
लाइफस्टाइल डेस्क। कभी बढ़ती उम्र की समस्या माने जाने वाले गर्दन, कंधे और पीठ के दर्द की चपेट में अब युवा भी तेजी से आ रहे हैं। जयाआरोग्य अस्पताल समूह के हजार बिस्तर अस्पताल में संचालित पेन क्लीनिक में इन दिनों मांसपेशियों और हड्डियों से जुड़े दर्द के मरीजों में सबसे अधिक संख्या 20 से 50 वर्ष आयु वर्ग की है।
इसके बाद 50 से 60 वर्ष के मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञ इसके पीछे बढ़ते स्क्रीन टाइम, तनाव, नींद की कमी और निष्क्रिय जीवनशैली को भी महत्वपूर्ण कारक मान रहे हैं।
दर्द जागरूकता माह के अवसर पर जीआरएमसी के एनेस्थीसियोलाजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं पेन स्पेशलिस्ट शक्ति सिंघल ने बताया कि दर्द को केवल शरीर की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
लंबे समय तक बना रहने वाला दर्द शरीर के साथ व्यक्ति की मानसिक स्थिति और दिनचर्या से भी प्रभावित हो सकता है। लगातार तनाव और चिंता की स्थिति में शरीर का स्ट्रेस रिस्पान्स सिस्टम सक्रिय बना रह सकता है, जिससे मांसपेशियों में खिंचाव, नींद में व्यवधान और दर्द के प्रति संवेदनशीलता बढ़ सकती है।
डा. सिंघल के अनुसार तनाव और दर्द कई बार एक-दूसरे को बढ़ाने वाला चक्र बना देते हैं। तनाव बढ़ने पर मांसपेशियों में खिंचाव होता है, जिससे नींद प्रभावित होती है और दर्द बढ़ सकता है। दर्द बढ़ने पर चिंता और मानसिक थकान बढ़ती है। इससे व्यक्ति दर्द के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकता है और परेशानी फिर तनाव की स्थिति को बढ़ा सकती है।
पेन क्लीनिक में इन दिनों फ्रोजन शोल्डर, प्लांटर फैशियाइटिस, सर्वाइकल पेन और मायोफेशियल पेन सहित विभिन्न प्रकार के मस्कुलोस्केलेटल दर्द के मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन बीमारियों के अपने शारीरिक कारण होते हैं, लेकिन तनाव, खराब नींद और निष्क्रिय जीवनशैली दर्द को बढ़ाने या लंबे समय तक बनाए रखने में भूमिका निभा सकती है।
