डायबिटीज मरीजों के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी, न्यूट्रिशन थाली में क्या शामिल करें?
केवल दवाओं से डायबिटीज को कंट्रोल नहीं किया जा सकता। इसके लिए मेडिकल न्यूट्रिशन थाली, फिट प्रोटोकाल, टारगेटेड वेट लाॅस और प्राचीन योग पद्धति को अपनाकर स्वस्थ जीवनशैली से इन सभी बीमारियों को आने से रोका जा सकता है।
Publish Date: Mon, 26 Oct 2026 04:47:43 PM (IST)Updated Date: Mon, 26 Oct 2026 05:37:31 PM (IST)
न्यूट्रिशन थालीHighLights
- राज्य कांफ्रेंस में अंकित सेठ बोले।
- परहेज और पालन दोनों जरूरी।
- नहीं तो दवाएं भी होंगी बेअसर।
जबलपुर। डायबिटीज के मरीज को अपनी जीवनशैली में बदलाव करना ही चाहिए, नहीं तो वह अपनी शुगर को नियंत्रित नहीं कर पाएगा और सारी दवाइयां, इंसुलिन आदि के अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेंगे। आगे चलकर उसे बड़ी बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। यह बात डाॅ. अंकित सेठ ने कही।
डा. सेठ ने हाल ही में सागर में आयोजित 68वीं राज्य स्तरीय इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) कांफ्रेस में अपने शोध कार्य को प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया कि केवल दवाओं से डायबिटीज को कंट्रोल नहीं किया जा सकता। इसके लिए मेडिकल न्यूट्रिशन थाली, फिट प्रोटोकाल, टारगेटेड वेट लाॅस और प्राचीन योग पद्धति को अपनाकर स्वस्थ जीवनशैली से इन सभी बीमारियों को आने से रोका जा सकता है।
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न्यूट्रिशन थाली में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर का संतुलित अनुपात
- डाॅ. सेठ के अनुसार, मेडिकल न्यूट्रिशन थाली में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर का संतुलित अनुपात होता है, जो शुगर को तेजी से बढ़ने से रोकता है।
- वहीं फिट प्रोटोकाल और टारगेटेड वेट लास से इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है।
- प्राचीन योग पद्धति मानसिक तनाव को कम कर हार्मोन्स को संतुलित करती है।
- इस तीन दिवसीय कांफ्रेंस में पूरे प्रदेश से लगभग 800 चिकित्सकों एवं एक्सपर्ट्स ने हिस्सा लिया।
- डायबिटीज प्रबंधन में नए प्रोटोकाल पर डा. सेठ के शोध को सराहा गया और इस अवसर पर उन्हें सम्मानित भी किया गया।