric acid, hydrogen peroxide, starch और कुछ neutralizers जैसे पदार्थ पाए जाने की जांच की जाती है।

मिलावटी दूध पीने से क्या हो सकता है?

मिलावट से होने वाला नुकसान इस बात पर निर्भर करता है कि दूध में कौन सा पदार्थ और कितनी मात्रा में मौजूद है। डिटर्जेंट और साबुन खाने-पीने के लिए बनाए नहीं जाते। इन्हें शरीर में जाने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी तरह अनुचित रसायनों की मौजूदगी से पाचन संबंधी परेशानी और दूसरे विषाक्त प्रभाव हो सकते हैं।

इसके अलावा दूध अगर बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या हानिकारक रसायनों से दूषित है, तो वह खाद्य जनित बीमारी का कारण बन सकता है। WHO के मुताबिक असुरक्षित भोजन 200 से ज्यादा तरह की बीमारियों से जुड़ा हो सकता है।

बच्चों, बुजुर्गों और पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले लोगों के मामले में food safety पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

सिर्फ घरेलू टेस्ट से दूध को शुद्ध न मानें

दूध की गुणवत्ता केवल इस बात से तय नहीं होती कि उसमें कोई मिलावट है या नहीं। फैट, SNF, माइक्रोबायोलॉजिकल सेफ्टी और दूसरे गुणवत्ता मानक भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए घर पर किए गए टेस्ट को केवल शुरुआती संकेत समझें। अगर किसी दूध की गुणवत्ता पर लगातार संदेह है, तो उसका नमूना अधिकृत/नोटिफाइड फूड लैब में जांच के लिए दिया जा सकता है।

वायरल दावों पर भी न करें आंख मूंदकर भरोसा

सोशल मीडिया पर दूध की मिलावट और उससे होने वाली बीमारियों को लेकर कई डरावने दावे वायरल होते रहते हैं। ऐसे दावों को बिना जांचे आगे बढ़ाने से बचें। उदाहरण के लिए, अगस्त 2026 में WHO ने भारत में दूध की मिलावट से 2035 तक 87 प्रतिशत लोगों को कैंसर होने की कथित WHO advisory को फर्जी बताया था।

इसलिए किसी भी वायरल हेल्थ दावे को शेयर करने से पहले WHO, FSSAI या संबंधित आधिकारिक संस्था की वेबसाइट पर उसकी पुष्टि करना जरूरी है।

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