
लाइफस्टाइल डेस्क। विघ्नहर्ता श्री गणेश के स्वागत के लिए शहर का बाजार पूरी तरह सज चुका है। महाराज बाड़ा, किला गेट, मुरार, हजीरा और ठाठिपुर के बाजारों में गजानन की प्रतिमाओं और सजावटी सामान की दुकानों पर भीड़ उमड़ रही है। इस बार गणेशोत्सव को लेकर शहर के श्रद्धालुओं और युवाओं में एक अनूठा और नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। घरों में स्थापना के लिए लोग छोटी और पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं, लेकिन उनकी सजावट और बैकड्राप पर दिल खोलकर खर्च कर रहे हैं।
शहर के मूर्तिकारों और सराफा-पूजा सामग्री विक्रेताओं के अनुसार, इस साल घरों में विराजन के लिए एक फीट से दो फीट की छोटी प्रतिमाओं की सबसे ज्यादा मांग है। इनकी कीमत बाजार में 150 से लेकर 500 रुपये के बीच है। लेकिन इन छोटी प्रतिमाओं के अलौकिक शृंगार और उनके आसपास का माहौल भव्य बनाने के लिए श्रद्धालु दो से पांच हजार तक आसानी से खर्च कर रहे हैं।
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- रेडीमेड मखर और नक्काशीदार दरबार: लकड़ी, फोल्डिंग फैब्रिक और गत्ते से बने पारंपरिक व राजस्थानी थीम वाले रंग-बिरंगे मखर की मांग सबसे अधिक है।
- इको-फ्रेंडली बैकड्राप: थर्माकोल पर प्रतिबंध के बाद जूट, प्राकृतिक कपड़े, आर्टिफिशियल फ्लावर्स और बांस की तीलियों से बने बैकड्राप्स की खूब बिक्री हो रही है।
- एलईडी लाइटिंग और वार्म फोकस लाइट्स: साधारण झालरों के बजाय इस बार पिक्सल लाइट्स, वार्म-व्हाइट फोकस स्पाट्स और मून-लाइट्स का इस्तेमाल बढ़ गया है।
बाड़ा और मुरार के सजावटी सामान विक्रेताओं का कहना है कि ग्राहकों की पसंद में बड़ा बदलाव आया है। युवा और डिजिटल फ्रेंडली पीढ़ी ऐसी डेकोरेशन एक्सेसरीज तलाश रही है, जो घर के कम जगह अपार्टमेंट्स या छोटे कमरों में आसानी से फिट हो जाए और साथ ही देखने में बेहद आकर्षक लगे। खरीदारों का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि बप्पा का दरबार फोटो और इंस्टाग्राम रील्स में भव्य दिखे। इसके लिए बैकड्राप लाइट, बैकग्राउंड म्यूजिक सिस्टम और आकर्षक लाइटिंग सेटिंग्स वाले पोर्टेबल सेटअप की बिक्री में खासा इजाफा हुआ है।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता भी इस बदलाव का बड़ा कारण है। नगर निगम और प्रशासन द्वारा मिट्टी के गणेश स्थापित करने की अपील का असर दिख रहा है। लोग छोटी मिट्टी या गोबर से बनी मूर्तियों को घर ला रहे हैं, जिनका विसर्जन घर पर ही किसी बड़े टब या गमले में आसानी से किया जा सके। मूर्ति भले ही आकार में छोटी हो, लेकिन बप्पा के प्रति भक्ति और उत्साह में कोई कमी नहीं है