
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। भीषण गर्मी और झुलसाने वाली तपिश झेल रहे ग्वालियर वासियों के लिए राहत की खबर है। अंचल में मानसून जल्द ही दस्तक देने वाला है। प्री-मानसून की आहट और वर्षा ऋतु के आगमन की संभावना को देखते हुए शहर की सरकारी और निजी नर्सरियों में तैयारियां जोरों पर शुरू हो गई हैं।
मानसून के सीजन को देखते हुए नर्सरियों में विभिन्न तरह के फलदार, छायादार और शोभावाले (इंडोर व आउटडोर) पौधे विशेष रूप से तैयार किए जा रहे हैं। धरातल की बात करें तो वर्षा काल को पौधरोपण के लिए सबसे सर्वोत्तम समय माना जाता है।
इस मौसम में हवा में पर्याप्त नमी होती है और लगातार होने वाली वर्षा से पौधों की जड़ें मिट्टी को आसानी से पकड़ लेती हैं, जिससे उनके पनपने की संभावना 90 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। यही वजह है कि शहर के पर्यावरण प्रेमी और बागवानी के शौकीन लोग अभी से तैयारियों में जुट गए हैं।
ग्वालियर के रेसकोर्स रोड, चेतकपुरी, गोला का मंदिर से पुरानी छावनी रोड व अन्य नर्सरियों में इन दिनों विशेष तैयारियां देखी जा रही हैं। मानसून की पहली फुहार पड़ते ही पौधों की मांग तेजी से बढ़ती है, जिसे देखते हुए इस बार हाइब्रिड फलदार पौधों जैसे आम, अमरूद, नींबू और पपीता की खेप तैयार की गई है।
इसके अलावा घरों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए रंग-बिरंगे फूलों वाले पौधे जैसे गुलमोहर, बोगनविलिया, गुड़हल और इनडोर प्लांटेशन के लिए मनी प्लांट, स्नेक प्लांट व अरीका पाम की विशेष वैरायटी तैयार की जा रही है।
गड्ढे और गमले पहले से करें तैयार - पौधों को लगाने के लिए गमलों की मिट्टी को अभी से खोदकर धूप दिखा दें। जमीन में पौधे लगाने हैं तो तय स्थानों पर पहले से गड्ढे खोद लें। पहले से तैयार किए गए गड्ढों और गमलों में मानसून के दौरान पौधे बहुत आसानी से और तेजी से जड़ पकड़ते हैं।
मिट्टी और खाद का सही मिश्रण - गमले तैयार करते समय 60 प्रतिशत सामान्य मिट्टी में 40 प्रतिशत जैविक खाद या केंचुआ खाद यानी वर्मीकम्पोस्ट मिलाकर रख लें। इससे पहली बारिश होते ही मिट्टी न्यूट्रिशन सोखने के लिए तैयार हो जाएगी।
जल निकासी का रखें ध्यान - गमलों के नीचे बने छेद को साफ कर लें ताकि मानसून की भारी वर्षा के दौरान गमलों में पानी जमा न हो। पानी रुकने से पौधों की जड़ें सड़ने का खतरा रहता है।
"जिले की सभी सरकारी नर्सरियों में मानसून को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। इन नर्सरियों में न केवल इनडोर प्लांट तैयार किए जा रहे हैं, बल्कि फलदार पेड़ों के पौधों को भी तैयार किया जा रहा है। क्योंकि जैसे ही वर्षा शुरू होगी, वैसे ही पौधों की डिमांड बढ़ जाएगी। इसके अलावा शहर की प्राइवेट नर्सरियों में भी पौधे खासतौर से इनडोर प्लांट तैयार किए जा रहे हैं।" - एमपीएस बुंदेला, सहायक संचालक, उद्यानिकी