
हेल्थ डेस्क। नवरात्र के नौ दिनों में व्रत रखने के बाद कई लोग फिर से सामान्य खानपान शुरू करते हैं। इस दौरान पूरी, हलवा, पकौड़े, मिठाइयां और दूसरी पसंदीदा चीजें खाने का मन करता है। लेकिन लंबे समय तक सीमित मात्रा में भोजन करने के बाद अचानक बहुत ज्यादा या भारी खाना खाने से पेट में परेशानी हो सकती है।
व्रत के दौरान कम पानी पीने से डिहाइड्रेशन, सिरदर्द, थकान और कब्ज जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। वहीं, एक साथ ज्यादा तला-भुना या मसालेदार खाना खाने से गैस, पेट फूलने, एसिडिटी और मतली की शिकायत हो सकती है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, व्रत के बाद खानपान धीरे-धीरे सामान्य करना बेहतर होता है। हालांकि, इसका तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कितने समय तक व्रत रखा, इस दौरान कितना भोजन और पानी लिया और आपकी सेहत कैसी है।
1. पाचन तंत्र को भोजन के अनुसार ढलना पड़ता है
व्रत के दौरान भोजन की मात्रा और समय बदल जाता है। इसके बाद जब आप दोबारा खाना शुरू करते हैं, तो पाचन तंत्र को भोजन की मात्रा और प्रकार के अनुसार काम करना होता है।
अगर आप अचानक बहुत ज्यादा खाना खा लेते हैं, तो पेट फूलना, गैस, मतली और पेट में भारीपन महसूस हो सकता है। तली हुई चीजें, ज्यादा घी-तेल वाला खाना और भारी ग्रेवी कुछ लोगों में अपच की परेशानी बढ़ा सकती हैं।
2. एसिडिटी और सीने में जलन हो सकती है
नवरात्र के बाद कई लोग तली हुई चीजें, मिठाइयां और मसालेदार व्यंजन ज्यादा खाते हैं। एक बार में ज्यादा भोजन करने से कुछ लोगों में एसिड रिफ्लक्स यानी पेट का एसिड भोजन नली की ओर वापस आने की समस्या बढ़ सकती है।
खाने के तुरंत बाद लेटने से भी सीने में जलन की परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए शुरुआत में कम मात्रा में भोजन करें, धीरे-धीरे खाएं और उन चीजों से बचें, जिनसे पहले भी एसिडिटी होती रही है।
3. पानी की कमी से थकान और कब्ज हो सकती है
अगर व्रत के दौरान आपने सामान्य से कम पानी पिया है, तो शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसके कारण प्यास, सिरदर्द, थकान और कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
कम पानी पीने से मल सख्त हो सकता है। वहीं, भोजन के समय और फाइबर की मात्रा में बदलाव से भी पेट साफ होने की आदत प्रभावित हो सकती है। नियमित अंतराल पर पानी पीना और संतुलित भोजन शुरू करना मददगार हो सकता है।
हालांकि, किडनी या दिल की बीमारी के कारण जिन लोगों को पानी सीमित मात्रा में पीने की सलाह दी गई है, उन्हें डॉक्टर के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
4. ब्लड शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव हो सकता है
व्रत के बाद आप क्या और कितना खाते हैं, इसका असर ब्लड शुगर पर पड़ सकता है। एक बार में बहुत ज्यादा मिठाई, चीनी या रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट खाने से ब्लड ग्लूकोज तेजी से बढ़ सकता है।
डायबिटीज के मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। व्रत के दौरान कुछ परिस्थितियों में ब्लड शुगर कम होने का खतरा भी रहता है। दवाओं और भोजन के समय में बदलाव का असर भी पड़ सकता है। इसलिए डायबिटीज के मरीज व्रत रखने और उसे खोलने के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार योजना बनाएं।
1. हल्के और संतुलित भोजन से शुरुआत करें
व्रत खोलते समय एक साथ भारी भोजन करने के बजाय छोटी मात्रा में खाना शुरू करें। आप अपनी पसंद और पाचन क्षमता के अनुसार हल्की खिचड़ी, दही-चावल, पकी हुई सब्जियां या घर का साधारण संतुलित भोजन ले सकते हैं।
हर व्यक्ति को व्रत खोलने के लिए किसी खास डिटॉक्स ड्रिंक या विशेष डाइट की जरूरत नहीं होती। सामान्य अवधि के व्रत के बाद मुख्य बात है कि जरूरत से ज्यादा खाने से बचें और संतुलित भोजन लें।
2. धीरे-धीरे खाएं और पेट भरकर खाने से बचें
व्रत के बाद तेज भूख लगने पर जल्दी-जल्दी खाना स्वाभाविक है। लेकिन ऐसा करने से जरूरत से ज्यादा भोजन हो सकता है, जिससे पेट फूलने, मतली और भारीपन की परेशानी हो सकती है।
भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाएं और एक बार में बहुत ज्यादा खाने के बजाय जरूरत के अनुसार बाद में थोड़ा और खा सकते हैं।
3. पानी धीरे-धीरे पिएं
व्रत खोलने के बाद नियमित अंतराल पर पानी पिएं। एक ही बार में बहुत ज्यादा पानी पीने की जरूरत नहीं है। फल, सब्जियां और सूप भी शरीर को तरल पदार्थ उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं।
अगर उल्टी, दस्त या ज्यादा पसीना आने के कारण शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हुई है, तो स्थिति के अनुसार ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) की जरूरत हो सकती है। गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
4. फाइबर वाले खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे बढ़ाएं
फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। ये पाचन और मल त्याग को सामान्य रखने में मदद करते हैं।
लेकिन अगर व्रत के दौरान आपने बहुत कम फाइबर लिया है, तो अचानक इसकी मात्रा काफी बढ़ाने से गैस और पेट फूलने की समस्या हो सकती है। इसलिए फाइबर वाले खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे अपनी डाइट में शामिल करें और पर्याप्त पानी पिएं, बशर्ते डॉक्टर ने तरल पदार्थ सीमित करने की सलाह न दी हो।
5. तली हुई चीजें और मिठाइयां सीमित मात्रा में खाएं
नवरात्र के बाद पूरी, पकौड़े, हलवा और दूसरी मिठाइयां खाने का मन हो सकता है। इन्हें पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है, लेकिन शुरुआत में बहुत ज्यादा मात्रा में खाने से बचें।
भारी व्यंजनों के साथ हल्का और संतुलित भोजन लें। अगर कार्बोनेटेड ड्रिंक्स या ज्यादा मसालेदार खाना खाने से आपको गैस या एसिडिटी होती है, तो इनका सेवन सीमित रखें।
6. खाने के तुरंत बाद न लेटें
भोजन करने के तुरंत बाद लेटने से कुछ लोगों में एसिड रिफ्लक्स और सीने में जलन बढ़ सकती है। खाने के बाद कुछ समय सीधे बैठें या आरामदायक स्थिति में रहें। अगर तबीयत ठीक है, तो हल्की सैर भी कर सकते हैं।
हालांकि, भारी भोजन के तुरंत बाद तेज एक्सरसाइज करने से बचें, खासकर जब पेट में भारीपन या मतली महसूस हो रही हो।
लंबे समय तक बहुत कम भोजन करने के बाद अचानक ज्यादा खाना शुरू करने के बजाय धीरे-धीरे सामान्य डाइट पर लौटना बेहतर है।
यह भी समझना जरूरी है कि सामान्य धार्मिक व्रत और कई दिनों तक बहुत कम या बिल्कुल भोजन न करने की स्थिति अलग-अलग हैं। लंबे समय तक पर्याप्त पोषण न मिलने के बाद अचानक भोजन शुरू करने से कुछ लोगों में रीफीडिंग सिंड्रोम (Refeeding Syndrome) का खतरा हो सकता है। इसमें शरीर में फॉस्फेट, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स का स्तर खतरनाक तरीके से बदल सकता है।
जो लोग कुपोषण से जूझ रहे हैं, जिनका हाल में काफी वजन कम हुआ है या जिन्होंने लंबे समय तक बहुत कम भोजन किया है, उन्हें डॉक्टर की निगरानी में दोबारा पोषण शुरू करने की जरूरत पड़ सकती है।
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