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रिश्ते में शक करना सिखा रही इंस्टाग्राम रील्स! लोग हुए सोचने पर मजबूर, लेकिन हर बहस को 'रेड फ्लैग' बताना कितना सही?

आजकल इंस्टाग्राम पर रिश्तों को लेकर बनने वाली कुछ सेकंड्स की रील्स में हर बहस या गलती को 'रेड फ्लैग', 'टॉक्सिक' या 'गैसलाइटिंग' बता दिया जाता है, जिसस...और पढ़ें

By Akriti kumariEdited By: Akriti kumari
Publish Date: Thu, 24 Sep 2026 01:47:44 PM (IST)Updated Date: Thu, 24 Sep 2026 02:15:02 PM (IST)
रिश्ते में शक करना सिखा रही इंस्टाग्राम रील्स! लोग हुए सोचने पर मजबूर, लेकिन हर बहस को 'रेड फ्लैग' बताना कितना सही?
इंस्टाग्राम रील्स आज कल रिलेशनशिप और लोगों के बिहेवियर को इफेक्ट कर रहे हैं। (एआई जनरेटेड)

HighLights

  1. इंस्टाग्राम रील्स ने रिश्तों में शक पैदा कर दिया है
  2. रील्स लोगों के बिहेवियर को इफेक्ट कर रहे हैं
  3. समझने के लिए व्यवहार के पैटर्न को देखना जरूरी है

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। इंस्टाग्राम खोलते ही रिश्तों को लेकर तरह-तरह की सलाह वाली रील्स सामने आ जाती हैं। कहीं किसी व्यवहार को ‘रेड फ्लैग’ बताया जाता है तो कहीं पार्टनर को ‘टॉक्सिक’, ‘नार्सिसिस्ट’ या ‘गैसलाइटर’ कहने के संकेत गिनाए जाते हैं। कुछ सेकंड की इन रील्स को देखने के बाद कई लोग अपने ही रिश्ते को उसी नजरिए से देखने लगते हैं। वह सोचने लगते हैं कि कहीं उनका पार्टनर भी टॉक्सिक तो नहीं।

लेकिन क्या हर बहस, हर असहमति या पार्टनर की हर गलती वास्तव में ‘रेड फ्लैग’ होती है? स्पेशलिस्ट के मुताबिक सोशल मीडिया पर दिखाए जाने वाले इन लेबल्स को रिश्ते की पूरी सच्चाई मान लेना सही नहीं है। किसी व्यवहार को समझने के लिए उसका कॉन्टेक्स्ट, बार-बार होने का पैटर्न और रिश्ते पर उसका असर देखना ज्यादा जरूरी है।


इंस्टाग्राम ने रिश्तों को समझने की भाषा दी, लेकिन…

काउंसलर्स के मुताबिक इंस्टाग्राम ने रिश्तों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कई जरूरी बातों को आम बातचीत का हिस्सा बनाया है। सोशल मीडिया की वजह से लोगों को बाउंड्री सेट करना, इमोशनल एब्यूज, नुकसान पहुंचाने वाले व्यवहार और रिश्तों के खराब पैटर्न को पहचानने में मदद मिली है। पहले जिन व्यवहारों को लोग सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते थे, उनके बारे में अब लोग सवाल पूछने लगे हैं।

लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब कुछ सेकंड की रील में एक आसान लेबल या ‘गोल्डन रूल’ में बदल दिया जाता है। यानी इंस्टाग्राम आपको किसी व्यवहार का नाम तो बता सकता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वह आपके रिश्ते का पूरा संदर्भ भी समझा सके।

हर असहमति को ‘रेड फ्लैग’ मानना क्यों सही नहीं?

रिश्ते में दो लोगों के विचार अलग हो सकते हैं। बहस, नाराजगी या किसी बात पर असहमति होना अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि रिश्ता टॉक्सिक है। कई थेरेपिस्ट के मुताबिक- किसी एक घटना के बजाय यह देखना ज्यादा महत्वपूर्ण है कि व्यवहार का पैटर्न कैसा है, वह कितनी बार दोहराया जाता है, उससे सामने वाले पर क्या असर पड़ता है और गलती होने के बाद व्यक्ति क्या करता है।

उदाहरण के लिए, किसी बहस में पार्टनर का गुस्सा हो जाना और बाद में अपनी गलती समझकर बात करना एक अलग स्थिति है। वहीं अगर कोई व्यक्ति बार-बार अपमान करता है, आपकी भावनाओं को लगातार नजरअंदाज करता है, नुकसान पहुंचाने वाले व्यवहार को सही ठहराता है और सुधार की कोशिश भी नहीं करता, तो इसे केवल ‘एक छोटी बहस’ कहकर नजरअंदाज करना भी सही नहीं होगा।

‘टॉक्सिक’, ‘गैसलाइटिंग’ और ‘नार्सिसिस्ट’ शब्दों से बचकर समझें पूरा कनेक्शन

सोशल मीडिया पर ‘टॉक्सिक’, ‘गैसलाइटिंग’ और ‘नार्सिसिस्ट’ जैसे शब्द बहुत तेजी से इस्तेमाल किए जाते हैं। लेकिन किसी व्यक्ति को सिर्फ एक व्यवहार देखकर इनमें से कोई लेबल दे देना सही तरीका नहीं है।

स्पेशलिस्ट कहते हैं- इंस्टाग्राम चीजों को अक्सर ब्लैक एंड व्हाइट तरीके से पेश करता है। यानी किसी व्यवहार को या तो सही माना जाता है या गलत। इससे लोगों में भी रिश्तों को लेकर बाइनरी सोच विकसित हो सकती है और वे जल्द निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं। वास्तविक थेरेपी में तस्वीर इससे कहीं ज्यादा जटिल होती है।

थेरेपी में सिर्फ ‘क्या हुआ’ नहीं, ‘क्यों और कितनी बार हुआ’ भी देखा जाता

थेरेपी के दौरान किसी एक घटना के आधार पर व्यक्ति या रिश्ते को जज नहीं किया जाता। व्यवहार का संदर्भ, उसकी नियमितता, उसका पैटर्न और उसका परिणाम देखा जाता है।

मसलन, सवाल सिर्फ यह नहीं होता कि ‘क्या पार्टनर ने गलत व्यवहार किया?’ बल्कि यह भी देखा जाता है-

  • क्या ऐसा व्यवहार लगातार दोहराया जा रहा है?
  • क्या इसका रिश्ते पर नकारात्मक असर पड़ रहा है?
  • क्या सामने वाला समझता है कि उसके व्यवहार से आपको नुकसान हुआ?
  • गलती के बाद क्या वह जिम्मेदारी लेता है?
  • क्या वह नुकसान की भरपाई या सुधार की कोशिश करता है?
  • क्या रिश्ते में दोनों लोगों को सम्मान और भावनात्मक सुरक्षा मिल रही है?

यही वजह है कि कुछ सेकंड की सोशल मीडिया क्लिप किसी व्यक्ति या पूरे रिश्ते की मनोवैज्ञानिक तस्वीर नहीं बता सकती।

रिश्ते को समझने के लिए इन 4 चीजों पर दें ध्यान

अगर कोई इंस्टाग्राम रील देखने के बाद आपको अपने रिश्ते पर शक होने लगे तो तुरंत कोई लेबल लगाने के बजाय कुछ चीजों पर ध्यान दें।

  • पैटर्न: क्या यह सिर्फ एक बार हुआ या लगातार हो रहा है?
  • कॉन्टेक्स्ट: घटना से पहले क्या हुआ था और दोनों की स्थिति क्या थी?
  • असर: उस व्यवहार का आपकी भावनाओं और रिश्ते पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
  • रिपेयर: विवाद के बाद क्या दोनों बात करके समस्या सुलझाने और रिश्ते को बेहतर करने की कोशिश करते हैं?