रामनाथ मुटकुळे, नईदुनिया, इंदौर : इंदौर में कैनेडियन मिशन द्वारा संस्थापित एवं संचालित क्रिश्चियन कॉलेज में पहला स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 1947 को धूमधाम से मनाया गया था। संस्था के प्राचार्य डा. ए.ए. स्कॉट ने तिरंगा फहराया था और सुप्रसिद्ध गायक किशोर कुमार ने देर रात तक कॉलेज में अपने गीतों से समां बांध दिया था।
आजादी का जश्न और उल्लास कॉलेज के छात्रों में चरम पर था, जिसके बीच उन्हें समय का पता ही नहीं चला।
कॉलेज के प्राचार्य डा. ए.ए. स्कॉट एक ईसाई, कॉलेज की गवर्निंग बॉडी में क्रिश्चियन सदस्यों की भरमार, कॉलेज को अनुदान देने वाली संस्था विदेशी (कैनेडियन मिशन), कॉलेज का बुलेटिन (वार्षिक पत्रिका) का छात्र संपादक एक मुस्लिम (नियामत अली खान नौशा) और पी.डी. ठक्कर, पी.सी. गर्ग, बी.बी. नाईक, मिस एस. जैन, ए.जे.के. लोहानी और एहसान अली खान, इन सबके सामंजस्य और योगदान से बना कॉलेज में एक राष्ट्रीय वातावरण और ऐसा वातावरण 80 वर्ष पूर्व तब बना जब भारतीय भूमि से मुस्लिम अपने वतन अर्थात् नवनिर्मित पाकिस्तान जा रहे थे और पाकिस्तान से पलायन कर हिंदू भारत आ रहे थे। शरणार्थी और सांप्रदायिक समस्या और अधिक गहराती जा रही थी।
ऐसे में जब भारत को स्वाधीनता मिले अभी चंद माह ही गुजरे थे, तब प्रकाशन हुआ इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज की इस वार्षिक पत्रिका का (मार्च 1948) और इस पत्रिका में उल्लेख मिलता है कि भारत के युवाओं ने कैसे मनाया था अपनी स्वाधीनता का ‘पहला दिन’।
क्रिश्चियन कॉलेज की वार्षिक पत्रिका का मुख पृष्ठ और रामजी वर्मा द्वारा बनाया गया भारत माता का चित्र, जिसे पत्रिका में प्रकाशित किया गया था। (सौजन्य)
कॉलेज की वार्षिक पत्रिका के संपादकीय में लिखा था- अनगिनत दिन और रातें हम भारतीयों ने परतंत्रता और गुलामी में गुजारी और तब 15 अगस्त 1947 को हमें देश की स्वाधीनता और स्वतंत्रता का आभास हुआ। देश के आजाद होने की सूचना मिलते ही कॉलेज के छात्र-छात्राओं में खुशी की लहर दौड़ गई।
किस अनूठे तरीके से स्वाधीनता का यह पर्व मनाया जाए
कॉलेज में शुरू हुई स्वाधीनता उत्सव मनाने की चहल-पहल। विद्यार्थियों को इस तरह जश्न मनाने का कोई अनुभव तो था नहीं, वे समझ नहीं पा रहे थे कि किस अनूठे तरीके से स्वाधीनता का यह पर्व मनाया जाए, फिर भी निर्णय तो ले ही लिया गया कि इसे कुछ इस तरह मनाया जाए कि आने वाली कई पीढ़ियों के लिए यह मिसाल बने। इंदौर के रामजी वर्मा ने इस पत्रिका के लिए भारत माता का स्कैच बनाया था। रामजी वर्मा उन दिनों सुप्रसिद्ध गायक किशोर कुमार के अच्छे मित्र थे। बाद में वे मल्हार आश्रम में फाइन आर्ट के शिक्षक रहे।
छह दिन पूर्व ही स्वाधीनता की सूचना मिली थी
छह दिन पूर्व ही कॉलेज के विद्यार्थियों को स्वाधीनता की सूचना मिली थी और उत्सव की तैयारियों को संजोने के लिए हमारे पास वक्त अत्यंत ही कम था। उत्सव मनाने के लिए किसी भी प्रकार की समिति का गठन करना भी संभव नहीं था, इसलिए छात्र एहसान अली ने स्वयं को स्वाधीनता दिवस समारोह समिति का संयोजक घोषित कर अन्य छात्र समितियों के पदाधिकारियों को सदस्य के रूप में मनोनीत कर उन्हें समिति का अध्यक्ष चुन लिया गया।
समिति के पास काम अधिक था और समय था कम। मुख्य समिति में से ही चार उप समितियां ताबड़तोड़ बना दी गईं। वित्त समिति प्रमुख एहसान अली खान, मनोरंजन समिति कल्याण कुमार गांगुली (सिने अभिनेता अनूप कुमार), स्वल्पाहार समिति बुचारा एवं महिला समिति प्रमुख कु. के. देसाई बनाई गईं। उत्सव मनाने के लिए कॉलेज के प्रत्येक विद्यार्थी ने स्वयं तो आर्थिक सहयोग किया ही और राशि संग्रह करने में भी उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। ‘तिरंगा ध्वज’ प्रतीक के रूप में देकर धन संग्रहण किया गया। कक्षा प्रतिनिधि तिरंगा वितरण का कार्य कर रहे थे और पूरे कॉलेज परिसर में तिरंगा लहरा रहा था। मात्र पांच दिनों में कॉलेज के विद्यार्थियों ने 400 रु. से अधिक धनराशि एकत्रित कर ली।
डॉ. सुरेंद्र कवठेकर (क्रिश्चियन कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रोफेसर) बताते हैं कि आखिर वह दिन, अर्थात् 15 अगस्त 1947 आ ही गया, जिसका बड़ा ही बेसब्री से कॉलेज परिवार इंतजार कर रहा था। 14 अगस्त को रात ठीक बारह बजे कॉलेज की विशाल घंटी गूंज उठी और प्रारंभ हुआ स्वाधीनता का जश्न। कॉलेज के पूरे भवन पर तिरंगे लहरा ही रहे थे और भवन आकर्षक विद्युत सज्जा से जगमगा रहा था। रात आंखों में कट गई। 15 अगस्त 1947 को प्रात: 8 बजे प्राचार्य डा. ए.ए. स्कॉट ने प्रांगण में तिरंगे का आरोहण किया। इस अवसर पर कॉलेज प्रांगण में सभी छात्र-छात्राएं, प्राध्यापकगण एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कॉलेज के ब्रांसन हॉल में प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों ने ‘स्वाधीनता दिवस’ पर अपने-अपने विचार रखे। इसके पश्चात् कॉलेज में मैदान पर शाम चार बजे तक स्वाधीनता की खुशी में खेलकूद स्पर्धाएं आयोजित की गईं। इस आयोजन का दायित्व निभाया डॉ. आर. मोजेस ने। शाम 6 बजे स्वल्पाहार का आयोजन हुआ। शाम 7 बजे से बी.ए. द्वितीय वर्ष के छात्र, किशोर कुमार गांगुली (प्रसिद्ध पार्श्व गायक एवं अभिनेता) और उनके साथियों ने मिलकर देशभक्ति, स्वाधीनता एवं क्रांतिकारी गीतों का ऐसा समां बांधा कि वक्त का कुछ पता ही नहीं चला। ब्रांसन हॉल के स्टेज पर मीरा मुखर्जी एवं कु. पाडगांवकर की नृत्य प्रस्तुतियों ने स्वाधीनता के इस उत्सव को चरम पर पहुंचाकर और अविस्मरणीय बना दिया। सुप्रसिद्ध फिल्मी गायक किशोर कुमार गांगुली और साथियों की यह मनोरंजक प्रस्तुति देर रात तक बिना रुके चलती रही।