
लाइफस्टाइल डेस्क। गणेशोत्सव की शुरुआत के साथ ही शहर में भक्ति और उल्लास का माहौल है। इस वर्ष बप्पा के स्वागत और पूजन में एक विशेष बदलाव देखने को मिल रहा है। भगवान श्री गणेश के प्रिय मोदक और पारंपरिक भोग को लेकर श्रद्धालुओं की पसंद में बड़ा अंतर आया है। शहर में अब मावा, खोया और बेसन के पारंपरिक मोदक के स्थान पर आर्गेनिक और फ्यूजन मोदक का नया ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। लोग स्वाद के साथ-साथ सेहत और नए जायके को खास प्राथमिकता दे रहे हैं।
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए शहर के मिष्ठान विक्रेताओं और होम-बेकर्स ने विशेष आर्गेनिक भोग तैयार किए हैं। लश्कर, मुरार, सिटी सेंटर और महाराज बाड़ा के बाजारों में रिफाइंड शुगर और मैदे से मुक्त मोदक की भारी मांग देखी जा रही है।
किसी किसी मिठाई की दुकान पर पोषक तत्वों से भरपूर मोटे अनाजों से तैयार मोदक तैयार किए जा रहे हैं। साथ ही चीनी के बजाय शुद्ध देसी गुड़, खजूर, अंजीर और काजू-बादाम से बने प्राकृतिक मोदक भी तैयार किए जा रहे हैं। मोदक के अलग अलग फ्लेवरों को लोग ले रहे हैं और बप्पा को भोग लगा रहे हैं।
पारंपरिक मिष्ठान में आधुनिकता का तड़का लगाते हुए कारीगरों ने कई अनोखे फ्लेवर बाजार में उतारे हैं। बच्चों और युवाओं के बीच चाकलेट, ओरियो, न्यूटेला और किटकैट मोदक भी तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा पारंपरिक भारतीय जायके को आधुनिक रूप देते हुए पान-गुलकंद, केसर-इलायची और फ्रूट फ्लेवर के फ्यूजन मोदक भी पूजा की थाली की शोभा बढ़ा रहे हैं।
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लोग मोदक ही नहीं बल्कि बप्पा को अर्पित किए जाने वाले भोग में पारंपरिक मिठाइयों के साथ-साथ आधुनिक स्वाद वाली थिमैटिक पेस्ट्रीज, मोतीचूर मूस का भी भोग लगा रहे हैं। शहर के स्थानीय कारोबारियों के अनुसार लोग अब साधारण मोदक की जगह आकर्षक पैकेजिंग और विशेष स्वादों वाले कस्टमाइज्ड मोदक अधिक पसंद कर रहे हैं, जिसने इस बार गणेशोत्सव में एक नया रंग घोल दिया है।