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90 डेसिबल से अधिक की तेज आवाज से असामान्‍य हो सकती है दिल की धड़कन, नवजात शिशुओं के लिए हानिकारक

शिशुओं को डीजे, पटाखे और तेज लाउडस्पीकर से दूर रखें, गर्भवती महिलाएं भी तेज शोर से बचें और बच्चों की नियमित हृदय जांच कराएं। समय पर इलाज से 95 फीसदी ब...और पढ़ें

By Alok BanerjeeEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Thu, 15 Oct 2026 05:10:25 PM (IST)Updated Date: Thu, 15 Oct 2026 05:46:49 PM (IST)
90 डेसिबल से अधिक की तेज आवाज से असामान्‍य हो सकती है दिल की धड़कन, नवजात शिशुओं के लिए हानिकारक
तेज डीजे की आवाज है घातक।

HighLights

  1. बच्चों के नाजुक हृदय और सुनने की क्षमता के लिए हानिकारक है।
  2. तेज बेस वाली आवाज से दिल की धड़कन असामान्य हो सकती है।
  3. ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। हृदय रोगी बच्चों में खतरा बढ़ जाता है।

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जन्मजात हृदय रोग बच्चों में तेजी से बढ़ रहा है। समय पर पहचान न होने से जान को खतरा बढ़ जाता है। लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है। यदि नवजात को दूध पीने में कठिनाई, तेज सांस चलना, वजन न बढ़ना, होंठ और नाखूनों का नीला पड़ना, बार-बार निमोनिया होना और अत्यधिक पसीना आना जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें।

गर्भावस्था के दौरान और जन्म के बाद इको जांच से रोग की जल्दी पहचान संभव है। साथ ही डीजे और तेज आवाज से होने वाले खतरे पर भी ध्यान देने की जरूरत है। 90 डेसिबल से अधिक की तेज आवाज नवजात और छोटे बच्चों के नाजुक हृदय और सुनने की क्षमता के लिए बेहद हानिकारक है।


तेज बेस वाली आवाज से दिल की धड़कन असामान्य हो सकती है, ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और हृदय रोगी बच्चों में यह खतरा और बढ़ जाता है। अत: सलाह है कि शिशुओं को डीजे, पटाखे और तेज लाउडस्पीकर से दूर रखें, गर्भवती महिलाएं भी तेज शोर से बचें और बच्चों की नियमित हृदय जांच कराएं।

समय पर इलाज से 95 फीसदी बच्चों को सामान्य जीवन दिया जा सकता है। यह बात बुधवार को नईदुनिया के हेलो डाॅक्टर कार्यक्रम में एनएससीबी मेडिकल कालेज अंतर्गत सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में प्रोफेसर व शिशु ह्दय रोग विशेषज्ञ डाक्टर प्रदीप जैन ने पाठकों को परामर्श देते हुए कही।

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-- -जरूरी नहीं कि हर केस में सांस लेने में परेशानी ह्दय रोग का कारण हो -- --

सवाल : मेरा बच्चा अभी 8 साल का है। उसे सर्दी-खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी होती है। क्या कोई चिंता की बात तो नहीं है।

रामनरेश नेमा, दमोह

जवाब : सर्दी-खांसी बच्चों को होना बहुत चिंताजनक बात नहीं है। अनेक बच्चों के बीच रहने से किसी दूसरे यह कई बार हो जाता है। सांस लेने में परेशानी के लिए एक बार विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच अवश्य करा लें। हालांकि यह जरूरी नहीं कि सांस लेने में परेशानी ह्दय रोग का कारण हो।

सवाल : मेरा बेटा अभी 9 साल का है, सांस लेने में थोड़ी परेशानी महसूस करता है। कृपया मार्गदर्शन दीजिए।

तृप्ति गोस्वामी, जबलपुर

जवाब : सांस लेने में परेशानी फेफड़े या फिर ह्दय से जुड़ी कोई विकार को लेकर हो सकती है। जरूरी है जांच, इससे संक्रमण से बचाव संभव है। साथ ही ह्दय में छेद अनेक बार समय के साथ भर जाता है।

सवाल : मेरे बच्चे को काफी समय से तेज आवाज से दिक्कत होती है। कई बार तेज डीजे का शोर से गुजरने के बाद कान झनझनाने की शिकायत भी करता है। क्या कारण हो सकता है।

प्रशांत पांडे, जबलपुर

जवाब : बच्चे का तेज आवाज से परेशान होना और डीजे जैसे शोर के बाद कानों में झनझनाहट (घंटी जैसी आवाज) महसूस करना एक गंभीर संकेत है। तेज शोर के कारण भीतरी कान की नसों और हेयर सेल्स को नुकसान पहुंचना इसका मुख्य कारण हो सकता है, जिसे मेडिकल भाषा में शोर-प्रेरित श्रवण हानि और टिनिटस कहा जाता है। बच्चों के कान वयस्कों की तुलना में बहुत अधिक संवेदनशील होते हैं। विशेषज्ञ से एक बार परामर्श लेना चाहिए।

सवाल : शिशु को ह्दय दोष से बचाव के लिए क्या सावधानी पहले से बरतने हितकर होगी।

शिव कोष्टा, कटनी

जवाब : शिशु को जन्मजात हृदय दोष से बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण सावधानियां गर्भधारण के पहले और गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों के दौरान बरतनी होती हैं। भ्रूण का हृदय मुख्य रूप से गर्भावस्था के पहले 6 हफ्तों में विकसित होना शुरू हो जाता है। गर्भधारण से पहले ही डाक्टर की सलाह पर रूबेला वैक्सीन जरूर लगवाएं। गर्भावस्था के दौरान मां को रूबेला संक्रमण होने से शिशु के हृदय विकास पर बहुत बुरा असर पड़ता है।