
लाइफस्टाइल डेस्क। भारतीय रसोइयों में घी को स्वाद और सेहत दोनों का प्रतीक माना जाता है। दाल में तड़का लगाना हो, रोटियों पर चुपड़ना हो या त्योहारों पर मिठाइयां बनानी हों, शुद्ध देशी घी हमारी दैनिक जीवन शैली का अहम हिस्सा है।
आयुर्वेद से लेकर आधुनिक पोषण विज्ञान तक, सीमित मात्रा में घी के सेवन को हड्डियों की मजबूती, पाचन क्रिया में सुधार और शारीरिक ऊर्जा के लिए बेहद गुणकारी माना गया है।
लेकिन क्या आप जिस घी का सेवन कर रहे हैं, वह वास्तव में आपकी सेहत बना रहा है या उसे बिगाड़ रहा है। हालिया जांच रिपोर्टों ने बाजार में बिकने वाले डिब्बा बंद घी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानि एफएसएसएआई द्वारा की गई सघन जांच और लैब टेस्टिंग में पाया गया है कि बाजार में मौजूद कई जाने-माने ब्रांड्स का घी तय मानकों पर खरा नहीं उतर पाया है।
जांच में मिलावट और घटिया गुणवत्ता की पुष्टि होने के बाद एफएसएसएआई ने कड़ा कदम उठाते हुए सिद्धार्थ काऊ घी, गोकुल घी और सरस घी जैसे लोकप्रिय ब्रांडों की बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
- एफएसएसएआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इन ब्रांड्स के सैंपलों में वाष्पशील पदार्थ, वसा का असंतुलन और पाम आयल या पशुओं की चर्बी जैसी मिलावटी सामग्रियां पाई गईं। ऐसा मिलावटी या रिफाइंड केमिकल्स युक्त घी खाने से शरीर को फायदे की जगह निम्नलिखित गंभीर नुकसान पहुंच सकते हैं।
- हृदय संबंधी बीमारियां: नकली या मिलावटी घी में भारी मात्रा में ट्रांस-फैट और सैचुरेटेड फैट का असंतुलन होता है, जो धमनियों में बैड कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) को बढ़ाता है। इससे हार्ट अटैक और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
- पाचन तंत्र में गड़बड़ी: सिंथेटिक रसायनों से तैयार घी पेट की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाता है, जिससे एसिडिटी, गैस, कब्ज और पेट में जलन की समस्या रहने लगती है।
- लिवर और किडनी पर दबाव: मिलावटी खाद्य पदार्थों को फिल्टर करने के लिए हमारे लिवर और किडनी को अतिरिक्त काम करना पड़ता है, जिससे लंबे समय में इन अंगों के डैमेज होने की संभावना बढ़ जाती है।
- पैकेट लेबल जांचें: हमेशा एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर, बैच नंबर और मैन्युफैक्चरिंग डेट ध्यान से देखें।
- हथेली पर टेस्ट: थोड़ा सा घी अपनी हथेली पर रखें। यदि घी शरीर की प्राकृतिक गर्मी से तुरंत पिघल जाए, तो वह शुद्ध है। अगर पिघलने में समय ले या जम जाए, तो उसमें मिलावट हो सकती है।
- गर्म करके देखें: एक बर्तन में एक चम्मच घी गर्म करें। यदि घी तुरंत पिघलकर गहरे भूरे रंग का हो जाए, तो वह असली है। यदि पिघलने पर यह पीले रंग का ही रहे, तो इसमें मिलावट की आशंका रहती है।
- जांचे-परखे ब्रांड्स का ही चयन: अपनी और अपने परिवार की सेहत से समझौता न करें। डिब्बाबंद घी खरीदते समय सिर्फ विज्ञापनों पर भरोसा न करें, बल्कि प्रामाणिक और जांचे-परखे ब्रांड्स का ही चयन करें।