
नईदुनिया प्रतिनिधि इंदौर। किसी के हाथ में ब्रश है, सामने सफेद कैनवास और बगल में काफी का कप। कोई मिट्टी को आकार दे रहा है तो कोई आईने पर सजावटी मटेरियल से डिजाइन बना रहा है। शहर में अब क्रिएटिविटी सिर्फ बाजार से खरीदने तक सीमित नहीं है।
युवा अपनी पसंद की चीजों को खुद तैयार करने का अनुभव ले रहे हैं। कैफे और वर्कशाप में पाॅटरी, फेस आर्ट, बैग पेंटिंग और अलग-अलग तरह की कला सीखने का मौका मिल रहा है।
यहां तैयार की गई चीजें घर की सजावट का हिस्सा बन रही हैं, तो कुछ युवाओं के लिए यह अपनी हाॅबी को समय देने का नया तरीका भी है। शहर में कैफे को केवल खाने-पीने की जगह के साथ ही लोगों को जुड़ने और रिलैक्स करने का माध्यम भी बनाया जा रहा है।
इसी सोच के साथ पाॅटरी मेकिंग, क्रोशिया, टेराकोटा मेकिंग और कैनवास पेंटिंग जैसी वर्कशाप कराई जा रही हैं। इनमें 18 से 30 वर्ष तक के युवा अधिक शामिल होते हैं। दोस्तों, कपल्स और अकेले आने वाले प्रतिभागियों को यहां कुछ नया सीखने के साथ अपनी क्रिएटिविटी जाहिर करने का मौका मिलता है।
शहर में आर्ट वर्कशाॅप की शुरुआत करीब एक साल पहले लगभग दस क्रिएटिव गतिविधियों के साथ हुई थी। वर्कशाॅप आर्गेनाइजर अवनी विजयवर्गीय बताती हैं कि अब 29 तरह की वर्कशाॅप कराई जा रही हैं। हर आयोजन में करीब दो नई गतिविधियां जोड़ी जाती हैं, ताकि लोगों को हर बार कुछ अलग सीखने का मौका मिले।
हाल के आयोजनों में जापानी डिकोडन आर्ट और ट्रिंकेट ट्रे मेकिंग शामिल की गई। अब तक करीब 35 वर्कशाप इवेंट आयोजित किए जा चुके हैं। पहले आयोजन में करीब 80 सदस्य जुड़े थे, जबकि अब हर आयोजन में औसतन 200 से 210 सदस्य शामिल होते हैं। जून में सर्कस थीम पर हुए आयोजन में करीब 255 सदस्य पहुंचे थे। यह बताता है कि कला के प्रति लोगों का रूझान बढ़ता जा रहा है।
चित्रा भाटिया किलबानी बताती हैं कि हर कैफे में कला से जुड़ी गतिविधियां करवाने का मकसद यह है कि जो लोग पूरे सप्ताह आफिस में व्यस्त रहते हैं। क्लास जाकर कला सीखने, समझने का समय नहीं होता लेकिन शौक रखते हैं। इसको ध्यान में रखते हुए हम रविवार को आर्टवर्कशाप रखते हैं जहां हर उम्र के लोग आते हैं और मनोरंजन के साथ कला की शुरुआती जानकारी भी हासिल कर गोंड आर्ट, टेक्सचर आर्ट, कैनवास पेंटिंग और क्ले माडलिंग एक्टिविटी का हिस्सा बनते हैं।
जापानी डिकोडन आर्ट की वर्कशाप में शामिल हुईं आयुषी गिडवानी ने पहली बार इस कला को आजमाया। उन्होंने क्ले जैसे मटेरियल से आईने पर सजावटी डिजाइन तैयार किया। आयुषी बताती हैं कि पूरी प्रक्रिया काफी सुंदर और रचनात्मक रही। तैयार नतीजा देखकर वे बहुत खुश हुईं। उनका कहना है कि ऐसी वर्कशाप में हर किसी को एक बार जरूर शामिल होना चाहिए, क्योंकि इसमें तैयार सामान के साथ नया अनुभव भी मिलता है।
गोंड आर्ट वर्कशाॅप में शामिल हुईं ज्योत्सना शर्मा बताती हैं कि उनके लिए यह अनुभव केवल पैटर्न और आकृतियां बनाने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने इनके पीछे छिपी कहानियों और परंपराओं को भी समझा। अपने हाथों से कला को आकार देना और प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन उन्हें खास लगा। उनका कहना है कि ऐसी वर्कशाप कामकाजी लोगों को अपनी रचनात्मक रुचियों के लिए समय निकालने का आसान मौका देती हैं।
बुकमार्क मेकिंग, वुडन पेंटिंग, पेपर क्विलिंग, फेस आर्ट, टेराकोटा प्लेट पेंटिंग, टोट बैग पेंटिंग, क्ले डेट, कैनवास पेंटिंग, ज्वेलरी बाक्स पेंटिंग और डिकोडन मिरर वर्कशाप जैसी गतिविधियां कराई जा रही हैं। इनमें बच्चे, किशोर, युवा, कपल्स, कामकाजी लोग और बड़े उम्र के लोग अपनी रुचि के अनुसार हिस्सा ले सकते हैं। आयोजकों के अनुसार, इन गतिविधियों का उद्देश्य लोगों को कुछ समय मोबाइल और रोजमर्रा की व्यस्तता से दूर रखकर अपने हाथों से कुछ बनाने, नई कला सीखने और अपनी रचनात्मकता को सामने लाने का मौका देना है।