
लाइफस्टाइल डेस्क। महिलाओं में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। पहले यह समस्या मुख्य रूप से शहरों में देखने को मिलती थी, लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं भी मोटापे की चपेट में आ रही हैं। इसका एक बड़ा कारण खान-पान को लेकर सही समझ का अभाव है।
बचपन से मोटापा होने पर आगे चलकर पीसीओडी जैसी हार्मोन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इससे मासिक धर्म में अनियमितता और गर्भधारण में परेशानी हो सकती है। मोटापे का असर प्रजनन स्वास्थ्य के साथ हृदय पर भी पड़ता है।
गर्भावस्था के दौरान भी अधिक वजन के कारण कई तरह की जटिलताएं बढ़ सकती हैं। उम्र बढ़ने के साथ मोटापे से हृदय रोग, शुगर और जोड़ों से संबंधित समस्याओं का जोखिम बढ़ता है।

डाॅ. वरुणा पाठक, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ के अनुसार मोटापे और हार्मोनल बदलावों के कारण कुछ महिलाओं में गर्भाशय के कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।
इसलिए महिलाओं को बचपन से ही संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और वजन पर नियंत्रण रखने पर नियमित रूप से ध्यान देना चाहिए।
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